IAS का सपना टूटा बिजनेस डूबा फिर खड़ी कर दी 95000 करोड़ की कंपनी
पहली हार के बाद बदली किस्मत इस शख्स ने बनाई अरबों की कंपनी
नई दिल्ली: सफलता की राह हमेशा आसान नहीं होती। कई बार असफलताएं ही इंसान को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं। ऐसी ही कहानी है विदित आत्रेय की, जिन्होंने कभी आईएएस अधिकारी बनने का सपना देखा था, लेकिन असफल रहे। इसके बाद उन्होंने बिजनेस की दुनिया में कदम रखा, जहां उनका पहला प्रयास भी सफल नहीं हुआ। मगर उन्होंने हार नहीं मानी और आगे चलकर ऐसी कंपनी खड़ी कर दी, जिसने भारत के ई-कॉमर्स बाजार में अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसी बड़ी कंपनियों को चुनौती दी।
विदित आत्रेय आज भारत की चर्चित ई-कॉमर्स कंपनी मीशो के को-फाउंडर और सीईओ के रूप में जाने जाते हैं। उनकी कहानी संघर्ष, धैर्य और सही मौके को पहचानने की मिसाल मानी जाती है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत एक अलग लक्ष्य के साथ की थी, लेकिन परिस्थितियों ने उन्हें उद्यमिता की राह पर ला खड़ा किया।
आईएएस बनने का सपना लेकर तैयारी करने वाले विदित आत्रेय को सिविल सेवा परीक्षा में सफलता नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने नौकरी और बिजनेस के विकल्पों पर विचार किया। उन्होंने पहला बिजनेस शुरू किया, लेकिन वह भी ज्यादा समय तक नहीं चल सका। इस असफलता ने उन्हें पीछे हटने के बजाय नई सोच के साथ आगे बढ़ने का हौसला दिया। इसके बाद विदित ने अपने साथी संजीव बर्नवाल के साथ मिलकर मीशो की शुरुआत की। कंपनी की शुरुआत छोटे कारोबारियों और सोशल कॉमर्स मॉडल पर केंद्रित थी। मीशो ने उन लोगों को ऑनलाइन कारोबार से जोड़ने का प्रयास किया, जो पारंपरिक तरीके से व्यापार करते थे लेकिन डिजिटल प्लेटफॉर्म से दूर थे।
मीशो ने धीरे-धीरे भारतीय बाजार में अपनी मजबूत पहचान बनाई। कंपनी ने छोटे शहरों और कस्बों के ग्राहकों तक पहुंच बनाई और लाखों विक्रेताओं को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराया। इसके चलते मीशो देश के बड़े ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म में शामिल हो गई। आज मीशो को भारत के सबसे बड़े ऑनलाइन मार्केटप्लेस में गिना जाता है। कंपनी की वैल्यूएशन करीब 95 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचने की चर्चा रही है। इस सफलता ने विदित आत्रेय को देश के प्रमुख युवा उद्यमियों में शामिल कर दिया है।
विदित की सफलता का सबसे बड़ा कारण ग्राहकों की जरूरत को समझना और छोटे व्यापारियों को डिजिटल बाजार से जोड़ना माना जाता है। जहां बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियां बड़े शहरों पर ज्यादा ध्यान दे रही थीं, वहीं मीशो ने छोटे शहरों और मध्यम वर्ग के ग्राहकों को अपना केंद्र बनाया। उनकी यात्रा यह संदेश देती है कि किसी एक परीक्षा या शुरुआती असफलता से जिंदगी की दिशा तय नहीं होती। सही सोच, मेहनत और लगातार प्रयास से असफलताओं को सफलता में बदला जा सकता है।
आज जिस व्यक्ति ने कभी आईएएस बनने का सपना देखा था और शुरुआती बिजनेस में असफलता झेली, वही व्यक्ति हजारों करोड़ रुपये की कंपनी का नेतृत्व कर रहा है। विदित आत्रेय की कहानी युवाओं के लिए प्रेरणा है कि असफलता अंत नहीं, बल्कि नई शुरुआत का मौका हो सकती है।