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भारतीय वायुसेना के 94 साल पूरे एपी सिंह ने बताई ताकत

Ratna Netam
9 Oct 2026 2:57 PM IST
भारतीय वायुसेना के 94 साल पूरे एपी सिंह ने बताई ताकत
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जोधपुर। भारतीय वायु सेना (IAF) की 94वीं वर्षगांठ के अवसर पर एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने शुक्रवार को जोधपुर में आयोजित एक सेमिनार में वायु सेना की ऐतिहासिक यात्रा, बढ़ती क्षमताओं और वैश्विक स्तर पर उसकी भूमिका को लेकर महत्वपूर्ण बातें कहीं। उन्होंने कहा कि भारतीय वायु सेना ने वर्ष 1932 में केवल चार वापिटी (Wapiti) विमानों के साथ अपनी शुरुआत की थी, लेकिन आज यह वैश्विक स्तर पर एक महत्वपूर्ण वायु शक्ति के रूप में विकसित हो चुकी है। उन्होंने जोधपुर में आयोजित 'तरंग शक्ति' अभ्यास के महत्व पर भी प्रकाश डाला और इसे भारतीय वायु सेना की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय भागीदारी से जोड़कर देखा।एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने कहा कि भारतीय वायु सेना का 94 वर्षों का सफर देश की रक्षा क्षमताओं के विकास और बदलती जरूरतों के अनुरूप आगे बढ़ने की कहानी प्रस्तुत करता है। उन्होंने बताया कि वायु सेना की स्थापना के समय उसके पास सीमित संसाधन थे, लेकिन समय के साथ इसकी क्षमताओं और परिचालन दायरे में विस्तार हुआ है।
जोधपुर में आयोजित सेमिनार में दिया संबोधन
एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने 'सेंटर फॉर एयरोस्पेस पावर एंड स्ट्रैटेजिक स्टडीज' (CAPSS) द्वारा आयोजित सेमिनार को संबोधित किया। यह कार्यक्रम जोधपुर में चल रहे 'तरंग शक्ति' अभ्यास के दौरान आयोजित किया गया था।अपने संबोधन में उन्होंने इस आयोजन को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि यह सेमिनार ऐसे समय में हो रहा है, जब भारतीय वायु सेना अपनी स्थापना के 94 वर्ष पूरे कर चुकी है।उन्होंने कहा, "यह कार्यक्रम बहुत महत्वपूर्ण है। हम यहां ऐसे समय में बैठे हैं जब 'तरंग शक्ति' एक्सरसाइज चल रही है और यह सेमिनार भी उसी एक्सरसाइज का हिस्सा है। साथ ही, हमने कल ही भारतीय वायु सेना के तौर पर अपने 94 साल पूरे किए हैं और अपनी 94वीं वर्षगांठ मनाई है।"उनके इस बयान में वायु सेना के स्थापना दिवस और सैन्य अभ्यास के बीच संबंध को विशेष महत्व दिया गया।
चार वापिटी विमानों से हुई थी शुरुआत
एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने भारतीय वायु सेना के शुरुआती दौर को याद करते हुए बताया कि वर्ष 1932 में इसकी शुरुआत केवल चार वापिटी विमानों से हुई थी।उस समय वायु सेना के पास सीमित संसाधन और विमान थे। इसके बाद दशकों के दौरान भारतीय वायु सेना ने अपनी परिचालन क्षमताओं में विस्तार किया।भारतीय वायु सेना की स्थापना 8 अक्टूबर 1932 को हुई थी। उस समय यह ब्रिटिश शासन के अंतर्गत एक सैन्य वायु संगठन के रूप में स्थापित की गई थी। स्वतंत्रता के बाद भारतीय वायु सेना ने देश की सुरक्षा व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।समय के साथ वायु सेना में लड़ाकू विमानों, परिवहन विमानों, हेलीकॉप्टरों और अन्य आधुनिक प्रणालियों को शामिल किया गया।आज भारतीय वायु सेना की जिम्मेदारियों में देश के हवाई क्षेत्र की सुरक्षा, सैन्य अभियानों में सहयोग, परिवहन और आपदा राहत जैसे कार्य भी शामिल हैं।
वैश्विक वायु शक्ति के रूप में विकसित हुई IAF
एयर चीफ मार्शल ने भारतीय वायु सेना के विकास को लेकर कहा कि यह संगठन अब वैश्विक स्तर पर अपनी भूमिका निभा रहा है।उन्होंने वायु सेना की शुरुआती स्थिति और वर्तमान क्षमताओं की तुलना करते हुए उसके लंबे सफर को रेखांकित किया।उनके अनुसार, भारतीय वायु सेना ने सीमित संसाधनों से शुरुआत करके अपनी क्षमताओं का विस्तार किया है। उन्होंने इस विकास को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वायु सेना की बढ़ती भूमिका से जोड़ा।हालांकि, उनके संबोधन में वायु सेना की वर्तमान विमान संख्या, परिचालन क्षमता या किसी अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग का विस्तृत आंकड़ा उपलब्ध नहीं कराया गया।
तरंग शक्ति' अभ्यास का बताया महत्व
जोधपुर में आयोजित 'तरंग शक्ति' अभ्यास का उल्लेख करते हुए एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने कहा कि यह कार्यक्रम भारतीय वायु सेना के लिए महत्वपूर्ण है।उन्होंने बताया कि CAPSS द्वारा आयोजित सेमिनार भी इसी अभ्यास का हिस्सा है।सैन्य अभ्यासों का उद्देश्य सामान्यतः परिचालन तैयारियों का मूल्यांकन करना, विभिन्न परिस्थितियों में अभ्यास करना और सैन्य क्षमताओं को बेहतर बनाना होता है।अंतरराष्ट्रीय स्तर के वायु सैन्य अभ्यास विभिन्न देशों की वायु सेनाओं के बीच सहयोग, अनुभवों के आदान-प्रदान और संयुक्त परिचालन प्रक्रियाओं को समझने का अवसर भी प्रदान करते हैं।हालांकि, जोधपुर में आयोजित इस अभ्यास में किन देशों ने भाग लिया और कितने विमानों को शामिल किया गया, इसका विस्तृत विवरण उपलब्ध जानकारी में नहीं दिया गया है।
एयरोस्पेस शक्ति और रणनीतिक अध्ययन पर चर्चा
सेमिनार का आयोजन सेंटर फॉर एयरोस्पेस पावर एंड स्ट्रैटेजिक स्टडीज द्वारा किया गया था।एयरोस्पेस शक्ति आधुनिक सैन्य रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसमें हवाई अभियानों, तकनीकी विकास, सुरक्षा चुनौतियों और सैन्य तैयारियों से जुड़े विभिन्न पहलुओं का अध्ययन किया जाता है।ऐसे सेमिनार सैन्य विशेषज्ञों और संबंधित क्षेत्रों के जानकारों को रणनीतिक विषयों पर विचार-विमर्श करने का अवसर प्रदान करते हैं।एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने अपने संबोधन में वायु सेना की ऐतिहासिक यात्रा और 'तरंग शक्ति' अभ्यास के महत्व को प्रमुखता दी।उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारतीय वायु सेना का विकास केवल उसके शुरुआती संसाधनों और वर्तमान क्षमताओं की तुलना तक सीमित नहीं है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी बढ़ती भूमिका भी महत्वपूर्ण है।
94 वर्षों में भारतीय वायु सेना का सफर
भारतीय वायु सेना ने अपनी स्थापना के बाद विभिन्न दौर देखे हैं। देश की स्वतंत्रता के बाद वायु सेना की जिम्मेदारियों में लगातार विस्तार हुआ।भारत की सुरक्षा जरूरतों के अनुरूप वायु सेना ने अपनी क्षमताओं को विकसित किया और आधुनिक सैन्य तकनीकों को अपनाया।वायु सेना के कार्यों में हवाई सुरक्षा के साथ सैन्य परिवहन, राहत एवं बचाव अभियान और अन्य महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां भी शामिल हैं।आधुनिक समय में वायु शक्ति किसी भी देश की रक्षा तैयारियों का प्रमुख हिस्सा मानी जाती है। बदलती तकनीक और सुरक्षा चुनौतियों के बीच वायु सेनाओं के लिए प्रशिक्षण, समन्वय और परिचालन तैयारियों का महत्व बढ़ गया है।इसी संदर्भ में 'तरंग शक्ति' जैसे अभ्यास सैन्य प्रशिक्षण और सहयोग की दृष्टि से महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
स्थापना दिवस के बाद सैन्य अभ्यास पर जोर
भारतीय वायु सेना की 94वीं वर्षगांठ के बाद आयोजित सेमिनार में एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने संगठन के इतिहास और वर्तमान भूमिका को एक साथ सामने रखा।उन्होंने चार वापिटी विमानों से शुरू हुई यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय वायु सेना आज वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना चुकी है।उनका संबोधन वायु सेना के लंबे इतिहास, सैन्य क्षमताओं के विकास और अंतरराष्ट्रीय भागीदारी पर केंद्रित रहा।जोधपुर में चल रहे 'तरंग शक्ति' अभ्यास के दौरान आयोजित इस कार्यक्रम ने भारतीय वायु सेना की उपलब्धियों और भविष्य की सैन्य तैयारियों से जुड़े विषयों पर चर्चा का अवसर प्रदान किया।
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