नई दिल्ली। शेयर बाजार में लिस्टेड कंपनियों के कॉरपोरेट एक्शन पर निवेशकों की नजर बनी रहती है। खासतौर पर बोनस शेयर की घोषणा निवेशकों का ध्यान तेजी से खींचती है। इसी बीच हाल ही में शेयर बाजार में कदम रखने वाली एक कंपनी ने अपने शेयरधारकों को 1:1 के अनुपात में बोनस शेयर देने की घोषणा की है। यानी रिकॉर्ड डेट पर पात्र निवेशकों को प्रत्येक एक शेयर के बदले एक अतिरिक्त शेयर मिलेगा। कंपनी ने इस कॉरपोरेट एक्शन के लिए रिकॉर्ड डेट भी तय कर दी है।इस घोषणा की खास बात यह है कि कंपनी का IPO इसी साल जुलाई में आया था। शेयर बाजार में लिस्टिंग के कुछ समय बाद ही बोनस शेयर की घोषणा के कारण कंपनी एक बार फिर निवेशकों के बीच चर्चा में आ गई है। हालांकि बोनस शेयर पाने के लिए निवेशकों को रिकॉर्ड डेट और एक्स-बोनस डेट से जुड़े नियमों को समझना जरूरी है।
1 शेयर पर मिलेगा 1 बोनस शेयर
कंपनी ने 1:1 के अनुपात में बोनस शेयर जारी करने का फैसला किया है। इसका सीधा अर्थ है कि पात्र निवेशक के पास रिकॉर्ड डेट के अनुसार जितने शेयर होंगे, उसे उतने ही नए शेयर बोनस के रूप में मिलेंगे।उदाहरण के तौर पर अगर किसी निवेशक के पास कंपनी के 100 शेयर हैं और वह रिकॉर्ड डेट के आधार पर बोनस शेयर के लिए पात्र है तो उसे 100 अतिरिक्त शेयर मिलेंगे। इस तरह उसके पास कुल शेयरों की संख्या बढ़कर 200 हो जाएगी। इसी प्रकार 500 शेयर रखने वाले पात्र निवेशक को 500 बोनस शेयर मिल सकते हैं।बोनस शेयर के लिए निवेशक से अलग से कीमत नहीं ली जाती। कंपनी अपने उपलब्ध रिजर्व को कैपिटल में बदलकर शेयरधारकों को अतिरिक्त शेयर जारी करती है।
रिकॉर्ड डेट क्यों है महत्वपूर्ण?
बोनस शेयर के मामले में रिकॉर्ड डेट बेहद महत्वपूर्ण होती है। कंपनी रिकॉर्ड डेट के आधार पर यह तय करती है कि कौन से शेयरधारक बोनस शेयर पाने के पात्र हैं। शेयर बाजार में सेटलमेंट व्यवस्था को देखते हुए निवेशकों को एक्स-बोनस डेट की भी जानकारी रखनी चाहिए।सिर्फ रिकॉर्ड डेट के दिन शेयर खरीद लेने से बोनस शेयर मिलने की गारंटी नहीं होती। पात्रता उस समय लागू बाजार सेटलमेंट नियमों और एक्स-डेट के अनुसार तय होती है। इसलिए बोनस शेयर के उद्देश्य से निवेश करने वाले लोगों को स्टॉक एक्सचेंज और कंपनी की आधिकारिक सूचना में दी गई तारीखों की जांच करनी चाहिए।
जुलाई में आया था IPO
कंपनी ने इसी साल जुलाई में अपना IPO लॉन्च किया था। IPO के जरिए कंपनी ने पहली बार आम निवेशकों के लिए अपने शेयर पेश किए और इसके बाद शेयर बाजार में लिस्टिंग हुई। अब लिस्टिंग के कुछ समय बाद ही बोनस शेयर की घोषणा से यह स्टॉक फिर चर्चा में है।IPO में निवेश करने वाले शेयरधारकों के लिए भी बोनस शेयर का फैसला महत्वपूर्ण हो सकता है। अगर ऐसे निवेशकों के पास रिकॉर्ड डेट तक पात्र शेयर मौजूद रहते हैं तो उन्हें भी कंपनी द्वारा तय अनुपात के अनुसार बोनस शेयर मिल सकते हैं।हालांकि IPO में निवेश करने और उसके बाद बोनस शेयर मिलने से अपने आप मुनाफे की गारंटी नहीं होती। बाजार में शेयर की कीमत कंपनी के वित्तीय प्रदर्शन, कारोबार की संभावनाओं और बाजार की परिस्थितियों के आधार पर लगातार बदलती रहती है।
बोनस शेयर से क्या होता है फायदा?
बोनस शेयर मिलने पर निवेशक के पास मौजूद शेयरों की संख्या बढ़ जाती है। मान लीजिए किसी निवेशक के पास 200 शेयर हैं। 1:1 बोनस के बाद उसके पास 400 शेयर हो जाएंगे। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि बोनस मिलने के तुरंत बाद उसके निवेश का बाजार मूल्य भी दोगुना हो जाएगा।बोनस शेयर जारी होने के बाद स्टॉक की बाजार कीमत आमतौर पर बोनस अनुपात के हिसाब से एडजस्ट होती है। वास्तविक कीमत मांग और आपूर्ति के आधार पर बदल सकती है। इसलिए बोनस शेयर को मुफ्त अतिरिक्त संपत्ति के रूप में देखकर तत्काल दोगुने रिटर्न की उम्मीद करना सही नहीं है।
क्यों बोनस शेयर जारी करती हैं कंपनियां?
कंपनियां कई कारणों से बोनस शेयर जारी करती हैं। कई बार शेयरों की बाजार कीमत काफी बढ़ जाने के बाद कंपनी बाजार में लिक्विडिटी बढ़ाने के उद्देश्य से बोनस इश्यू करती है। शेयरों की संख्या बढ़ने और प्रति शेयर कीमत एडजस्ट होने से स्टॉक छोटे निवेशकों के लिए अपेक्षाकृत सुलभ दिखाई दे सकता है।इसके अलावा बोनस इश्यू को कंपनी द्वारा संचित रिजर्व के पूंजीकरण के तरीके के रूप में भी देखा जाता है। हालांकि बोनस जारी होने से कंपनी के कारोबार की वास्तविक कमाई अपने आप नहीं बढ़ती।
बोनस और स्टॉक स्प्लिट में अंतर
निवेशकों को बोनस शेयर और स्टॉक स्प्लिट के बीच अंतर भी समझना चाहिए। बोनस शेयर में कंपनी मौजूदा निवेशकों को अतिरिक्त शेयर जारी करती है। दूसरी ओर स्टॉक स्प्लिट में पहले से मौजूद एक शेयर को कई छोटे फेस वैल्यू वाले शेयरों में विभाजित किया जाता है।दोनों कॉरपोरेट एक्शन के बाद शेयरों की संख्या बढ़ सकती है, लेकिन उनकी प्रक्रिया अलग होती है। बोनस शेयर जारी होने पर कंपनी की इक्विटी कैपिटल में बदलाव होता है, जबकि स्टॉक स्प्लिट में मुख्य रूप से शेयर की फेस वैल्यू और संख्या एडजस्ट होती है।
सिर्फ बोनस देखकर न करें निवेश
शेयर बाजार के जानकार अक्सर निवेशकों को केवल बोनस शेयर, स्टॉक स्प्लिट या किसी दूसरे कॉरपोरेट एक्शन को देखकर निवेश का फैसला नहीं करने की सलाह देते हैं। निवेश से पहले कंपनी के कारोबार, राजस्व, मुनाफे, कर्ज, कैश फ्लो और वैल्यूएशन जैसे पहलुओं को समझना जरूरी है।किसी नई लिस्टेड कंपनी के मामले में यह और महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि बाजार में उसके शेयरों का ट्रेडिंग इतिहास अपेक्षाकृत कम होता है। IPO के कुछ समय बाद शेयर में ज्यादा उतार-चढ़ाव भी देखने को मिल सकता है।कंपनी की 1:1 बोनस शेयर घोषणा ने निवेशकों का ध्यान जरूर खींचा है। अब पात्र शेयरधारकों के लिए रिकॉर्ड डेट महत्वपूर्ण रहेगी। निवेशकों को बोनस शेयर से जुड़ी अंतिम पात्रता, रिकॉर्ड डेट और अन्य विवरण कंपनी की एक्सचेंज फाइलिंग से सत्यापित करने चाहिए।