नई दिल्ली। पेट्रोल और डीजल की कीमतें एक बार फिर चर्चा में हैं। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। इसका असर भारत समेत दुनिया के कई देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ने की आशंका है। भारत में 10 सितंबर 2026 को पेट्रोल-डीजल के नए रेट जारी किए गए हैं और फिलहाल दिल्ली समेत प्रमुख शहरों में कीमतों में कोई नया बदलाव नहीं हुआ है।
देश की राजधानी नई दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये प्रति लीटर और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर है। वहीं मुंबई, कोलकाता और चेन्नई जैसे महानगरों में पेट्रोल दिल्ली से काफी महंगा है। इसी बीच पड़ोसी देशों और अमेरिका में पेट्रोल की कीमतों की तुलना भी लोगों का ध्यान खींच रही है।
अंतरराष्ट्रीय आंकड़ों से पता चलता है कि पेट्रोल की कीमत केवल कच्चे तेल से तय नहीं होती। किसी देश में टैक्स ज्यादा है तो वहां तेल उत्पादक देश की तुलना में पेट्रोल कई गुना महंगा हो सकता है। वहीं सरकारी सब्सिडी, मुद्रा की कीमत, रिफाइनिंग और परिवहन लागत भी अंतिम खुदरा कीमत को प्रभावित करती है।
दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये लीटर
10 सितंबर को नई दिल्ली में एक लीटर पेट्रोल की कीमत 102.12 रुपये और डीजल की कीमत 95.20 रुपये है। मुंबई में पेट्रोल करीब 111.21 रुपये और डीजल 97.83 रुपये प्रति लीटर है।
कोलकाता में पेट्रोल करीब 113.51 रुपये और डीजल 99.82 रुपये प्रति लीटर है। चेन्नई में पेट्रोल 107.77 रुपये और डीजल 99.55 रुपये प्रति लीटर के आसपास है।
दूसरे शहरों की बात करें तो बेंगलुरु में पेट्रोल करीब 110.93 रुपये, हैदराबाद में 115.69 रुपये, जयपुर में 112.66 रुपये और पटना में करीब 113.35 रुपये प्रति लीटर है।
लखनऊ में पेट्रोल करीब 102.05 रुपये और डीजल 95.55 रुपये प्रति लीटर दर्ज किया गया है। शहरों के बीच कीमतों में अंतर मुख्य रूप से स्थानीय टैक्स और परिवहन लागत जैसे कारणों से होता है।
बांग्लादेश में 145 टका लीटर पेट्रोल
7 सितंबर के अंतरराष्ट्रीय औसत आंकड़ों के अनुसार बांग्लादेश में गैसोलीन की कीमत करीब 145 बांग्लादेशी टका प्रति लीटर है। डीजल करीब 115 टका प्रति लीटर बताया गया है।
भारतीय रुपये में सीधे तुलना करने के लिए उस दिन की विनिमय दर लागू करनी होगी, इसलिए केवल स्थानीय मुद्रा के आंकड़े देखकर यह कहना सही नहीं होगा कि भारतीय उपभोक्ता से वहां के उपभोक्ता कितने रुपये ज्यादा या कम चुका रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय तुलना में डॉलर या यूरो में परिवर्तित कीमतों का इस्तेमाल अधिक उपयुक्त रहता है।
चीन में करीब 8.67 युआन प्रति लीटर
चीन में भी पेट्रोल भारतीय बाजार के मुकाबले बहुत सस्ता नहीं है। उपलब्ध अंतरराष्ट्रीय औसत के अनुसार वहां गैसोलीन करीब 8.67 चीनी युआन प्रति लीटर है।
डीजल की कीमत करीब 7.74 युआन प्रति लीटर बताई गई है। चीन दुनिया के सबसे बड़े तेल उपभोक्ता और आयातक देशों में शामिल है। वहां पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों पर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल के भाव का बड़ा असर पड़ता है।
नेपाल में भी महंगा है पेट्रोल
नेपाल अपनी पेट्रोलियम जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है। भारत नेपाल के लिए ईंधन आपूर्ति का प्रमुख स्रोत है। इसके बावजूद नेपाल में टैक्स और दूसरे शुल्क जुड़ने के बाद पेट्रोल का खुदरा भाव भारतीय सीमा से लगे कई क्षेत्रों की तुलना में ज्यादा हो सकता है।
यही कारण है कि भारत और नेपाल में ईंधन की कीमतों की तुलना समय-समय पर चर्चा में रहती है। नेपाल में भी शहर और समय के अनुसार कीमतों में बदलाव हो सकता है, इसलिए किसी एक भाव को पूरे देश का स्थायी रेट नहीं माना जाना चाहिए।
पाकिस्तान में रुपये में बड़ा आंकड़ा
पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमत स्थानीय मुद्रा में भारतीय रुपये की तुलना में काफी बड़ी संख्या में दिखाई देती है। लेकिन यहां एक बात समझना जरूरी है कि पाकिस्तानी रुपये और भारतीय रुपये की विनिमय दर अलग है।
इसलिए केवल यह कहना कि पाकिस्तान में पेट्रोल इतने 'रुपये' लीटर है और भारत में इतने रुपये, वास्तविक तुलना नहीं देता। दोनों देशों की मुद्राओं को पहले एक समान मुद्रा में बदलना जरूरी है।
पाकिस्तान भी अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए आयातित कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों पर काफी निर्भर है। अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल में तेजी और स्थानीय मुद्रा की कमजोरी वहां ईंधन की लागत पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती है।
अमेरिका में पेट्रोल की तुलना क्यों दिलचस्प?
अमेरिका दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादकों में शामिल है। वहां पेट्रोल की कीमत आम तौर पर प्रति गैलन बताई जाती है, जबकि भारत और अधिकांश एशियाई देशों में कीमत प्रति लीटर होती है।
अंतरराष्ट्रीय साप्ताहिक तुलना में 7 सितंबर को अमेरिका में पेट्रोल की औसत कीमत लगभग 1.17 डॉलर प्रति लीटर के बराबर बताई गई। इसी डेटा में भारत करीब 1.15 डॉलर और बांग्लादेश करीब 1.18 डॉलर प्रति लीटर के आसपास था।
यानी इस विशेष अंतरराष्ट्रीय डेटा सेट में बांग्लादेश का औसत अमेरिका से थोड़ा अधिक था, जबकि भारत थोड़ा कम था। अलग-अलग डेटा स्रोत, पेट्रोल ग्रेड और तारीख के आधार पर यह क्रम बदल सकता है।
कच्चा तेल 100 डॉलर के पार
भारत के लिए इस समय सबसे बड़ी चिंता अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमत है। पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव के कारण Brent क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच चुका है।
भारत दुनिया के सबसे बड़े कच्चा तेल आयातकों में शामिल है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय तेल की कीमत बढ़ने का सीधा असर देश के आयात बिल पर पड़ता है।
महंगा कच्चा तेल डॉलर की मांग बढ़ाता है और रुपये पर भी दबाव डाल सकता है। 10 सितंबर को भारतीय रुपया कमजोर होकर करीब 95.30 रुपये प्रति डॉलर तक पहुंच गया। कमजोर रुपया तेल आयात की लागत को और बढ़ा सकता है।
तेल कंपनियों को हो रहा नुकसान
कच्चे तेल की कीमत बढ़ने के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में तत्काल नया इजाफा नहीं किया गया है।
रेटिंग एजेंसी ICRA के अनुमान के अनुसार मौजूदा ऊंची कच्चे तेल की कीमतों के कारण सरकारी तेल विपणन कंपनियों को पेट्रोल पर करीब 5 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर लगभग 23 रुपये प्रति लीटर का नकारात्मक मार्केटिंग मार्जिन झेलना पड़ रहा है।
भारतीय क्रूड बास्केट 8 सितंबर को करीब 108.91 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था। सितंबर में अब तक इसका औसत करीब 102.11 डॉलर प्रति बैरल रहा है, जो अगस्त के 90.19 डॉलर के औसत से लगभग 13 प्रतिशत ज्यादा है।
क्या भारत में फिर महंगा होगा पेट्रोल-डीजल?
फिलहाल तत्काल नई बढ़ोतरी की संभावना स्पष्ट नहीं है। जानकारों का मानना है कि अगर कच्चा तेल मौजूदा ऊंचे स्तर पर लंबे समय तक बना रहता है या 110 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर टिकता है तो तेल कंपनियों पर दबाव और बढ़ सकता है।
भारत में मई के दौरान पेट्रोल और डीजल के खुदरा भाव में कुल मिलाकर करीब 7.50 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हो चुकी थी। 25 मई के बाद दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर पर बना हुआ है।
इसलिए वाहन चालकों की नजर अब अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल पर है। पश्चिम एशिया का तनाव कम होता है और क्रूड नीचे आता है तो तेल कंपनियों को राहत मिल सकती है। इसके उलट कीमत 100-110 डॉलर से ऊपर बनी रहती है तो खुदरा कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है।
अलग-अलग देशों में इतना अंतर क्यों?
दुनिया में पेट्रोल की कीमतों में भारी अंतर की सबसे बड़ी वजह टैक्स और सरकारी नीतियां हैं। कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमत सभी आयातक देशों के लिए महत्वपूर्ण होती है, लेकिन पेट्रोल पंप पर उपभोक्ता जो कीमत चुकाता है उसमें रिफाइनिंग लागत, परिवहन खर्च, डीलर मार्जिन, टैक्स और दूसरे शुल्क शामिल होते हैं।
तेल उत्पादक देशों में सरकारें कई बार कम टैक्स या सब्सिडी के जरिए ईंधन सस्ता रखती हैं। वहीं कुछ देशों में पेट्रोलियम उत्पादों पर भारी टैक्स लगाया जाता है।
इसीलिए केवल यह देखकर निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि किस देश में स्थानीय मुद्रा में पेट्रोल का आंकड़ा बड़ा है। सही तुलना के लिए एक ही तारीख, समान पेट्रोल ग्रेड और समान मुद्रा में कीमत देखनी चाहिए।
फिलहाल भारत में 10 सितंबर को पेट्रोल-डीजल की कीमत स्थिर है, लेकिन कच्चे तेल का 100 डॉलर प्रति बैरल पार जाना आने वाले दिनों के लिए चिंता बढ़ा रहा है। अगर पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ता है तो भारत समेत नेपाल, बांग्लादेश, पाकिस्तान और चीन जैसे आयात पर निर्भर देशों में ईंधन बाजार पर दबाव बढ़ सकता है।
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