नई दिल्ली। आज के समय में क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल काफी बढ़ गया है। ऑनलाइन शॉपिंग से लेकर बिल भुगतान और रोजमर्रा के खर्चों तक लोग क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन कई बार ऐसा भी होता है कि कार्डधारक अपना क्रेडिट कार्ड बंद कराना चाहता है और बैंक या कार्ड जारी करने वाली कंपनी प्रक्रिया पूरी करने में अनावश्यक देरी करती रहती है। ऐसे मामलों में भारतीय रिजर्व बैंक यानी **RBI** ने ग्राहकों के हित में स्पष्ट नियम बनाए हैं।
अगर आपने अपने क्रेडिट कार्ड का पूरा बकाया चुका दिया है और कार्ड बंद करने का अनुरोध किया है, तो कार्ड जारी करने वाले बैंक या संस्था को निर्धारित समयसीमा के भीतर आपका कार्ड अकाउंट बंद करना होगा। अगर बैंक तय समय में ऐसा नहीं करता है तो ग्राहक को **हर कैलेंडर दिन की देरी के लिए 500 रुपये का मुआवजा** देना पड़ सकता है। RBI के नियमों के मुताबिक यह प्रावधान तब लागू होता है जब कार्ड खाते में कोई बकाया राशि न हो।
सात कार्यदिवस में बंद करना होगा कार्ड
RBI के क्रेडिट कार्ड संबंधी मास्टर डायरेक्शन के अनुसार, कार्डधारक की ओर से क्रेडिट कार्ड बंद करने का अनुरोध मिलने के बाद कार्ड जारीकर्ता को **सात कार्यदिवस के भीतर** प्रक्रिया पूरी करनी होती है। इसके लिए ग्राहक के सभी बकाये का भुगतान होना जरूरी है। कार्ड बंद होने के बाद बैंक को ग्राहक को ईमेल, SMS या किसी अन्य माध्यम से इसकी जानकारी भी देनी होती है।
इसका मतलब यह है कि अगर आपने बैंक से कार्ड बंद करने के लिए कहा है और आपके ऊपर कोई बकाया नहीं है, तो बैंक अनिश्चित समय तक आपकी रिक्वेस्ट लंबित नहीं रख सकता।
उदाहरण के तौर पर अगर आपने सोमवार को कार्ड बंद करने का अनुरोध किया और सभी बकाये पहले ही चुका दिए हैं, तो बैंक को निर्धारित सात कार्यदिवस की समयसीमा में अकाउंट बंद करना होगा। यदि बैंक इस अवधि के बाद भी कार्ड बंद नहीं करता है, तो देरी के प्रत्येक कैलेंडर दिन के लिए 500 रुपये का मुआवजा लागू हो सकता है।
500 रुपये रोज का नियम कब लागू होगा?
यहां सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि **500 रुपये प्रतिदिन का मुआवजा हर मामले में अपने आप लागू नहीं होता।** RBI का नियम कार्ड बंद करने में देरी से जुड़ा है और इसमें यह शर्त महत्वपूर्ण है कि कार्ड अकाउंट में कोई बकाया नहीं होना चाहिए।
अगर आपके क्रेडिट कार्ड पर कोई बकाया राशि है तो बैंक पहले आपको उस बकाये की जानकारी देगा। आपको राशि का भुगतान करना होगा। ऐसे मामले में सात कार्यदिवस की समयसीमा की गणना उस अवधि को छोड़कर की जाती है, जितने दिन ग्राहक ने बकाया चुकाने में लगाए।
इसलिए कार्ड बंद कराने से पहले अपने खाते का पूरा बकाया चेक करना बेहद जरूरी है।
कार्ड ब्लॉक करना और कार्ड बंद करना अलग
कई ग्राहक क्रेडिट कार्ड को ब्लॉक कराने को ही कार्ड बंद होना समझ लेते हैं, जबकि दोनों अलग-अलग चीजें हैं। RBI के मुताबिक कार्ड को ब्लॉक या डीएक्टिवेट करने से केवल कार्ड के जरिए लेनदेन करने की सुविधा अस्थायी रूप से रुकती है। इससे बैंक और ग्राहक के बीच क्रेडिट कार्ड अकाउंट का संबंध खत्म नहीं होता।
दूसरी तरफ **क्रेडिट कार्ड क्लोजर** का मतलब खाते को पूरी तरह बंद करना है। इसलिए अगर आप कार्ड का इस्तेमाल भविष्य में बिल्कुल नहीं करना चाहते तो केवल कार्ड ब्लॉक कराने के बजाय बैंक से अकाउंट क्लोजर की प्रक्रिया पूरी कराना जरूरी है।
बैंक पोस्ट भेजने की जिद नहीं कर सकता
RBI ने ग्राहकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए कार्ड बंद करने के लिए कई माध्यम उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। कार्डधारक हेल्पलाइन, ईमेल, IVR, बैंक की वेबसाइट, इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल ऐप या अन्य उपलब्ध माध्यम से क्लोजर रिक्वेस्ट कर सकता है।
बैंक ग्राहक से केवल पोस्ट के जरिए आवेदन भेजने की मांग नहीं कर सकता, क्योंकि इससे प्रक्रिया में अनावश्यक देरी हो सकती है।
इसलिए अगर कोई बैंक केवल लिखित आवेदन या डाक के जरिए कार्ड बंद कराने पर जोर देता है, जबकि उसके पास अन्य डिजिटल माध्यम उपलब्ध हैं, तो ग्राहक को अपने अधिकारों के बारे में जानकारी रखनी चाहिए।
क्लोजर रिक्वेस्ट का रिकॉर्ड जरूर रखें
क्रेडिट कार्ड बंद कराने के लिए आवेदन करने के बाद ग्राहक को अपनी रिक्वेस्ट का रिकॉर्ड संभालकर रखना चाहिए। अगर आपने मोबाइल ऐप या इंटरनेट बैंकिंग से अनुरोध किया है तो उसका स्क्रीनशॉट या रिक्वेस्ट नंबर सुरक्षित रखें। ईमेल के जरिए आवेदन किया है तो भेजे गए ईमेल की कॉपी भी रख लें।
अगर आपने फोन पर कस्टमर केयर के जरिए क्लोजर रिक्वेस्ट की है तो शिकायत या सर्विस रिक्वेस्ट नंबर नोट कर लें। आगे चलकर बैंक द्वारा देरी किए जाने की स्थिति में यही रिकॉर्ड आपके लिए महत्वपूर्ण सबूत बन सकता है।
बैंक को बकाया राशि की जानकारी देनी होगी
अगर ग्राहक कार्ड बंद करने के लिए अनुरोध करता है लेकिन खाते में बकाया है, तो बैंक को बिलिंग साइकिल खत्म होने का इंतजार किए बिना ग्राहक को बकाया राशि की जानकारी देनी चाहिए। इसके बाद ग्राहक बकाया चुकाकर क्लोजर प्रक्रिया पूरी कर सकता है।
यानी बैंक केवल यह कहकर क्लोजर रिक्वेस्ट को अनिश्चित समय तक रोक नहीं सकता कि अगला बिल आने के बाद ही पूरी राशि का पता चलेगा।
क्रेडिट कार्ड बंद होने के बाद भी एक काम जरूरी
कार्ड बंद होने के बाद ग्राहक को बैंक से प्राप्त SMS या ईमेल को संभालकर रखना चाहिए। इसके अलावा अपने क्रेडिट रिपोर्ट में भी कुछ समय बाद जांच कर लेना बेहतर है कि संबंधित क्रेडिट कार्ड अकाउंट का स्टेटस बंद हुआ है या नहीं।
RBI के निर्देशों के अनुसार कार्ड अकाउंट बंद होने की जानकारी क्रेडिट इन्फॉर्मेशन कंपनियों को भी अपडेट की जानी होती है।
अगर कार्ड बंद होने के बावजूद क्रेडिट रिपोर्ट में अकाउंट सक्रिय दिखाई देता है तो ग्राहक बैंक से सुधार की मांग कर सकता है।
बैंक शिकायत न सुने तो क्या करें?
सबसे पहले ग्राहक को संबंधित बैंक या कार्ड जारीकर्ता के पास शिकायत दर्ज करनी चाहिए। अगर बैंक शिकायत का समाधान नहीं करता, शिकायत को पूरी तरह या आंशिक रूप से खारिज कर देता है या ग्राहक जवाब से संतुष्ट नहीं है, तो RBI के शिकायत निवारण तंत्र के तहत आगे शिकायत की जा सकती है। RBI के FAQ के अनुसार, यदि कार्ड जारीकर्ता शिकायत मिलने के **30 दिनों के भीतर जवाब नहीं देता** या समाधान से ग्राहक संतुष्ट नहीं है, तो ग्राहक RBI Ombudsman के पास शिकायत कर सकता है।
इसलिए केवल बैंक के कस्टमर केयर से बात करके मामला छोड़ने के बजाय शिकायत का लिखित रिकॉर्ड रखना ज्यादा फायदेमंद है।
समझें पूरे नियम को एक आसान उदाहरण से
मान लीजिए किसी व्यक्ति के पास क्रेडिट कार्ड है और उसने उसका पूरा बकाया चुका दिया। इसके बाद उसने बैंक से कार्ड बंद करने का अनुरोध किया। अब बैंक को निर्धारित सात कार्यदिवस के भीतर अकाउंट बंद करना होगा।
अगर बैंक सात कार्यदिवस के बाद भी कार्ड बंद नहीं करता है, तो नियम के मुताबिक देरी के प्रत्येक कैलेंडर दिन के लिए **500 रुपये का मुआवजा** देय हो सकता है, जब तक कार्ड अकाउंट बंद नहीं हो जाता।
उदाहरण के लिए अगर पात्र स्थिति में बैंक ने 10 कैलेंडर दिन की देरी की, तो मुआवजे की राशि 5,000 रुपये तक हो सकती है। हालांकि वास्तविक दावा करते समय यह देखना जरूरी है कि कार्ड पर कोई बकाया था या नहीं और देरी की गणना में कौन-सी अवधि शामिल होगी।

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