मुंबई। देश के सबसे बड़े कारोबारी समूहों में शामिल टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस में नेतृत्व को लेकर एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने साफ कर दिया है कि फरवरी 2027 में अपना मौजूदा कार्यकाल खत्म होने के बाद वह दोबारा नियुक्ति नहीं चाहते। लेकिन अब टाटा संस के बोर्ड के भीतर एक वर्ग चाहता है कि चंद्रशेखरन अपने फैसले पर फिर से विचार करें। रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी की नॉमिनेशन एंड रिम्यूनरेशन कमेटी यानी NRC उनसे पद पर बने रहने की अपील कर सकती है। दूसरी तरफ बहुसंख्यक शेयरधारक टाटा ट्रस्ट्स उनके पद छोड़ने के फैसले को स्वीकार कर चुका है। इसी वजह से नेतृत्व के सवाल पर टाटा समूह के शीर्ष स्तर पर अलग-अलग राय दिखाई दे रही है।
इस पूरे मामले पर अब 17 सितंबर को प्रस्तावित टाटा संस की बोर्ड बैठक पर निगाहें टिकी हैं। इस बैठक में चंद्रशेखरन के भविष्य के साथ कंपनी के दूसरे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी चर्चा होने की संभावना है। इसी बीच भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से टाटा संस के Core Investment Company रजिस्ट्रेशन को सरेंडर करने की कोशिश को स्वीकार नहीं किए जाने की खबर ने कंपनी की संभावित लिस्टिंग का मुद्दा भी फिर गर्म कर दिया है।
आखिर चंद्रशेखरन ने क्या फैसला किया?
एन चंद्रशेखरन का मौजूदा कार्यकाल फरवरी 2027 में समाप्त होना है। अगस्त में उन्होंने घोषणा की थी कि वह इसके बाद टाटा संस के चेयरमैन के रूप में दोबारा नियुक्ति नहीं चाहते। यह फैसला इसलिए भी चौंकाने वाला था क्योंकि इससे पहले उनके तीसरे कार्यकाल को लेकर लंबे समय से चर्चा चल रही थी।
चंद्रशेखरन ने पर्याप्त सर्वसम्मत समर्थन नहीं मिलने की पृष्ठभूमि में आगे कार्यकाल न मांगने का फैसला किया था। इसके बाद टाटा ट्रस्ट्स ने नए चेयरमैन की तलाश के लिए प्रक्रिया आगे बढ़ाने का निर्णय लिया। टाटा ट्रस्ट्स टाटा संस का सबसे प्रभावशाली शेयरधारक है और उसकी हिस्सेदारी करीब दो-तिहाई है।
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। अब टाटा संस के बोर्ड के भीतर से चंद्रशेखरन को रोकने की कोशिश सामने आ रही है।
कौन चाहता है चंद्रशेखरन फिर बनें चेयरमैन?
सबसे महत्वपूर्ण भूमिका टाटा संस की **Nomination and Remuneration Committee (NRC)** की बताई जा रही है। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक NRC चंद्रशेखरन के पद छोड़ने के फैसले से सहमत नहीं है और उनसे इस पर पुनर्विचार करने के लिए कह सकती है।
कमेटी से जुड़े पक्ष का मानना है कि टाटा समूह इस समय महत्वपूर्ण बदलावों से गुजर रहा है और ऐसे समय में चंद्रशेखरन के अनुभव तथा नेतृत्व की जरूरत बनी हुई है। यही कारण है कि NRC चाहती है कि वह अपने फैसले को बदलें और आगे भी टाटा संस का नेतृत्व करें।
यानी एक तरफ उत्तराधिकारी खोजने की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है और दूसरी तरफ मौजूदा चेयरमैन को ही रोकने की कोशिश की जा रही है।
टाटा ट्रस्ट्स का क्या रुख है?
मामले का दूसरा पक्ष टाटा ट्रस्ट्स है। टाटा ट्रस्ट्स ने चंद्रशेखरन के फरवरी 2027 में पद छोड़ने के फैसले को स्वीकार किया है और उनके उत्तराधिकारी की तलाश के लिए प्रक्रिया शुरू करने का फैसला किया है।
यहीं से टाटा संस बोर्ड और उसके सबसे बड़े शेयरधारक के रुख में अंतर दिखाई देता है। NRC यदि औपचारिक रूप से चंद्रशेखरन को बने रहने के लिए कहती है तो यह टाटा ट्रस्ट्स की मौजूदा दिशा से अलग होगा।
हालांकि इसे अभी औपचारिक टकराव या कंपनी के टूटने जैसी स्थिति कहना सही नहीं होगा। यह नेतृत्व के सवाल पर अलग-अलग संस्थागत राय है और अंतिम निर्णय कंपनी की निर्धारित कॉरपोरेट प्रक्रिया के तहत होगा।
पहले तीसरे कार्यकाल के लिए मिला था समर्थन
इस मामले में एक दिलचस्प मोड़ यह भी है कि चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल की चर्चा नई नहीं है। मार्च 2026 में रिपोर्ट आई थी कि टाटा ट्रस्ट्स के भीतर भी उनके तीसरे कार्यकाल को समर्थन मिला था। बाद में नेतृत्व और शासन से जुड़े घटनाक्रमों के बीच परिस्थितियां बदलती गईं।
अगस्त तक स्थिति यहां पहुंच गई कि चंद्रशेखरन ने खुद दोबारा नियुक्ति नहीं मांगने की घोषणा कर दी। अब सितंबर में NRC की ओर से उनके फैसले पर पुनर्विचार कराने की कोशिश की खबर सामने आई है।
इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि टाटा समूह के अगले नेतृत्व को लेकर अंतिम तस्वीर अभी पूरी तरह तय नहीं हुई है।
क्यों महत्वपूर्ण हैं एन चंद्रशेखरन?
एन चंद्रशेखरन ने फरवरी 2017 में टाटा संस की कमान संभाली थी। इससे पहले वह टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज यानी TCS के शीर्ष नेतृत्व में रह चुके थे। टाटा संस की जिम्मेदारी संभालने के बाद उनके सामने समूह के कई पुराने विवादों को पीछे छोड़ने के साथ कारोबार को नई दिशा देने की चुनौती थी।
उनके कार्यकाल में टाटा समूह ने कई बड़े रणनीतिक फैसले किए। एयर इंडिया का अधिग्रहण, इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर जैसे नए क्षेत्रों में निवेश, डिजिटल कारोबार का विस्तार और समूह की विभिन्न कंपनियों के पुनर्गठन जैसी पहलों ने टाटा के कारोबारी स्वरूप में बड़े बदलाव किए।
यही कारण है कि उनके उत्तराधिकारी का चुनाव केवल चेयरमैन बदलने तक सीमित नहीं है। नया चेयरमैन ऐसे समय में कमान संभालेगा जब टाटा समूह विमानन, ऑटोमोबाइल, आईटी, इलेक्ट्रॉनिक्स, स्टील, रिटेल और नई तकनीकों सहित कई क्षेत्रों में बड़े निवेश और बदलाव के दौर से गुजर रहा है।
अब लिस्टिंग का मुद्दा भी सामने
चंद्रशेखरन के उत्तराधिकार की बहस के बीच टाटा संस की संभावित शेयर बाजार लिस्टिंग का मुद्दा भी एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
13 सितंबर को सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक RBI ने टाटा संस के Core Investment Company के तौर पर रजिस्ट्रेशन को सरेंडर करने के आवेदन को स्वीकार नहीं किया। इससे NBFC-Upper Layer से जुड़े नियामकीय नियम और संभावित लिस्टिंग का सवाल फिर महत्वपूर्ण हो गया है।
टाटा संस लंबे समय से निजी कंपनी बनी हुई है। लेकिन इसकी लिस्टिंग होती है तो यह भारतीय पूंजी बाजार के इतिहास की सबसे बड़ी कॉरपोरेट घटनाओं में से एक हो सकती है।
इस मुद्दे पर भी अलग-अलग शेयरधारकों के हित हैं। टाटा ट्रस्ट्स कंपनी पर अपना दीर्घकालिक प्रभाव बनाए रखने के नजरिए से लिस्टिंग को लेकर सतर्क रहा है, जबकि शापूरजी पल्लोनजी समूह के लिए अपनी हिस्सेदारी की वैल्यू अनलॉक करने के लिहाज से लिस्टिंग महत्वपूर्ण हो सकती है। SP समूह की टाटा संस में करीब 18 प्रतिशत हिस्सेदारी है।
17 सितंबर की बैठक क्यों अहम?
अब सारी निगाहें टाटा संस की आगामी बोर्ड बैठक पर हैं। रिपोर्ट के मुताबिक 17 सितंबर की बैठक में चंद्रशेखरन के भविष्य का सवाल सामने आ सकता है। NRC की ओर से उन्हें अपना फैसला बदलने के लिए कहे जाने की संभावना इस बैठक को और महत्वपूर्ण बना देती है।
इसके साथ ही RBI के ताजा रुख और टाटा संस की संभावित लिस्टिंग से जुड़े मुद्दे पर भी चर्चा होने की संभावना है। यानी बोर्ड के सामने एक साथ नेतृत्व और कंपनी के भविष्य की संरचना से जुड़े बड़े सवाल मौजूद हैं।
यदि चंद्रशेखरन अपना फैसला बदलते हैं तो उत्तराधिकारी खोजने की प्रक्रिया की दिशा बदल सकती है। अगर वह फरवरी 2027 में पद छोड़ने के फैसले पर कायम रहते हैं तो टाटा ट्रस्ट्स और संबंधित संस्थाओं को नए चेयरमैन की तलाश तेजी से आगे बढ़ानी होगी।
कौन होगा अगला चेयरमैन?
चंद्रशेखरन की घोषणा के बाद से संभावित उत्तराधिकारी को लेकर कई नामों पर अटकलें चल रही हैं। लेकिन अभी किसी नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। टाटा ट्रस्ट्स ने उत्तराधिकारी चुनने के लिए सर्च कमेटी की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही है।
ऐसे में किसी व्यक्ति को अभी अगला चेयरमैन मान लेना जल्दबाजी होगी।
टाटा समूह की संरचना को देखते हुए नया चेयरमैन चुनना सामान्य कॉरपोरेट नियुक्ति से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। टाटा संस पूरे समूह की प्रमुख होल्डिंग कंपनी है और इसकी रणनीतिक दिशा का प्रभाव TCS, टाटा मोटर्स, टाटा स्टील, एयर इंडिया, टाइटन, ट्रेंट और समूह की दूसरी कंपनियों तक जाता है।
क्या सच में टाटा संस में दो फाड़ है?
ताजा घटनाक्रम से इतना स्पष्ट है कि एन चंद्रशेखरन के भविष्य को लेकर अलग-अलग राय मौजूद हैं। टाटा ट्रस्ट्स उनके पद छोड़ने के फैसले को स्वीकार करते हुए उत्तराधिकारी खोजने की दिशा में आगे बढ़ चुका है, जबकि टाटा संस की NRC चाहती है कि वह अपने फैसले पर दोबारा विचार करें।
इसी मतभेद के कारण इसे बोर्ड के भीतर विभाजित राय के रूप में देखा जा रहा है। लेकिन फिलहाल इसे किसी निर्णायक कॉरपोरेट संघर्ष का नाम देना जल्दबाजी होगी।
असली तस्वीर 17 सितंबर की बोर्ड बैठक और उसके बाद लिए जाने वाले फैसलों से ज्यादा स्पष्ट हो सकती है।
फिलहाल टाटा समूह के सामने तीन बड़े सवाल हैं—क्या एन चंद्रशेखरन फरवरी 2027 में पद छोड़ने के अपने फैसले पर कायम रहेंगे, क्या NRC उन्हें तीसरे कार्यकाल के लिए मनाने में सफल होगी और अगर वह नहीं माने तो देश के सबसे बड़े कारोबारी समूहों में से एक की कमान आखिर किसके हाथ में जाएगी?
इन सवालों के बीच RBI के ताजा कदम ने टाटा संस की संभावित लिस्टिंग का मुद्दा भी जोड़ दिया है। ऐसे में आने वाले कुछ दिन टाटा समूह के नेतृत्व और उसकी भविष्य की कॉरपोरेट संरचना—दोनों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।
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