LTCG खत्म करने का प्लान नहीं, सरकार ने किया साफ

Update: 2026-07-20 10:19 GMT

नई दिल्ली। शेयर बाजार में निवेश करने वाले खुदरा और घरेलू निवेशकों के लिए सरकार ने बड़ा अपडेट दिया है। केंद्र सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि इक्विटी लेनदेन पर लगने वाले लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स (LTCG) को खत्म करने का फिलहाल कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने 20 जुलाई को लोकसभा में एक लिखित जवाब के माध्यम से यह जानकारी दी।

संसद में सरकार से सवाल पूछा गया था कि क्या घरेलू और रिटेल निवेशकों के लिए इक्विटी निवेश पर LTCG टैक्स को हटाने की कोई योजना है। सवाल में यह भी पूछा गया था कि क्या टैक्स में राहत देने से शेयर बाजार में निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और भारतीय व विदेशी निवेशकों के बीच समान माहौल तैयार होगा। इसके जवाब में वित्त राज्य मंत्री ने साफ कहा कि ऐसा कोई प्रस्ताव फिलहाल सरकार के पास विचाराधीन नहीं है।

शेयर बाजार से जुड़े कई विशेषज्ञ और निवेशक लंबे समय से LTCG टैक्स में राहत की मांग कर रहे हैं। उनका तर्क है कि टैक्स का बोझ कम होने से घरेलू निवेश को बढ़ावा मिल सकता है और छोटे निवेशकों की भागीदारी और मजबूत हो सकती है। हालांकि, सरकार ने फिलहाल इस टैक्स व्यवस्था में किसी बदलाव से इनकार कर दिया है।

वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने कहा कि सरकार समय-समय पर टैक्स नीतियों की समीक्षा करती रहती है। इसमें कैपिटल गेन्स टैक्स की दरें भी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि टैक्स व्यवस्था में बदलाव बजट प्रक्रिया, आर्थिक परिस्थितियों और जरूरतों को ध्यान में रखते हुए किए जाते हैं। हालांकि वर्तमान समय में LTCG को समाप्त करने की कोई योजना नहीं है।

इक्विटी निवेश पर LTCG टैक्स से सरकार को बड़ी आमदनी भी हो रही है। आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2023-24 से जुड़े आकलन वर्ष 2024-25 में इक्विटी लेनदेन से LTCG के रूप में सरकार को 72,249 करोड़ रुपये की आय हुई थी। वहीं वित्त वर्ष 2024-25 से जुड़े आकलन वर्ष 2025-26 में यह आंकड़ा बढ़कर 1,29,158 करोड़ रुपये हो गया। यानी केवल दो वर्षों में सरकार को LTCG टैक्स से करीब 2.01 लाख करोड़ रुपये का राजस्व मिला है।

मौजूदा नियमों के अनुसार सूचीबद्ध इक्विटी शेयर और इक्विटी म्यूचुअल फंड पर लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स की दर 12.5 प्रतिशत है। यह टैक्स एक वित्त वर्ष में 1.25 लाख रुपये से अधिक के मुनाफे पर लगाया जाता है। अगर किसी निवेशक ने किसी शेयर या इक्विटी आधारित म्यूचुअल फंड को 12 महीने से ज्यादा समय तक रखा है, तो उसे लॉन्ग-टर्म कैपिटल एसेट माना जाता है और उस पर LTCG टैक्स लागू होता है।

संसद में यह सवाल भी उठाया गया कि क्या विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) को LTCG टैक्स में कोई विशेष छूट दी गई है। इसके जवाब में सरकार ने बताया कि इक्विटी निवेश पर LTCG टैक्स की दर सभी निवेशकों के लिए समान है। यानी विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक, घरेलू निवेशक और रिटेल निवेशक सभी पर 12.5 प्रतिशत की दर लागू होती है।

इससे पहले केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी कहा था कि सरकार शेयर बाजार निवेशकों की चिंताओं को सुनने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा था कि टैक्स सिस्टम से जुड़े मुद्दों, जिसमें LTCG और शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स (STCG) भी शामिल हैं, पर सरकार सुझावों पर विचार कर सकती है।

हालांकि, फिलहाल सरकार की ओर से LTCG खत्म करने को लेकर कोई कदम नहीं उठाया गया है। ऐसे में शेयर बाजार में निवेश करने वाले निवेशकों को मौजूदा टैक्स नियमों के अनुसार ही अपने निवेश की योजना बनानी होगी। विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशकों को टैक्स नियमों को समझकर लंबी अवधि की रणनीति के साथ निवेश करना चाहिए।

(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। यह खबर केवल जानकारी के उद्देश्य से है, निवेश की सलाह नहीं। निवेश करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।)

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