2025 में एफपीआइ ने निकाला 1.58 लाख करोड़ रुपये, शेयर Market पर दबाव

Update: 2025-12-28 17:27 GMT
Business बिजनेस: विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआइ) ने साल 2025 में अब तक भारतीय शेयर बाजार से 1.58 लाख करोड़ रुपये की निकासी की है। यह अब तक की सबसे बड़ी एफपीआइ निकासी मानी जा रही है और इसके कारण भारतीय शेयर बाजार पर दबाव देखा गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस रिकॉर्ड निकासी के पीछे कई प्रमुख कारण हैं। सबसे बड़ा कारण भारतीय रुपये में उतार-चढ़ाव रहा। विदेशी निवेशक इस अस्थिर मुद्रा के चलते अपने निवेश को लेकर सतर्क रहे। इसके अलावा, वैश्विक व्यापार तनाव और अमेरिकी टैरिफ से जुड़ी अनिश्चितता ने निवेशकों के रुख को प्रभावित किया। उच्च मूल्यांकन के कारण भी एफपीआइ ने कम जोखिम वाले विकल्पों की ओर रुख किया।
विशेषज्ञों के अनुसार, विदेशी निवेशकों की निकासी का असर भारतीय शेयर बाजार में प्रमुख सूचकांकों पर देखा गया। यह निकासी विशेष रूप से वित्तीय, आईटी और उपभोक्ता क्षेत्र के शेयरों में अधिक रही। इसके चलते बाजार में निवेशकों का भरोसा थोड़ा कमजोर हुआ और शेयरों में अस्थिरता देखने को मिली।
हालांकि, विशेषज्ञों का अनुमान है कि 2026 में एफपीआइ निवेश धीरे-धीरे सकारात्मक हो सकता है। वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों में सु
धार और भारतीय शेयर बाजार में स्थिरता आने से विदेशी निवेशकों का रुझान फिर से निवेश की ओर बढ़ सकता है। इसके साथ ही घरेलू निवेशकों का योगदान भी बाजार को सहारा देने में महत्वपूर्ण होगा।
विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि विदेशी निवेश की निकासी से डरने की जरूरत नहीं है। भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव और सुधारित नीतियां लंबी अवधि में निवेशकों को आकर्षित कर सकती हैं। इसके लिए सरकार और रेगुलेटरी संस्थाओं की सक्रिय भूमिका महत्वपूर्ण होगी।
वित्तीय विश्लेषकों का कहना है कि निवेशकों को इस समय सतर्क रहना चाहिए, लेकिन दीर्घकालिक दृष्टिकोण से भारतीय शेयर बाजार अभी भी आकर्षक निवेश विकल्प प्रदान करता है। एफपीआइ के प्रवाह में उतार-चढ़ाव सामान्य आर्थिक और वैश्विक परिस्थितियों का हिस्सा है।
कुल मिलाकर, 2025 में एफपीआइ की यह रिकॉर्ड निकासी भारतीय शेयर बाजार की अस्थिरता और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों को दर्शाती है। हालांकि, 2026 में सुधार की संभावना बनी हुई है और निवेशकों को दीर्घकालिक रणनीति अपनाने की सलाह दी जा रही है।
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