बिजनेस :वैश्विक बाजारों में जारी अस्थिरता और बढ़ती बॉन्ड यील्ड के दबाव का असर अब कीमती धातुओं पर भी दिखाई देने लगा है। सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। निवेशकों के बीच ब्याज दरों और महंगाई को लेकर बढ़ती चिंता के कारण सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने पर भी दबाव बढ़ा है। वहीं, चांदी में करीब 2 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह वैश्विक बॉन्ड बाजार में बढ़ता दबाव है। जब बॉन्ड यील्ड बढ़ती है तो निवेशकों का रुझान ऐसे एसेट्स की ओर बढ़ जाता है, जहां उन्हें निश्चित रिटर्न मिलने की संभावना होती है। इसके कारण सोने और चांदी जैसी गैर-ब्याज वाली संपत्तियों की मांग कुछ समय के लिए कमजोर पड़ जाती है।
बॉन्ड यील्ड बढ़ने से क्यों गिरा सोना?
सोने को आमतौर पर आर्थिक अनिश्चितता और महंगाई के समय सुरक्षित निवेश माना जाता है। लेकिन जब अमेरिकी और अन्य प्रमुख देशों के बॉन्ड पर मिलने वाला रिटर्न बढ़ता है, तो निवेशक अपना पैसा बॉन्ड जैसे विकल्पों में लगाना पसंद करते हैं।
हाल के दिनों में लंबी अवधि की बॉन्ड यील्ड में तेजी आई है। इससे सोने की कीमतों पर दबाव देखने को मिला। बाजार में निवेशक अब केंद्रीय बैंकों की नीतियों और आने वाले ब्याज दर संकेतों पर नजर बनाए हुए हैं।
चांदी में ज्यादा गिरावट क्यों?
सोने की तुलना में चांदी पर दोहरा दबाव देखने को मिलता है। चांदी केवल कीमती धातु ही नहीं बल्कि औद्योगिक धातु भी है। इसका इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनल, ऑटोमोबाइल और कई औद्योगिक क्षेत्रों में होता है।
जब वैश्विक आर्थिक विकास को लेकर चिंता बढ़ती है तो औद्योगिक मांग प्रभावित होने की आशंका से चांदी पर दबाव ज्यादा दिखाई देता है। इसी कारण हालिया गिरावट में चांदी सोने की तुलना में ज्यादा कमजोर नजर आई।
वैश्विक तनाव के बावजूद नहीं संभल पाए भाव
आमतौर पर दुनिया में तनाव बढ़ने पर निवेशक सोने की ओर आकर्षित होते हैं। भू-राजनीतिक संकट के समय सोने को सुरक्षित विकल्प माना जाता है। लेकिन इस बार बढ़ती बॉन्ड यील्ड और महंगाई से जुड़ी चिंताओं ने सोने की तेजी को सीमित कर दिया।
बाजार में निवेशक एक साथ कई संकेतों पर नजर रख रहे हैं। एक तरफ वैश्विक तनाव बना हुआ है, वहीं दूसरी ओर ऊंची ब्याज दरों और सरकारी कर्ज को लेकर चिंता बढ़ रही है। इन दोनों कारकों के बीच सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है।
डॉलर की चाल भी अहम
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतें डॉलर में तय होती हैं। डॉलर मजबूत होने पर आमतौर पर सोने की कीमतों पर दबाव आता है, क्योंकि अन्य मुद्राओं वाले खरीदारों के लिए सोना महंगा हो जाता है।
हालांकि, डॉलर और बॉन्ड यील्ड की चाल में बदलाव आने पर सोने को फिर से समर्थन मिल सकता है। निवेशक अब अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियों और ब्याज दरों को लेकर संकेतों का इंतजार कर रहे हैं।
भारतीय बाजार पर क्या असर?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने-चांदी की कीमतों में बदलाव का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ता है। भारत में सोना निवेश के साथ-साथ शादी और त्योहारों की मांग के कारण भी महत्वपूर्ण है।
कीमतों में गिरावट आने पर खरीदारों की रुचि बढ़ सकती है, लेकिन लंबी अवधि के निवेशक आमतौर पर वैश्विक आर्थिक संकेतों और कीमतों के रुझान को देखकर फैसला लेते हैं।
क्या आगे फिर बढ़ सकते हैं सोने के दाम?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि सोने की कीमतों की दिशा आने वाले दिनों में कई कारकों पर निर्भर करेगी। इनमें केंद्रीय बैंकों की ब्याज दर नीति, डॉलर की स्थिति, महंगाई के आंकड़े और वैश्विक तनाव प्रमुख हैं।
अगर ब्याज दरों में नरमी की उम्मीद बढ़ती है या वैश्विक अनिश्चितता ज्यादा गहराती है तो सोने की मांग फिर बढ़ सकती है। वहीं, अगर बॉन्ड यील्ड लंबे समय तक ऊंची रहती है तो कीमती धातुओं पर दबाव बना रह सकता है।
निवेशकों को क्या करना चाहिए?
विशेषज्ञों के अनुसार, सोना और चांदी में निवेश करने वालों को केवल छोटी अवधि की गिरावट या तेजी देखकर फैसला नहीं लेना चाहिए। कीमती धातुएं आमतौर पर लंबे समय के निवेश के लिए देखी जाती हैं।
निवेशकों को अपनी आर्थिक स्थिति, लक्ष्य और जोखिम क्षमता को ध्यान में रखकर निर्णय लेना चाहिए। बाजार में उतार-चढ़ाव सामान्य प्रक्रिया है और कीमतों में बदलाव कई वैश्विक कारणों से होता है।
फिलहाल सोने और चांदी की कीमतों में आई गिरावट ने निवेशकों का ध्यान फिर से वैश्विक आर्थिक संकेतों की ओर खींच दिया है। ऊंची बॉन्ड यील्ड, महंगाई की चिंता और अंतरराष्ट्रीय तनाव के बीच आने वाले दिनों में कीमती धातुओं की चाल पर सभी की नजर रहेगी।