बिजनेस : सोने की कीमतों में लगातार तेजी देखने को मिल रही है। निवेशकों और आम खरीदारों की नजर अब इस बात पर टिकी है कि क्या आने वाले समय में सोने का भाव **1.70 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम** के स्तर को पार कर सकता है। जून से अब तक सोने की कीमतों में करीब 17 फीसदी तक की बढ़ोतरी देखने को मिली है, जिसके बाद बाजार में इसकी आगे की चाल को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
सोना हमेशा से भारतीयों के लिए निवेश का भरोसेमंद साधन रहा है। आर्थिक अनिश्चितता, महंगाई, वैश्विक तनाव और कमजोर होती मुद्राओं के बीच लोग सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की ओर रुख करते हैं। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी का असर भारतीय बाजार में भी दिखाई दे रहा है।
जून से क्यों बढ़े सोने के दाम?
सोने की कीमतों में तेजी के पीछे कई बड़े कारण बताए जा रहे हैं। सबसे बड़ा कारण वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितता है। दुनिया के कई हिस्सों में तनाव और आर्थिक चिंताओं के कारण निवेशक सुरक्षित विकल्पों की तलाश कर रहे हैं।
इसके अलावा दुनियाभर के केंद्रीय बैंकों की ओर से सोने की खरीदारी बढ़ने से भी कीमतों को समर्थन मिला है। जब बड़े संस्थान सोने में निवेश बढ़ाते हैं तो बाजार में मांग बढ़ती है और कीमतों पर इसका सीधा असर पड़ता है।
क्या ₹1.70 लाख तक पहुंच सकता है सोना?
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, सोने के भाव में आगे भी तेजी की संभावना बनी हुई है। कुछ अनुमान बताते हैं कि अगर वैश्विक परिस्थितियां अनुकूल नहीं रहीं, डॉलर में कमजोरी आई और केंद्रीय बैंकों की खरीदारी जारी रही तो सोना 1.70 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास पहुंच सकता है।
हालांकि विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि सोने की कीमतें कई कारकों पर निर्भर करती हैं। इसमें अंतरराष्ट्रीय बाजार, अमेरिकी ब्याज दरें, रुपये की स्थिति और भू-राजनीतिक घटनाएं शामिल हैं।
महंगाई और आर्थिक संकट का असर
जब महंगाई बढ़ती है तो सोने की मांग अक्सर बढ़ जाती है। निवेशक अपनी संपत्ति को सुरक्षित रखने के लिए सोने में पैसा लगाना पसंद करते हैं।
इसके अलावा अगर वैश्विक अर्थव्यवस्था में मंदी की आशंका बढ़ती है तो भी सोने को फायदा मिलता है। यही कारण है कि पिछले कुछ समय से सोने में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी है।
भारतीय बाजार में बढ़ी मांग
भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ता देशों में शामिल है। यहां शादी-ब्याह और त्योहारों के दौरान सोने की मांग काफी बढ़ जाती है।
हालांकि ऊंची कीमतों के कारण आम खरीदारों पर दबाव भी बढ़ा है। कई लोग अब भारी गहनों की जगह हल्के आभूषण या डिजिटल गोल्ड जैसे विकल्पों की ओर बढ़ रहे हैं।
निवेशकों के लिए क्या संकेत?
विशेषज्ञों का कहना है कि सोने में निवेश करने वालों को केवल तेजी देखकर फैसला नहीं लेना चाहिए। बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।
लंबी अवधि के निवेशक सोने को पोर्टफोलियो में संतुलन बनाने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। वहीं कम समय में मुनाफे की उम्मीद रखने वालों को बाजार की चाल और जोखिम को समझना जरूरी है।
क्या सोने में आएगी गिरावट?
हालांकि सोने में तेजी का दौर जारी है, लेकिन कीमतों में कभी-कभी गिरावट भी देखने को मिल सकती है। अगर वैश्विक तनाव कम होता है, डॉलर मजबूत होता है या ब्याज दरों में बड़ा बदलाव आता है तो सोने की कीमतों पर दबाव आ सकता है।
इसलिए निवेशकों को बाजार की स्थिति पर नजर रखनी चाहिए और जल्दबाजी में फैसला लेने से बचना चाहिए।
एक्सपर्ट्स की नजर में आगे का रुख
कई बाजार विशेषज्ञ मानते हैं कि सोने की लंबी अवधि की कहानी अभी भी मजबूत बनी हुई है। केंद्रीय बैंकों की खरीदारी, महंगाई की चिंता और वैश्विक अनिश्चितता सोने को समर्थन दे सकती है।
हालांकि 1.70 लाख रुपये का स्तर पार करना पूरी तरह बाजार की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। यह निश्चित नहीं कहा जा सकता कि सोना कब और कितना ऊपर जाएगा।