नई दिल्ली। भारतीय शेयर बाजार को लेकर वैश्विक निवेश बैंक गोल्डमैन सैक्स (Goldman Sachs) ने अपना नजरिया बदला है। कंपनी का अनुमान है कि जून 2027 तक निफ्टी 50 इंडेक्स 26,500 के स्तर तक पहुंच सकता है। ब्रोकरेज ने यह अनुमान भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती, कंपनियों की बेहतर कमाई और विदेशी निवेशकों की बाजार में संभावित वापसी को ध्यान में रखते हुए लगाया है।
गोल्डमैन सैक्स का मानना है कि आने वाले समय में भारतीय शेयर बाजार में सकारात्मक रुख देखने को मिल सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, देश की आर्थिक वृद्धि दर मजबूत बनी हुई है और कॉरपोरेट सेक्टर के प्रदर्शन में सुधार की उम्मीद है। इसके अलावा विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की ओर से भारतीय बाजार में दोबारा निवेश बढ़ने की संभावना भी बाजार को मजबूती दे सकती है।
ब्रोकरेज ने कहा है कि भारतीय बाजार में लंबी अवधि के लिए कई अवसर मौजूद हैं। इसी को देखते हुए गोल्डमैन सैक्स ने बैंकिंग, डिफेंस, पावर, एनर्जी, होटल और एविएशन जैसे क्षेत्रों के प्रमुख शेयरों को अपनी पसंदीदा सूची में शामिल किया है। रिपोर्ट में करीब 14 से 15 बड़े शेयरों पर भरोसा जताया गया है, जिनमें भविष्य में बेहतर प्रदर्शन की संभावना बताई गई है।
बैंकिंग सेक्टर पर खास भरोसा
गोल्डमैन सैक्स ने भारतीय बैंकिंग क्षेत्र को बाजार की मजबूती का एक प्रमुख आधार माना है। ब्रोकरेज का मानना है कि देश में कर्ज की मांग बढ़ने, आर्थिक गतिविधियों में तेजी और बैंकों की बेहतर बैलेंस शीट का फायदा इस सेक्टर को मिल सकता है। बैंकिंग शेयरों में लंबी अवधि के निवेश के अवसर देखे जा रहे हैं।
डिफेंस और एनर्जी सेक्टर में अवसर
रिपोर्ट में डिफेंस और एनर्जी सेक्टर को भी महत्वपूर्ण बताया गया है। भारत में रक्षा उत्पादन बढ़ाने की नीति और सरकारी खर्च में बढ़ोतरी के कारण डिफेंस कंपनियों के लिए संभावनाएं बढ़ी हैं। वहीं, ऊर्जा क्षेत्र में बढ़ती मांग और बुनियादी ढांचे के विस्तार से कंपनियों को लाभ मिलने की उम्मीद जताई गई है।
इसके अलावा होटल और एविएशन सेक्टर को भी तेजी का लाभ मिलने की संभावना बताई गई है। देश में बढ़ते पर्यटन, यात्राओं में वृद्धि और आर्थिक गतिविधियों के विस्तार से इन क्षेत्रों की कंपनियों के प्रदर्शन में सुधार आ सकता है।
विदेशी निवेशकों की वापसी से बाजार को सहारा
गोल्डमैन सैक्स का कहना है कि पिछले कुछ समय में विदेशी निवेशकों की गतिविधियों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है, लेकिन आने वाले समय में भारतीय बाजार में विदेशी निवेश की वापसी संभव है। विदेशी पूंजी का प्रवाह बढ़ने से बाजार को नई मजबूती मिल सकती है।
हालांकि, ब्रोकरेज ने यह भी संकेत दिया है कि बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां, ब्याज दरों में बदलाव, कच्चे तेल की कीमतें और भू-राजनीतिक घटनाक्रम बाजार की दिशा को प्रभावित कर सकते हैं।
निवेश विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी निवेश निर्णय से पहले कंपनियों के फंडामेंटल, वित्तीय प्रदर्शन और बाजार की परिस्थितियों का आकलन करना जरूरी है। केवल किसी रिपोर्ट या अनुमान के आधार पर निवेश करने से बचना चाहिए।
गोल्डमैन सैक्स का 26,500 का निफ्टी लक्ष्य भारतीय शेयर बाजार को लेकर वैश्विक संस्थानों के बढ़ते भरोसे को दर्शाता है। यदि अर्थव्यवस्था की रफ्तार, कंपनियों की आय और विदेशी निवेश का समर्थन जारी रहता है तो बाजार में लंबी अवधि की तेजी देखने को मिल सकती है।