Mumbai मुंबई : प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मिंत्रा डिज़ाइन्स प्राइवेट लिमिटेड और उसकी सहयोगी संस्थाओं व निदेशकों के खिलाफ 1,654 करोड़ रुपये से अधिक के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) से जुड़े विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के कथित उल्लंघन के लिए एक औपचारिक शिकायत दर्ज की है। एजेंसी के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, यह कार्रवाई फेमा की धारा 16(3) के तहत की गई है, जब एक व्यापक जाँच में पता चला कि मिंत्रा और उसकी संबंधित कंपनियाँ भारत की एफडीआई नीतियों का उल्लंघन करते हुए, थोक कैश-एंड-कैरी व्यवसाय की आड़ में कथित तौर पर बहु-ब्रांड खुदरा व्यापार (एमबीआरटी) में लिप्त थीं।
अधिकारी ने कहा, "विश्वसनीय खुफिया जानकारी के आधार पर की गई जाँच में पाया गया कि मिंत्रा डिज़ाइन्स प्राइवेट लिमिटेड ने खुद को थोक व्यापारी घोषित करते हुए 1,654.35 करोड़ रुपये का एफडीआई प्राप्त किया था।" हालाँकि, जाँच से पता चला कि मिंत्रा की लगभग सारी बिक्री वेक्टर ई-कॉमर्स प्राइवेट लिमिटेड को हुई थी, जो एक संबंधित पक्ष और उसी समूह का हिस्सा है, और जो सीधे खुदरा ग्राहकों को उत्पाद बेचता था।
ईडी ने इस ढाँचे को "छलावरण" करार दिया है, जिसका इस्तेमाल मूलतः व्यवसाय-से-ग्राहक (बी2सी) लेन-देन को व्यवसाय-से-व्यवसाय (बी2बी) लेन-देन में विभाजित करने और फिर एफडीआई प्रतिबंधों से बचने के लिए बी2सी में वापस लाने के लिए किया गया था। 1 अप्रैल और 1 अक्टूबर, 2010 के एफडीआई नीति संशोधनों के अनुसार, थोक या कैश-एंड-कैरी व्यवसायों को अपने माल का केवल 25 प्रतिशत तक ही समूह की कंपनियों को बेचने की अनुमति है। ईडी का दावा है कि मिंत्रा ने अपने 100 प्रतिशत स्टॉक वेक्टर ई-कॉमर्स को बेचकर इस नियम का उल्लंघन किया है। न्यायनिर्णयन प्राधिकरण के समक्ष दायर शिकायत में मिंत्रा और उसकी सहयोगी कंपनियों पर फेमा की धारा 6(3)(बी) और उपरोक्त समेकित एफडीआई नीतियों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया गया है। कथित उल्लंघन का कुल मूल्य 1,654.35 करोड़ रुपये आंका गया है।