असंगठित श्रमिकों के लिए बड़ा कदम ई श्रम पोर्टल पर रिकॉर्ड पंजीकरण
ई श्रम ने रचा इतिहास
नई दिल्ली: केंद्र सरकार के ई-श्रम पोर्टल ने पांच साल पूरे कर लिए हैं। इस दौरान देशभर में असंगठित क्षेत्र के 31.89 करोड़ से ज्यादा कामगारों ने पोर्टल पर अपना पंजीकरण कराया है। सरकार का कहना है कि यह पहल असंगठित श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जोड़ने और उन्हें एक डिजिटल पहचान देने की दिशा में बड़ा कदम साबित हुई है।
श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की ओर से शुरू किए गए ई-श्रम पोर्टल का उद्देश्य देश के करोड़ों असंगठित श्रमिकों का राष्ट्रीय डेटाबेस तैयार करना है, ताकि जरूरत के समय उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ आसानी से मिल सके।
असंगठित कामगारों को मिली डिजिटल पहचान
ई-श्रम कार्ड के जरिए श्रमिकों को एक यूनिक पहचान संख्या (UAN) दी जाती है। इस कार्ड की मदद से सरकार विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं को सीधे लाभार्थियों तक पहुंचाने का प्रयास करती है।
इस पोर्टल पर निर्माण मजदूर, घरेलू कामगार, रेहड़ी-पटरी विक्रेता, कृषि श्रमिक, प्रवासी मजदूर और अन्य असंगठित क्षेत्र के कर्मचारी पंजीकरण करा सकते हैं।
योजनाओं से जोड़ने में मदद
सरकार के अनुसार, ई-श्रम पोर्टल के माध्यम से श्रमिकों को स्वास्थ्य, बीमा, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है।
इसके अलावा आपदा या आपात स्थिति में जरूरतमंद श्रमिकों तक सहायता पहुंचाने में भी यह डेटाबेस उपयोगी साबित हो सकता है।
पांच साल में करोड़ों लोगों तक पहुंच
ई-श्रम पोर्टल की शुरुआत अगस्त 2021 में की गई थी। पांच वर्षों में इसके साथ 31.89 करोड़ से अधिक असंगठित क्षेत्र के श्रमिक जुड़ चुके हैं।
सरकार का लक्ष्य है कि देश के हर पात्र असंगठित कामगार को इस डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाए, ताकि उन्हें सरकारी सुविधाओं का लाभ मिल सके।
प्रवासी मजदूरों के लिए भी अहम
देश में बड़ी संख्या में मजदूर रोजगार के लिए एक राज्य से दूसरे राज्य जाते हैं। ऐसे में ई-श्रम पोर्टल उनके लिए एक महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है, क्योंकि इसमें दर्ज जानकारी के आधार पर उनकी पहचान और जरूरतों को समझने में मदद मिलती है।
आगे भी जारी रहेगा विस्तार
श्रम मंत्रालय का कहना है कि आने वाले समय में पोर्टल को और मजबूत बनाया जाएगा और अधिक से अधिक सरकारी योजनाओं को इससे जोड़ा जाएगा।
ई-श्रम पोर्टल को असंगठित क्षेत्र के करोड़ों कामगारों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण डिजिटल पहल माना जा रहा है।