India-UK डील लागू, 100 अरब डॉलर व्यापार का लक्ष्य

Update: 2026-07-16 05:39 GMT

नई दिल्ली/लंदन: भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच आर्थिक संबंधों को नई दिशा देने वाले महत्वपूर्ण द्विपक्षीय समझौते बुधवार से आधिकारिक रूप से लागू हो गए। दोनों देशों ने कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक एंड ट्रेड एग्रीमेंट (CETA) और सोशल सिक्योरिटी एग्रीमेंट (SSA), जिसे डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन (DCC) भी कहा जाता है, को लागू कर दिया है।

इन समझौतों का उद्देश्य भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापार को आसान बनाना, टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं को कम करना तथा दोनों देशों के व्यवसायों और कामगारों के लिए नए अवसर पैदा करना है। दोनों देशों ने अगले पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना कर 100 अरब डॉलर से अधिक करने का लक्ष्य रखा है।

व्यापारिक संबंधों को मिलेगी नई गति

CETA के लागू होने के बाद भारत और ब्रिटेन के बीच वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार में कई बदलाव देखने को मिल सकते हैं। समझौते के तहत दोनों देशों के कारोबारी क्षेत्रों को बाजार तक बेहतर पहुंच मिलने की उम्मीद है।

भारत और ब्रिटेन लंबे समय से एक-दूसरे के महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार रहे हैं। नए समझौते से दोनों देशों के उद्योगों को अधिक प्रतिस्पर्धी माहौल मिलेगा और व्यापार विस्तार के नए रास्ते खुलेंगे।

इस समझौते के जरिए कई क्षेत्रों में शुल्क संबंधी बाधाओं को कम करने का प्रयास किया गया है, जिससे कंपनियों के लिए दूसरे देश के बाजारों में पहुंच बनाना आसान होगा।

टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाएं होंगी कम

व्यापार समझौते का प्रमुख उद्देश्य आयात-निर्यात प्रक्रिया को सरल बनाना है। दोनों देशों ने ऐसे नियमों को आसान बनाने पर सहमति जताई है, जिनके कारण व्यापार में अतिरिक्त लागत या देरी होती है।

टैरिफ में कमी से कई उत्पादों के व्यापार को फायदा मिलने की संभावना है। इसके अलावा गैर-टैरिफ बाधाओं को कम करने से कंपनियों को नियामकीय प्रक्रियाओं में आसानी हो सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इससे छोटे और मध्यम उद्योगों को भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी पहुंच बढ़ाने का अवसर मिलेगा।

कर्मचारियों के लिए सोशल सिक्योरिटी समझौता अहम

CETA के साथ लागू हुआ सोशल सिक्योरिटी एग्रीमेंट भी दोनों देशों के कामगारों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यह समझौता विशेष रूप से उन कर्मचारियों के लिए मददगार होगा, जो अस्थायी काम के लिए भारत और ब्रिटेन के बीच आते-जाते हैं।

इस समझौते का उद्देश्य कर्मचारियों को दोहरी सामाजिक सुरक्षा योगदान व्यवस्था से राहत देना है। यानी ऐसे कर्मचारियों को एक ही अवधि के लिए दोनों देशों में अलग-अलग सामाजिक सुरक्षा योगदान देने की समस्या से बचाया जा सकेगा।

इससे भारत और ब्रिटेन के बीच पेशेवरों की आवाजाही को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

भारतीय कंपनियों और पेशेवरों को लाभ की उम्मीद

भारत की आईटी, सेवा, फार्मा, इंजीनियरिंग और अन्य क्षेत्रों की कंपनियां ब्रिटेन के बाजार में सक्रिय हैं। नए समझौते से इन क्षेत्रों को बेहतर अवसर मिलने की संभावना जताई जा रही है।

वहीं, ब्रिटेन की कंपनियों के लिए भी भारत जैसे बड़े और तेजी से बढ़ते बाजार में निवेश और व्यापार के अवसर बढ़ सकते हैं। दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ने से रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं।

पांच साल में व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य

भारत और ब्रिटेन ने इस समझौते के माध्यम से अगले पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर से अधिक तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है।

दोनों देशों का मानना है कि व्यापारिक बाधाएं कम होने और निवेश के अवसर बढ़ने से यह लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। इसके लिए सरकारों के साथ-साथ निजी क्षेत्र की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी।

आर्थिक साझेदारी को मिलेगी मजबूती

भारत और ब्रिटेन के बीच संबंध केवल व्यापार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि शिक्षा, तकनीक, निवेश और नवाचार जैसे क्षेत्रों में भी दोनों देश सहयोग करते रहे हैं। नए समझौतों को इन व्यापक संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

दोनों देशों के अधिकारियों का कहना है कि CETA और सोशल सिक्योरिटी एग्रीमेंट से कारोबारी माहौल बेहतर होगा और दोनों अर्थव्यवस्थाओं को फायदा पहुंचेगा।

वैश्विक व्यापार में बढ़ेगी प्रतिस्पर्धा

वर्तमान वैश्विक आर्थिक माहौल में देशों के बीच मुक्त और आसान व्यापार व्यवस्था का महत्व बढ़ गया है। भारत और ब्रिटेन के बीच यह समझौता दोनों देशों को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में अपनी भूमिका मजबूत करने में मदद कर सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, समझौते का वास्तविक लाभ इसके प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा। यदि उद्योगों और कामगारों तक इसकी सुविधाएं सही तरीके से पहुंचती हैं तो भारत-यूके आर्थिक साझेदारी एक नए स्तर पर पहुंच सकती है।

भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच CETA और सोशल सिक्योरिटी एग्रीमेंट का लागू होना दोनों देशों के आर्थिक संबंधों में एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। अब नजर इस बात पर होगी कि आने वाले वर्षों में ये समझौते व्यापार, निवेश और रोजगार के क्षेत्र में कितना प्रभाव डालते हैं।

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