
व्यापार | भारत में थोक महंगाई दर यानी WPI (Wholesale Price Index) में फरवरी 2025 में बढ़ोतरी देखी गई है। आंकड़ों के अनुसार, डब्ल्यूपीआई में 4.5% की वृद्धि हुई है, जो एक महत्वपूर्ण संकेत है कि थोक स्तर पर वस्तुओं की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। फरवरी महीने में यह वृद्धि पिछले साल की तुलना में अधिक रही है, जिससे अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ने की संभावना है।
थोक महंगाई दर का बढ़ना, विशेष रूप से खाद्य पदार्थों, कच्चे माल और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी का संकेत देता है। यह दर अर्थव्यवस्था में कीमतों के दबाव को मापने का एक प्रमुख सूचकांक है, जो उपभोक्ताओं और उद्योगों पर असर डालता है। सरकार के लिए यह चिंता का विषय हो सकता है, क्योंकि इससे उपभोक्ताओं की खरीदारी शक्ति पर प्रभाव पड़ता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस बढ़ोतरी के पीछे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला संकट, ऊर्जा कीमतों में वृद्धि और कुछ प्रमुख वस्तुओं की कमी जैसी कारण हो सकते हैं। इसके अतिरिक्त, कृषि क्षेत्र में भी कुछ उतार-चढ़ाव देखने को मिले हैं, जो इस बढ़ोतरी के कारण बन सकते हैं।
इस बढ़ी हुई महंगाई दर का असर आने वाले महीनों में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) पर भी देखने को मिल सकता है, जिससे महंगाई दर में और वृद्धि हो सकती है। सरकार और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया को इस स्थिति से निपटने के लिए उचित कदम उठाने होंगे, ताकि अर्थव्यवस्था को स्थिर रखा जा सके।