नई दिल्ली। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी ईपीएफओ के सदस्यों के लिए पीएफ निकासी पर टीडीएस से राहत की घोषणा करने वाला फॉर्म बदल गया है। कर वर्ष 2026-27 से पात्र सदस्यों को पुराने फॉर्म 15G या 15H की जगह फॉर्म 121 इस्तेमाल करना होगा। यह बदलाव नए आयकर अधिनियम, 2025 और आयकर नियम, 2026 के अंतर्गत किया गया है। हालांकि, नया फॉर्म प्रत्येक पीएफ निकासी के लिए अनिवार्य नहीं है। इसका इस्तेमाल उन मामलों में होता है, जहां टीडीएस लागू हो सकता है और सदस्य बिना कटौती भुगतान पाने की पात्रता पूरी करता है।
पहले पात्र व्यक्तियों को उम्र के अनुसार अलग-अलग घोषणा पत्र देना होता था। सामान्य तौर पर 60 वर्ष से कम उम्र के व्यक्तियों के लिए फॉर्म 15G और वरिष्ठ नागरिकों के लिए फॉर्म 15H इस्तेमाल होता था। अब दोनों को एकीकृत करके फॉर्म 121 बनाया गया है। इससे घोषणा के लिए अलग फॉर्म चुनने की जरूरत समाप्त हुई है। लेकिन उम्र के आधार पर पात्रता की शर्तों में जो अंतर है, वह पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। नया फॉर्म समान होने के बावजूद आवेदक को अपनी श्रेणी की शर्तें देखनी होंगी।
फॉर्म 121 एक स्वघोषणा पत्र है। इसमें व्यक्ति बताता है कि संबंधित कर वर्ष की अनुमानित कुल आय पर उसकी कर देनदारी शून्य होगी। इस घोषणा के आधार पर भुगतान करने वाली संस्था निर्धारित आय पर टीडीएस नहीं काट सकती है। इसका मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति की आय भी शून्य होनी चाहिए। आय होने के बावजूद लागू नियमों के अनुसार कर देनदारी शून्य हो सकती है। फॉर्म का उद्देश्य पात्र व्यक्तियों की रकम पर अनावश्यक अग्रिम कटौती रोकना है, ताकि बाद में रिफंड लेने की जरूरत कम हो।
पीएफ के संदर्भ में यह घोषणा मुख्य रूप से पांच वर्ष की सेवा पूरी होने से पहले निकासी करने वालों के लिए महत्वपूर्ण है। सामान्य परिस्थितियों में पांच वर्ष से कम सेवा और निर्धारित सीमा से अधिक निकासी पर टीडीएस लग सकता है। ईपीएफओ की जानकारी के अनुसार, 50,000 रुपये से अधिक की संबंधित निकासी पर पैन उपलब्ध होने की स्थिति में सामान्य टीडीएस दर 10 प्रतिशत है। लेकिन केवल निकासी की रकम देखकर फैसला नहीं किया जा सकता। सेवा अवधि, भुगतान की करयोग्यता और उपलब्ध छूट भी देखनी होती है। 
हर सदस्य केवल फॉर्म भरकर कटौती से राहत नहीं ले सकता। आयकर विभाग के मार्गदर्शन के अनुसार, 60 वर्ष से कम उम्र के पात्र व्यक्ति की अनुमानित कुल आय पर कर शून्य होना चाहिए। साथ ही, जिन निर्धारित आय या रकम के लिए घोषणा दी जा रही है, उनका कुल योग अधिकतम करमुक्त सीमा से अधिक नहीं होना चाहिए। इसलिए सिर्फ यह मान लेना पर्याप्त नहीं है कि साल के अंत में कोई कर नहीं बनेगा। संबंधित आय की सीमा वाली अतिरिक्त शर्त भी इस आयु वर्ग पर लागू होती है। 
वरिष्ठ नागरिकों के लिए पात्रता की व्यवस्था कुछ अलग है। कर वर्ष के दौरान किसी भी समय 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र वाले पात्र निवासी व्यक्ति के लिए अनुमानित कुल आय पर कर देनदारी शून्य होना प्रमुख शर्त है। उनके मामले में निर्धारित आय के कुल योग को अधिकतम करमुक्त सीमा के भीतर रखने वाली अतिरिक्त शर्त लागू नहीं होती। यही वजह है कि नया एकीकृत फॉर्म आने के बाद भी उम्र की जानकारी महत्वपूर्ण बनी हुई है। पात्रता की जांच करते समय पूरे कर वर्ष की आय का अनुमान शामिल करना जरूरी है। 
फॉर्म भरते समय केवल पीएफ से मिलने वाली रकम को आय मानकर घोषणा नहीं करनी चाहिए। संबंधित वर्ष की अन्य आय और लागू कटौतियों को भी अनुमानित कुल आय की गणना में शामिल करना होता है। आधिकारिक फॉर्म में नाम, पैन, पता, संबंधित कर वर्ष और उस आय का विवरण मांगा गया है, जिसके लिए टीडीएस नहीं काटने की घोषणा की जा रही है। उसी वर्ष पहले दिए गए ऐसे घोषणा पत्रों की जानकारी भी मांगी जाती है। विवरण सही और पूरा देना आवेदक की जिम्मेदारी है।
फॉर्म 121 के दो प्रमुख हिस्से हैं। भाग ‘ए’ में सदस्य अपनी जानकारी और घोषणा देता है। भाग ‘बी’ भुगतान करने वाली संस्था के सत्यापन और संबंधित रिकॉर्ड के लिए है। आयकर विभाग के अनुसार, घोषणा आदर्श रूप से भुगतान या आय जमा होने से पहले दी जानी चाहिए। इसे भुगतानकर्ता की उपलब्ध व्यवस्था के अनुसार इलेक्ट्रॉनिक या कागजी रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है। देर से घोषणा देने पर पहले टीडीएस कट सकता है और फिर पात्र व्यक्ति को आयकर रिटर्न के माध्यम से रिफंड की प्रक्रिया अपनानी पड़ सकती है।
पांच वर्ष की सेवा पूरी होने के बाद सामान्य पीएफ निकासी में टीडीएस नहीं काटा जाता, इसलिए प्रत्येक सदस्य को फॉर्म 121 देने की जरूरत नहीं होगी। वहीं, टीडीएस न कटना और रकम का अंतिम रूप से करमुक्त होना अलग बातें हैं। घोषणा तभी दी जानी चाहिए, जब उसकी सभी शर्तें पूरी हों। आधिकारिक फॉर्म में गलत घोषणा पर दंड या अभियोजन का प्रावधान भी बताया गया है। पीएफ दावा करने से पहले सदस्य को सेवा अवधि, निकासी की रकम, पैन विवरण और साल की अनुमानित आय जांचनी चाहिए। इसके बाद ही पात्रता के अनुसार नया फॉर्म प्रस्तुत करना उचित होगा।  
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