महंगा सोना, घटे खरीदार; खर्च फिर भी रिकॉर्ड पर

Update: 2026-07-31 06:10 GMT

नई दिल्ली। देश में सोने की मांग में चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही में गिरावट दर्ज की गई है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (WGC) की ओर से गुरुवार को जारी ‘गोल्ड डिमांड ट्रेंड्स Q2 2026’ रिपोर्ट के अनुसार, दूसरी तिमाही में भारत में सोने की मांग मात्रा के लिहाज से 6 प्रतिशत घटकर 131 टन रह गई। रिपोर्ट के मुताबिक, रिकॉर्ड ऊंची कीमतें, अधिक आयात शुल्क और खरीदारी के लिए कमजोर मौसमी परिस्थितियां इसकी प्रमुख वजह रहीं।

हालांकि, मांग में कमी के बावजूद सोने पर ग्राहकों का खर्च काफी बढ़ गया। सोने की ऊंची कीमतों के कारण अप्रैल-जून तिमाही में कुल सोने की मांग का मूल्य रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। रिपोर्ट के अनुसार, इस दौरान भारतीय उपभोक्ताओं ने सोने पर करीब 1.98 लाख करोड़ रुपये (21 अरब डॉलर) खर्च किए, जो पिछले साल की समान अवधि में दर्ज 1.32 लाख करोड़ रुपये की तुलना में लगभग 50 प्रतिशत अधिक है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सोने की मांग में आई गिरावट उपभोक्ताओं की रुचि कम होने का संकेत नहीं है, बल्कि यह बढ़ी हुई कीमतों के कारण खरीदारी के तरीके में आए बदलाव को दर्शाती है। सोने के भाव में साल-दर-साल करीब 60 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी ने ग्राहकों को अपनी खरीदारी की रणनीति बदलने के लिए मजबूर किया।

रिपोर्ट के अनुसार, ग्राहकों ने अधिक वजन वाले आभूषणों की जगह हल्के गहनों को प्राथमिकता दी। इसके अलावा कम कैरेट वाले सोने, जड़ाऊ यानी स्टडेड ज्वेलरी और पुराने गहनों के बदले नए गहने लेने वाले एक्सचेंज कार्यक्रमों का चलन भी बढ़ा।

अप्रैल-जून तिमाही की शुरुआत में अक्षय तृतीया और शादी-विवाह के सीजन ने सोने की मांग को सहारा दिया। भारत में अक्षय तृतीया को सोना खरीदने के लिए शुभ अवसर माना जाता है और इस दौरान बड़ी संख्या में लोग आभूषण तथा निवेश के लिए सोना खरीदते हैं। इसी तरह शादियों के मौसम में भी सोने की खरीदारी बढ़ जाती है।

हालांकि, मई के मध्य के बाद सोने की मांग में गिरावट देखने को मिली। इसके पीछे कई कारण रहे। रिपोर्ट में बताया गया कि आयात शुल्क में बढ़ोतरी, विवाह के लिए एक महीने के अशुभ समय और सोने के आयात को कम करने की सरकार की अपील ने बाजार की धारणा को प्रभावित किया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से हाल में सोने के आयात को कम करने की अपील भी बाजार के लिए एक महत्वपूर्ण कारक रही। भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना आयातक देशों में शामिल है और घरेलू मांग को पूरा करने के लिए बड़ी मात्रा में सोने का आयात किया जाता है। आयात में कमी लाने के लिए सरकार लगातार कदम उठाती रही है।

सोने की कीमतों में लगातार तेजी ने निवेशकों और आम खरीदारों दोनों को प्रभावित किया है। जहां कुछ लोगों ने ऊंची कीमतों का फायदा उठाने के लिए निवेश किया, वहीं आम ग्राहकों ने बजट के अनुसार छोटी मात्रा में खरीदारी करना पसंद किया।

ज्वेलरी कारोबार से जुड़े लोगों के अनुसार, बाजार में ग्राहकों की संख्या बनी हुई है, लेकिन खरीदारी का पैटर्न बदल गया है। पहले जहां लोग भारी आभूषणों की ओर अधिक आकर्षित होते थे, वहीं अब हल्के और कम कीमत वाले डिजाइन ज्यादा पसंद किए जा रहे हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, भारत में सोने की मांग आने वाले महीनों में भी कीमतों, वैश्विक बाजार की स्थिति और घरेलू आर्थिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगी। यदि कीमतों में स्थिरता आती है तो त्योहारी और शादी के सीजन में मांग में सुधार की संभावना है।

सोना भारतीय परिवारों के लिए केवल आभूषण नहीं, बल्कि पारंपरिक निवेश का भी माध्यम माना जाता है। शादी, त्योहार और धार्मिक अवसरों पर इसकी खरीदारी का विशेष महत्व रहता है। यही वजह है कि कीमतों में भारी बढ़ोतरी के बावजूद सोने की मांग पूरी तरह कमजोर नहीं हुई है।

WGC की रिपोर्ट यह संकेत देती है कि भारतीय उपभोक्ता ऊंची कीमतों के दौर में भी सोने से दूरी नहीं बना रहे हैं, बल्कि अपनी खरीदारी की आदतों में बदलाव कर रहे हैं। आने वाले समय में बाजार की दिशा सोने की कीमतों और आर्थिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।

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