पेटीएम पेमेंट्स बैंक का सफर खत्म होने की ओर, कोर्ट ने दिए बंद करने के आदेश

Update: 2026-07-28 14:24 GMT

मुंबई :  दिल्ली हाईकोर्ट ने पेटीएम पेमेंट्स बैंक लिमिटेड (PPBL) को बंद करने यानी वाइंडिंग-अप का आदेश जारी कर दिया है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने मंगलवार को इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि पेटीएम पेमेंट्स बैंक का लाइसेंस पहले ही लगातार नियामकीय उल्लंघनों के चलते रद्द किया जा चुका था। अब हाईकोर्ट का आदेश बैंक को पूरी तरह बंद करने की प्रक्रिया का अंतिम चरण माना जा रहा है।

आरबीआई की ओर से जारी बयान में कहा गया कि दिल्ली हाईकोर्ट ने 8 जुलाई और 22 जुलाई 2026 को जारी अपने आदेशों के माध्यम से पेटीएम पेमेंट्स बैंक को बंद करने का निर्देश दिया है। यह कार्रवाई बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट, 1949 और कंपनी अधिनियम, 2013 के प्रावधानों के तहत की गई है। अदालत ने इस मामले में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के पूर्व मुख्य महाप्रबंधक गिरिकुमार एम. नायर को पेटीएम पेमेंट्स बैंक का आधिकारिक परिसमापक नियुक्त किया है।

परिसमापक की जिम्मेदारी बैंक की संपत्तियों, देनदारियों और अन्य वित्तीय मामलों का निपटारा करना होगी। इसके तहत बैंक से जुड़े सभी कानूनी और वित्तीय मामलों की समीक्षा की जाएगी तथा नियमानुसार आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। परिसमापक यह सुनिश्चित करेंगे कि बैंक को बंद करने की प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से पूरी हो।

गौरतलब है कि भारतीय रिजर्व बैंक ने इससे पहले पेटीएम पेमेंट्स बैंक के खिलाफ नियामकीय कार्रवाई की थी। आरबीआई ने बैंक पर कई नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए लाइसेंस रद्द करने का फैसला लिया था। केंद्रीय बैंक का कहना था कि बैंकिंग नियमों और नियामकीय मानकों का पालन करना सभी वित्तीय संस्थानों के लिए अनिवार्य है और किसी भी तरह की लापरवाही को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

पेटीएम पेमेंट्स बैंक देश के डिजिटल बैंकिंग क्षेत्र में एक प्रमुख नाम रहा है। कंपनी ने डिजिटल भुगतान और बैंकिंग सेवाओं के क्षेत्र में बड़ी भूमिका निभाई थी। लाखों ग्राहक पेटीएम के माध्यम से डिजिटल लेनदेन करते रहे हैं। हालांकि, आरबीआई की कार्रवाई के बाद बैंक की सेवाओं पर लगातार असर पड़ा और अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद इसके बंद होने की प्रक्रिया आगे बढ़ गई है।

आरबीआई ने अपने बयान में यह भी स्पष्ट किया है कि बैंक को बंद करने की प्रक्रिया कानून के तहत की जा रही है। सभी संबंधित पक्षों के हितों को ध्यान में रखते हुए परिसमापक द्वारा आगे की कार्रवाई की जाएगी। बैंक के ग्राहकों और अन्य हितधारकों से जुड़े मामलों का समाधान भी निर्धारित नियमों के अनुसार किया जाएगा।

वित्तीय क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी बैंक या वित्तीय संस्था के लिए नियामकीय नियमों का पालन बेहद महत्वपूर्ण होता है। आरबीआई समय-समय पर बैंकों की निगरानी करता है ताकि ग्राहकों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। पेटीएम पेमेंट्स बैंक का मामला भी इसी नियामकीय प्रक्रिया का हिस्सा है।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद डिजिटल बैंकिंग और फिनटेक कंपनियों के लिए भी यह एक बड़ा संदेश माना जा रहा है कि उन्हें आरबीआई के सभी दिशा-निर्देशों और वित्तीय नियमों का सख्ती से पालन करना होगा। नियामकीय मानकों की अनदेखी करने पर बड़ी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।

अब परिसमापक की नियुक्ति के बाद पेटीएम पेमेंट्स बैंक के संचालन को पूरी तरह समाप्त करने की प्रक्रिया शुरू होगी। आने वाले समय में बैंक की संपत्तियों और अन्य मामलों के निपटारे से जुड़ी जानकारी सामने आ सकती है। हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद पेटीएम पेमेंट्स बैंक का सफर आधिकारिक रूप से समाप्ति की ओर बढ़ गया है।

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