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Jio ट्रेडमार्क का इस्तेमाल पड़ा भारी 126 वेबसाइट सस्पेंड करने के निर्देश
Ratna Netam
9 Oct 2026 2:50 PM IST

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नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के प्रसिद्ध 'Jio' ट्रेडमार्क के कथित दुरुपयोग से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश जारी किया है। अदालत ने डोमेन नेम रजिस्ट्रार को ऐसी 126 वेबसाइटों को सस्पेंड करने का निर्देश दिया है, जिन पर लॉटरी और गेमिंग से जुड़ी सेवाओं के लिए कंपनी के ट्रेडमार्क का इस्तेमाल करने का आरोप है। इसके साथ ही अदालत ने संबंधित वेबसाइटों के संचालकों को रिलायंस इंडस्ट्रीज के ट्रेडमार्क या उससे धोखे से मिलते-जुलते किसी भी चिह्न का इस्तेमाल करने से रोक दिया है।जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने 7 अक्टूबर को रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड की ओर से दायर ट्रेडमार्क उल्लंघन के मुकदमे पर सुनवाई करते हुए यह अंतरिम आदेश पारित किया। अदालत ने मामले में डिजिटल प्लेटफॉर्म की भूमिका को भी ध्यान में रखते हुए गूगल को संबंधित सामग्री तक पहुंच बंद करने और उसे हटाने के निर्देश दिए हैं। यह निर्देश गूगल के ब्लॉगर प्लेटफॉर्म पर मौजूद कथित उल्लंघनकारी सामग्री से संबंधित है।
126 वेबसाइटों को सस्पेंड करने का आदेश
दिल्ली हाई कोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में डोमेन नेम रजिस्ट्रार को कुल 126 वेबसाइटों के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। इन वेबसाइटों पर आरोप है कि वे लॉटरी और गेमिंग से जुड़ी सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के 'Jio' ट्रेडमार्क का इस्तेमाल कर रही थीं।अदालत का यह आदेश उन वेबसाइटों से संबंधित है, जिनके खिलाफ कंपनी ने ट्रेडमार्क उल्लंघन का दावा किया है। न्यायालय ने मामले की सुनवाई के दौरान संबंधित डोमेन को सस्पेंड करने का निर्देश दिया, ताकि मुकदमे के लंबित रहने के दौरान कथित उल्लंघन को रोका जा सके।डोमेन नेम रजिस्ट्रार इंटरनेट पर वेबसाइटों के डोमेन नामों के पंजीकरण और प्रबंधन से जुड़ी सेवाएं प्रदान करते हैं। अदालत के निर्देश के अनुसार संबंधित डोमेन को सस्पेंड करने की कार्रवाई की जानी है।हालांकि, उपलब्ध जानकारी में सभी 126 वेबसाइटों के नाम और उनके संचालकों का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है।
रिलायंस इंडस्ट्रीज ने दायर किया मुकदमा
यह मामला रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड की ओर से दायर ट्रेडमार्क उल्लंघन के मुकदमे से जुड़ा है। कंपनी ने अदालत के सामने आरोप लगाया कि कुछ वेबसाइटें उसके 'Jio' ट्रेडमार्क का इस्तेमाल लॉटरी और गेमिंग से संबंधित सेवाओं के लिए कर रही हैं।कंपनी की शिकायत का मुख्य आधार उसके ट्रेडमार्क का कथित अनधिकृत इस्तेमाल है। किसी प्रतिष्ठित ब्रांड के नाम या उससे मिलते-जुलते चिह्न का उपयोग उपभोक्ताओं के बीच भ्रम पैदा कर सकता है।ऐसी परिस्थितियों में उपयोगकर्ताओं को यह गलत धारणा हो सकती है कि संबंधित वेबसाइट या सेवा का उस ब्रांड से आधिकारिक संबंध है।हालांकि, इस मामले में किसी विशेष वेबसाइट के माध्यम से उपभोक्ताओं को आर्थिक नुकसान पहुंचने या धोखाधड़ी होने का अलग से विवरण उपलब्ध नहीं है। अदालत का वर्तमान आदेश ट्रेडमार्क उल्लंघन के आरोपों पर आधारित अंतरिम राहत से संबंधित है।
वेबसाइट संचालकों पर भी लगाई रोक
दिल्ली हाई कोर्ट ने केवल वेबसाइटों को सस्पेंड करने का ही निर्देश नहीं दिया, बल्कि संबंधित संचालकों को भी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के ट्रेडमार्क का इस्तेमाल करने से रोक दिया है।अदालत ने स्पष्ट किया कि वेबसाइट संचालक कंपनी के ट्रेडमार्क या उससे धोखे से मिलते-जुलते किसी भी चिह्न का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे।ट्रेडमार्क कानून में ऐसे चिह्नों का विशेष महत्व होता है, जो किसी कंपनी के नाम, उत्पाद या सेवा की पहचान स्थापित करते हैं।यदि कोई दूसरी संस्था बिना अनुमति ऐसे चिह्न का इस्तेमाल करती है, जिससे उपभोक्ताओं के भ्रमित होने की आशंका पैदा होती है, तो संबंधित ट्रेडमार्क धारक कानूनी संरक्षण की मांग कर सकता है।दिल्ली हाई कोर्ट का अंतरिम आदेश इसी प्रकार के कथित उल्लंघन को रोकने के उद्देश्य से दिया गया है।
गूगल को भी दिए गए निर्देश
इस मामले में अदालत ने गूगल को भी निर्देश जारी किए हैं। गूगल अपने ब्लॉगर प्लेटफॉर्म के माध्यम से उपयोगकर्ताओं को ब्लॉग और वेबसाइट सामग्री प्रकाशित करने की सुविधा प्रदान करता है।अदालत ने गूगल को कथित उल्लंघनकारी सामग्री तक पहुंच बंद करने और उसे हटाने का निर्देश दिया है।यह निर्देश विशेष रूप से उन ऑनलाइन संसाधनों से संबंधित है, जिनका उल्लेख ट्रेडमार्क उल्लंघन के मामले में किया गया है।डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रकाशित सामग्री के संबंध में अदालतों के आदेश महत्वपूर्ण होते हैं, क्योंकि किसी ट्रेडमार्क के कथित अनधिकृत इस्तेमाल को रोकने के लिए संबंधित सामग्री तक पहुंच सीमित करना आवश्यक हो सकता है।हालांकि, उपलब्ध जानकारी में यह स्पष्ट नहीं है कि गूगल ने अदालत के निर्देश के बाद कितनी वेबसाइटों या ब्लॉग पेजों के खिलाफ कार्रवाई पूरी कर ली है।
क्या होता है ट्रेडमार्क उल्लंघन?
ट्रेडमार्क किसी कंपनी, उत्पाद या सेवा की विशिष्ट पहचान होता है। इसमें नाम, शब्द, लोगो, प्रतीक या अन्य पहचान चिह्न शामिल हो सकते हैं।भारत में ट्रेडमार्क से जुड़े अधिकारों का संरक्षण ट्रेड मार्क्स अधिनियम, 1999 के तहत किया जाता है।यदि किसी पंजीकृत ट्रेडमार्क का बिना अनुमति व्यावसायिक इस्तेमाल किया जाता है और वह कानून के तहत उल्लंघन की श्रेणी में आता है, तो ट्रेडमार्क धारक अदालत से राहत मांग सकता है।इसमें कथित उल्लंघन रोकने के लिए निषेधाज्ञा, संबंधित सामग्री हटाने और अन्य कानूनी उपाय शामिल हो सकते हैं।हालांकि, हर समान नाम का इस्तेमाल अपने आप ट्रेडमार्क उल्लंघन नहीं माना जाता। ऐसे मामलों में ट्रेडमार्क के अधिकार, उपयोग की प्रकृति, संबंधित सेवाओं और उपभोक्ताओं के बीच भ्रम की संभावना जैसे पहलुओं पर विचार किया जाता है।
अंतरिम आदेश का क्या मतलब है?
दिल्ली हाई कोर्ट की ओर से 7 अक्टूबर को जारी किया गया आदेश अंतरिम प्रकृति का है। इसका अर्थ है कि अदालत ने मुकदमे के अंतिम निपटारे से पहले संबंधित गतिविधियों को रोकने के लिए निर्देश जारी किए हैं।अंतरिम आदेश को मामले के सभी आरोपों पर अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं माना जाता।मुकदमे में संबंधित पक्षों की दलीलों, दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों पर आगे विचार किया जा सकता है।इस मामले में भी अदालत ने फिलहाल संबंधित वेबसाइटों को सस्पेंड करने और ट्रेडमार्क के कथित अनधिकृत इस्तेमाल को रोकने के निर्देश दिए हैं।
ऑनलाइन ब्रांड सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण मामला
डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ कंपनियों के नाम और ट्रेडमार्क का ऑनलाइन इस्तेमाल एक महत्वपूर्ण कानूनी विषय बन गया है।किसी प्रसिद्ध ब्रांड से मिलता-जुलता नाम इस्तेमाल करने वाली वेबसाइट उपभोक्ताओं के बीच भ्रम पैदा कर सकती है। ऐसे में कंपनियां अपने ट्रेडमार्क की सुरक्षा के लिए अदालत का दरवाजा खटखटा सकती हैं।रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के इस मामले में भी कंपनी ने 'Jio' ट्रेडमार्क के कथित इस्तेमाल को लेकर न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की थी।दिल्ली हाई कोर्ट ने कंपनी की याचिका पर अंतरिम राहत देते हुए संबंधित डोमेन नेम रजिस्ट्रार और गूगल को निर्देश जारी किए हैं।
आगे की सुनवाई पर रहेगी नजर
फिलहाल अदालत के आदेश के अनुसार 126 वेबसाइटों को सस्पेंड करने और संबंधित ऑनलाइन सामग्री तक पहुंच रोकने की कार्रवाई की जानी है।हालांकि, इस मामले में अगली सुनवाई की तारीख, संबंधित वेबसाइट संचालकों की प्रतिक्रिया और आदेश के अनुपालन की वर्तमान स्थिति का विवरण उपलब्ध नहीं है।दिल्ली हाई कोर्ट का यह आदेश इंटरनेट पर ट्रेडमार्क के कथित अनधिकृत इस्तेमाल और डिजिटल प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारियों से जुड़े कानूनी पहलुओं को सामने लाता है।अब आगे की न्यायिक प्रक्रिया में यह स्पष्ट होगा कि संबंधित पक्षों के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर अदालत क्या अंतिम निष्कर्ष निकालती है।
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