2026 में टेक कंपनियों से 1.23 लाख से ज्यादा नौकरियां खत्म
टेक सेक्टर पर संकट
नई दिल्ली: दुनियाभर की टेक कंपनियों में कर्मचारियों की छंटनी का दौर 2026 में भी जारी है और इस साल अब तक प्रभावित नौकरियों का आंकड़ा पिछले साल के कुल आंकड़े से आगे निकल गया है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, 2026 में अब तक 1,23,305 टेक नौकरियां खत्म की जा चुकी हैं। यह आंकड़ा टेक सेक्टर में लागत घटाने, कारोबार को नए सिरे से व्यवस्थित करने और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI पर बढ़ते निवेश के बीच सामने आया है।
पिछले साल से ज्यादा हुई छंटनी
टेक सेक्टर में 2025 के दौरान भी बड़ी संख्या में कर्मचारियों की नौकरियां गई थीं। लेकिन 2026 में अभी साल पूरा होने से पहले ही छंटनी का आंकड़ा पिछले वर्ष के स्तर को पार कर गया है। इससे संकेत मिलता है कि कंपनियां अपने खर्च और कर्मचारियों की संख्या को लेकर पहले की तुलना में ज्यादा आक्रामक रणनीति अपना रही हैं।
छंटनी का असर केवल छोटी टेक कंपनियों तक सीमित नहीं है। बड़ी और स्थापित कंपनियां भी अलग-अलग विभागों में कर्मचारियों की संख्या घटा रही हैं। कई कंपनियों ने इसके पीछे कारोबार में बदलाव, संगठनात्मक पुनर्गठन और तकनीकी निवेश को कारण बताया है।
AI बना बड़ा बदलाव का कारण
टेक सेक्टर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते इस्तेमाल को भी नौकरियों में बदलाव की प्रमुख वजहों में शामिल किया जा रहा है। कंपनियां AI आधारित टूल और ऑटोमेशन में भारी निवेश कर रही हैं। इससे कुछ पारंपरिक भूमिकाओं की जरूरत कम हो रही है, जबकि AI, डेटा साइंस, साइबर सुरक्षा और क्लाउड कंप्यूटिंग जैसे क्षेत्रों में नई नौकरियों की मांग बढ़ रही है।
कंपनियां कम कर्मचारियों के साथ अधिक काम करने और उत्पादकता बढ़ाने के लिए AI का इस्तेमाल कर रही हैं। इसका सीधा असर उन भूमिकाओं पर पड़ सकता है जिनमें दोहराए जाने वाले या आसानी से ऑटोमेट किए जा सकने वाले काम अधिक होते हैं।
लागत घटाने पर कंपनियों का जोर
टेक कंपनियों के लिए कर्मचारियों पर होने वाला खर्च सबसे बड़े परिचालन खर्चों में शामिल होता है। ऐसे में आर्थिक अनिश्चितता और कारोबार की बदलती परिस्थितियों के बीच कंपनियां लागत कम करने की कोशिश कर रही हैं।
कई कंपनियां नई भर्तियों पर रोक लगाने, गैर-जरूरी परियोजनाओं को बंद करने और अलग-अलग टीमों के विलय जैसे कदम भी उठा रही हैं। कुछ मामलों में छंटनी के साथ कर्मचारियों को दूसरी भूमिकाओं में स्थानांतरित करने की कोशिश की जाती है, जबकि कुछ पद पूरी तरह खत्म कर दिए जाते हैं।
भारतीय टेक कर्मचारियों पर भी असर
वैश्विक टेक कंपनियों के फैसलों का अप्रत्यक्ष असर भारत के टेक सेक्टर पर भी पड़ सकता है। भारत बड़ी संख्या में IT सेवाएं और सॉफ्टवेयर सपोर्ट उपलब्ध कराने वाला प्रमुख केंद्र है। अमेरिकी और यूरोपीय बाजारों में टेक कंपनियों के खर्च में बदलाव होने पर भारतीय IT कंपनियों के प्रोजेक्ट और नियुक्तियां भी प्रभावित हो सकती हैं।
हालांकि दूसरी ओर AI, क्लाउड, साइबर सुरक्षा और डेटा इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञ कर्मचारियों की मांग बनी हुई है। इसका मतलब है कि टेक सेक्टर में नौकरियों का स्वरूप बदल रहा है, न कि केवल नौकरियों की संख्या में कमी आ रही है।
कर्मचारियों के लिए बदल रहा है जॉब मार्केट
2026 के छंटनी आंकड़े टेक कर्मचारियों के लिए बदलते रोजगार बाजार का संकेत देते हैं। कंपनियां अब केवल तकनीकी डिग्री के बजाय AI टूल्स, ऑटोमेशन और नई तकनीकों के साथ काम करने की क्षमता को भी महत्व दे रही हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक टेक कर्मचारियों के लिए लगातार नई तकनीक सीखना और अपने कौशल को अपडेट करना पहले से ज्यादा जरूरी हो गया है। आने वाले समय में AI के साथ काम करने वाले कर्मचारियों की मांग बढ़ सकती है, जबकि पुराने और दोहराव वाले कामों से जुड़ी भूमिकाओं पर दबाव बना रह सकता है।
इस तरह 1,23,305 टेक नौकरियों का खत्म होना केवल छंटनी का आंकड़ा नहीं बल्कि टेक इंडस्ट्री में चल रहे बड़े बदलाव का संकेत भी है। कंपनियां लागत, AI और उत्पादकता के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही हैं, जिसका असर आने वाले महीनों में वैश्विक रोजगार बाजार पर और स्पष्ट दिखाई दे सकता है।