ग्लोबल क्लाइमेट फंडिंग में गिरावट

Update: 2026-07-04 12:19 GMT

Business: विश्व बैंक ने जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए तय किया गया 45 प्रतिशत क्लाइमेट फाइनेंस लक्ष्य वापस ले लिया है। यह फैसला अमेरिका के दबाव के बाद लिया गया बताया जा रहा है। यह लक्ष्य COP-28 में घोषित किया गया था, जिसके तहत विश्व बैंक को अपनी कुल वार्षिक ऋण राशि का 45 प्रतिशत हिस्सा जलवायु संबंधी परियोजनाओं के लिए देना था। फ्रांस और कई यूरोपीय देशों ने इस लक्ष्य को बनाए रखने का समर्थन किया, लेकिन अमेरिकी दबाव के कारण विश्व बैंक ने इसे समाप्त कर दिया। हालांकि, क्लाइमेट चेंज एक्शन प्लान (CCAP) को आगे बढ़ा दिया गया है।

इस फैसले से COP-29 और COP-30 के तहत 1.3 ट्रिलियन डॉलर के वैश्विक क्लाइमेट फंड जुटाने के रोडमैप पर असर पड़ सकता है। वर्ष 2024 में सभी बहुपक्षीय विकास बैंकों ने मिलकर 137 बिलियन डॉलर का क्लाइमेट फाइनेंस दिया था, जिसमें सबसे बड़ी हिस्सेदारी विश्व बैंक की थी। भारत पर इसका असर विशेष रूप से क्लाइमेट एडाप्टेशन परियोजनाओं पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में सौर और पवन ऊर्जा जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए निजी निवेश उपलब्ध हो सकता है, लेकिन बाढ़ नियंत्रण, गर्मी से सुरक्षा, जल संरक्षण और जलवायु-समर्थ कृषि जैसे प्रोजेक्ट्स के लिए रियायती फंडिंग पर असर पड़ेगा।

कई विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला विकासशील देशों के लिए चिंता बढ़ाने वाला है, क्योंकि जलवायु आपदाओं से निपटने वाले प्रोजेक्ट्स सीधे तौर पर प्रभावित हो सकते हैं। कुछ विशेषज्ञों ने सुझाव दिया है कि वैश्विक संस्थानों पर निर्भरता कम कर क्षेत्रीय स्तर पर एशियन ग्रीन फाइनेंस जैसे फंड विकसित किए जाने चाहिए। वहीं दूसरी ओर, कुछ विश्लेषकों का कहना है कि यह बदलाव वैश्विक प्राथमिकताओं में परिवर्तन और जीवाश्म ईंधन लॉबी के प्रभाव को भी दर्शाता है। कुल मिलाकर, इस फैसले से वैश्विक जलवायु वित्त व्यवस्था पर अनिश्चितता बढ़ी है और विकासशील देशों के लिए फंडिंग की चुनौती और गंभीर हो सकती है।

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