New Delhi नई दिल्ली : दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव के बीच पेट्रोल के दाम एक बार फिर चर्चा का विषय बने हुए हैं। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का असर कई देशों में पेट्रोल की कीमतों पर दिखाई दे रहा है। इसी बीच एक दिलचस्प तुलना सामने आई है, जिसने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। भारत में जहां एक साधारण समोसा औसतन 15 रुपये में मिलता है, वहीं लीबिया में इसी रकम में करीब 6.5 लीटर पेट्रोल खरीदा जा सकता है। यह तुलना दुनिया के अलग-अलग देशों में ईंधन की कीमतों में भारी अंतर को दर्शाती है।
ताजा वैश्विक आंकड़ों के अनुसार, दुनिया में सबसे सस्ता पेट्रोल फिलहाल लीबिया में उपलब्ध है। वहां एक लीटर पेट्रोल की कीमत भारतीय मुद्रा में लगभग 2.25 रुपये है। यानी भारत में मिलने वाले एक समोसे की कीमत में लीबिया में कई लीटर पेट्रोल खरीदा जा सकता है। यही वजह है कि सोशल मीडिया और आर्थिक हलकों में यह तुलना तेजी से चर्चा का विषय बनी हुई है।
सबसे सस्ते पेट्रोल वाले देशों की सूची में दूसरा स्थान ईरान का है। यहां एक लीटर पेट्रोल की कीमत करीब 2.27 रुपये है। तीसरे स्थान पर वेनेजुएला है, जहां पेट्रोल लगभग 3.36 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से बिक रहा है। इन तीनों देशों की एक समान विशेषता यह है कि ये बड़े कच्चे तेल उत्पादक देश हैं और घरेलू बाजार में ईंधन पर भारी सब्सिडी या सरकारी नियंत्रण के कारण कीमतें बेहद कम बनी रहती हैं।
दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंचने लगी है। वैश्विक तनाव और आपूर्ति को लेकर बढ़ती चिंताओं के कारण आने वाले समय में इसमें और तेजी की आशंका भी जताई जा रही है। इसका असर कई देशों में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों पर पड़ रहा है।
पाकिस्तान समेत कई देशों में हाल के दिनों में पेट्रोल की कीमतों में फिर से बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं, दुनिया में पेट्रोल की औसत कीमत भी बढ़कर लगभग 141 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई है, जो पहले करीब 137 रुपये प्रति लीटर थी। इससे साफ है कि अधिकांश देशों में ईंधन महंगा हो रहा है, जबकि कुछ तेल उत्पादक देशों में अब भी कीमतें बेहद कम बनी हुई हैं।
भारत की बात करें तो यहां पेट्रोल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के दाम, आयात लागत, केंद्र और राज्य सरकारों के कर तथा अन्य शुल्कों पर निर्भर करती हैं। भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है, इसलिए वैश्विक बाजार में होने वाले बदलाव का सीधा असर घरेलू ईंधन कीमतों पर पड़ता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी जारी रहती है, तो इसका असर आने वाले समय में कई देशों की अर्थव्यवस्था और महंगाई पर भी पड़ सकता है। हालांकि, तेल उत्पादक देशों में सरकारी नीतियों और स्थानीय उत्पादन के कारण आम लोगों को अब भी बेहद कम कीमत पर पेट्रोल उपलब्ध हो रहा है। यही वजह है कि दुनिया के अलग-अलग देशों में पेट्रोल की कीमतों में इतना बड़ा अंतर देखने को मिलता है।