मुंबई। शेयर बाजार में गुरुवार 10 सितंबर को टाटा ग्रुप की कंपनी Tata Investment Corporation के शेयरों में जबरदस्त हलचल देखने को मिली। पिछले कारोबारी सत्र में कमजोरी के बाद शेयर ने अचानक जोरदार रफ्तार पकड़ी और BSE पर कारोबार के दौरान करीब 9 प्रतिशत तक उछलकर 675 रुपये के स्तर को छू लिया। एक दिन पहले यह शेयर 618.30 रुपये पर बंद हुआ था। इस हिसाब से इंट्राडे हाई पर निवेशकों को एक ही सत्र में करीब 56.70 रुपये प्रति शेयर का उछाल देखने को मिला।
Tata Investment Corporation का शेयर इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि करीब एक साल पहले इसकी कीमत कई हजार रुपये में थी। कंपनी ने अपने एक शेयर को 10 हिस्सों में बांटने का फैसला किया था। इस स्टॉक स्प्लिट के बाद शेयर की फेस वैल्यू 10 रुपये से घटकर 1 रुपये हो गई और निवेशकों के पास मौजूद प्रत्येक एक शेयर के बदले 10 शेयर हो गए।
कंपनी की 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक बोर्ड ने 4 अगस्त 2025 को स्टॉक स्प्लिट की सिफारिश की थी। शेयरधारकों ने 21 सितंबर 2025 को पोस्टल बैलेट के जरिए प्रस्ताव को मंजूरी दी। इसके बाद 14 अक्टूबर 2025 को रिकॉर्ड डेट के साथ स्टॉक स्प्लिट प्रभावी हो गया।
एक शेयर के बन गए थे 10 शेयर
Tata Investment Corporation ने 1:10 के अनुपात में स्टॉक स्प्लिट किया था। आसान भाषा में समझें तो जिस निवेशक के पास स्प्लिट से पहले कंपनी का एक शेयर था, उसके पास बाद में 10 शेयर हो गए।
मसलन किसी निवेशक के पास पहले 100 शेयर थे तो स्टॉक स्प्लिट के बाद उसकी संख्या बढ़कर 1,000 शेयर हो गई। हालांकि केवल स्टॉक स्प्लिट से निवेश की कुल वैल्यू नहीं बढ़ती। शेयरों की संख्या बढ़ने के साथ प्रति शेयर कीमत आनुपातिक रूप से समायोजित हो जाती है।
कंपनी की वार्षिक रिपोर्ट बताती है कि स्टॉक स्प्लिट के बाद उसकी चुकता इक्विटी पूंजी 50.5953 करोड़ रुपये रही, जो 1 रुपये फेस वैल्यू वाले लगभग 50.60 करोड़ शेयरों में विभाजित है।
गुरुवार को 675 रुपये तक पहुंचा शेयर
10 सितंबर को Tata Investment Corporation के शेयर ने BSE पर 618.55 रुपये से कारोबार शुरू किया। इसके बाद इसमें तेज खरीदारी देखने को मिली और भाव 675 रुपये तक पहुंच गया। उपलब्ध सुबह के बाजार डेटा में शेयर 670 रुपये के आसपास कारोबार करता दिखा, जो पिछले बंद भाव के मुकाबले 8 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी थी।
शेयर का पिछला बंद भाव BSE पर 618.30 रुपये था। 675 रुपये के इंट्राडे हाई के आधार पर देखें तो शेयर ने पिछले बंद से करीब 9.17 प्रतिशत की छलांग लगाई।
हालांकि शेयर बाजार में भाव लगातार बदलते रहते हैं, इसलिए 675 रुपये को उस कारोबारी सत्र का इंट्राडे स्तर समझना जरूरी है, न कि अंतिम क्लोजिंग प्राइस।
एक दिन पहले दिखी थी कमजोरी
इस तेजी को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि एक दिन पहले यानी 9 सितंबर को Tata Investment Corporation के शेयर में कमजोरी थी। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार NSE पर शेयर 618.80 रुपये के आसपास बंद हुआ था।
अगले ही कारोबारी दिन शेयर में खरीदार लौटे और भाव तेजी से ऊपर गया। इससे स्टॉक में अचानक बढ़ी ट्रेडिंग दिलचस्पी चर्चा का विषय बन गई।
पिछले एक महीने के आंकड़े देखें तो शेयर में काफी उतार-चढ़ाव रहा है। 10 अगस्त को इसका बंद भाव 687.90 रुपये था। 12 अगस्त को शेयर ने 714.80 रुपये का हाई बनाया था। इसके बाद दबाव बढ़ा और सितंबर के शुरुआती दिनों में शेयर 620 रुपये के आसपास आ गया।
52 सप्ताह में 1184 रुपये तक गया शेयर
Tata Investment Corporation के शेयर का 52 सप्ताह का दायरा भी काफी बड़ा रहा है। 10 सितंबर के उपलब्ध BSE डेटा के मुताबिक इसका 52 सप्ताह का उच्च स्तर 1,184 रुपये और निचला स्तर 538.70 रुपये रहा है।
यानी 675 रुपये तक पहुंचने के बावजूद शेयर अभी अपने 52 सप्ताह के उच्च स्तर से काफी नीचे है। दूसरी ओर 52 सप्ताह के निचले स्तर से तुलना करें तो इसमें उल्लेखनीय रिकवरी दिखाई देती है।
इस तरह निवेशकों के लिए हाल की तेजी आकर्षक जरूर है, लेकिन लंबी अवधि का चार्ट बताता है कि स्टॉक में पहले काफी बड़ा उतार-चढ़ाव देखने को मिल चुका है।
क्या करती है Tata Investment Corporation?
Tata Investment Corporation टाटा समूह की एक गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी है। इसका मुख्य कारोबार विभिन्न सूचीबद्ध और गैर-सूचीबद्ध कंपनियों के शेयरों, डिबेंचरों और अन्य वित्तीय साधनों में निवेश से जुड़ा है।
यही वजह है कि कंपनी के प्रदर्शन को केवल उसके नियमित कारोबार की कमाई से नहीं देखा जाता। उसके निवेश पोर्टफोलियो की बाजार कीमत भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
कंपनी के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक 30 जून 2026 को उसकी कुल इक्विटी करीब 33,163.25 करोड़ रुपये थी। पोस्ट-स्प्लिट आधार पर कुल इक्विटी प्रति शेयर करीब 656 रुपये बैठती थी। 31 मार्च 2026 को यह आंकड़ा करीब 569.90 रुपये प्रति शेयर था।
दिलचस्प बात यह है कि 10 सितंबर के कारोबार में शेयर का भाव 675 रुपये तक पहुंचा, जो कंपनी द्वारा जून के अंत के लिए बताए गए 656 रुपये प्रति शेयर के कुल इक्विटी आंकड़े से भी ऊपर था।
स्प्लिट से पहले 6000 रुपये से ज्यादा का था गणित
स्टॉक स्प्लिट के प्रभाव को समझने के लिए कंपनी के पुराने आंकड़े देखना उपयोगी है। 30 जून 2025 को स्प्लिट से पहले कंपनी की कुल इक्विटी प्रति शेयर 6,831 रुपये थी। 31 मार्च 2025 को यह 6,086 रुपये और 31 दिसंबर 2024 को 6,654 रुपये थी।
स्टॉक स्प्लिट के बाद इन्हीं आंकड़ों की तुलना नए 1 रुपये फेस वैल्यू वाले शेयरों के हिसाब से की जाती है। इसलिए शेयर का मौजूदा भाव 600-700 रुपये के आसपास दिखाई देना कंपनी के मूल्य में अपने आप 90 प्रतिशत गिरावट का संकेत नहीं है। इसका बड़ा कारण एक पुराने शेयर का 10 नए शेयरों में विभाजन है।
यही बात निवेशकों के लिए समझना बेहद जरूरी है। स्टॉक स्प्लिट के पहले और बाद के भावों की सीधी तुलना करने से गलत निष्कर्ष निकल सकता है।
क्यों किया जाता है स्टॉक स्प्लिट?
कंपनियां आमतौर पर शेयर की कीमत को छोटे निवेशकों के लिए अधिक सुलभ बनाने और बाजार में लिक्विडिटी बढ़ाने के उद्देश्य से स्टॉक स्प्लिट करती हैं।
मान लीजिए किसी शेयर की कीमत 7,000 रुपये है। छोटे निवेशक के लिए बड़ी संख्या में शेयर खरीदना महंगा हो सकता है। अगर वही शेयर 1:10 के अनुपात में विभाजित हो जाए तो सैद्धांतिक रूप से उसकी समायोजित कीमत करीब 700 रुपये हो जाएगी और शेयरों की संख्या 10 गुना बढ़ जाएगी।
लेकिन कंपनी की कुल मार्केट वैल्यू केवल इस कॉरपोरेट एक्शन के कारण नहीं बदलती। शेयरों की संख्या बढ़ती है और प्रति शेयर कीमत उसी अनुपात में समायोजित होती है।
Tata Investment Corporation के मामले में भी फेस वैल्यू 10 रुपये से घटकर 1 रुपये हो गई थी।
निवेशकों को मिला डिविडेंड भी
कंपनी अपने शेयरधारकों को डिविडेंड भी देती रही है। उपलब्ध कॉरपोरेट एक्शन डेटा के अनुसार जून 2026 में कंपनी ने 3.40 रुपये प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड दिया था। यह आंकड़ा स्टॉक स्प्लिट के बाद की फेस वैल्यू के आधार पर है।
इसके पहले जून 2025 में कंपनी ने 27 रुपये प्रति शेयर और जून 2024 में 28 रुपये प्रति शेयर का डिविडेंड घोषित किया था। पुराने आंकड़े प्री-स्प्लिट शेयर स्ट्रक्चर के आधार पर हैं।
करीब 32 हजार करोड़ रुपये की मार्केट वैल्यू
10 सितंबर की सुबह उपलब्ध बाजार डेटा में Tata Investment Corporation का मार्केट कैप करीब 31,915 करोड़ रुपये था। शेयर का बुक वैल्यू प्रति शेयर करीब 579.56 रुपये और फेस वैल्यू 1 रुपये दर्ज की गई।
कंपनी में प्रमोटर समूह की हिस्सेदारी भी काफी मजबूत है। जून 2026 के उपलब्ध शेयरहोल्डिंग डेटा में भारतीय प्रमोटरों की हिस्सेदारी करीब 73.38 प्रतिशत बताई गई है।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
गुरुवार की जोरदार तेजी के बाद Tata Investment Corporation एक बार फिर निवेशकों की नजर में आ गया है। 618 रुपये के पिछले बंद स्तर से 675 रुपये के इंट्राडे हाई तक पहुंचना एक सत्र में बड़ी चाल है।
हालांकि केवल एक दिन की तेजी को देखकर निवेश का फैसला करना जोखिम भरा हो सकता है। शेयर पहले 1,184 रुपये के 52 सप्ताह के उच्च स्तर तक पहुंच चुका है और बाद में 538.70 रुपये तक भी गिरा है। इससे पता चलता है कि इसमें तेज उतार-चढ़ाव संभव है।
स्टॉक स्प्लिट को भी सीधे तौर पर निवेशकों की संपत्ति बढ़ने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। स्प्लिट ने प्रत्येक पुराने शेयर को 10 शेयरों में जरूर बांटा, लेकिन निवेश का कुल मूल्य उस समय आनुपातिक रूप से समायोजित हुआ था।
फिलहाल 10 सितंबर की जोरदार तेजी ने Tata Investment Corporation के शेयर को बाजार के चर्चित टाटा समूह शेयरों में जरूर ला दिया है। अब निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि 675 रुपये के स्तर को छूने के बाद शेयर तेजी कायम रख पाता है या फिर इसमें मुनाफावसूली देखने को मिलती है।
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