नई दिल्ली : अगर आपने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) अभी तक दाखिल नहीं किया है तो परेशान होने की जरूरत नहीं है। इस बार सभी टैक्सपेयर्स के लिए ITR जमा करने की आखिरी तारीख एक जैसी नहीं रखी गई है। फाइनेंस एक्ट 2026 के तहत असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए टैक्स रिटर्न दाखिल करने का नया कैलेंडर लागू किया गया है। इसके तहत टैक्सपेयर्स की अलग-अलग कैटेगरी के हिसाब से डेडलाइन तय की गई है।टैक्स विशेषज्ञों के अनुसार, सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि आप किस श्रेणी के टैक्सपेयर हैं। इसी आधार पर यह तय होगा कि आपको किस तारीख तक ITR दाखिल करना है। अगर आपकी तय समय सीमा निकल गई है तो भी आप बिलेटेड रिटर्न दाखिल कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए अतिरिक्त शुल्क और कुछ नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।
31 जुलाई की डेडलाइन किन लोगों के लिए थी?
31 जुलाई 2026 की आखिरी तारीख उन टैक्सपेयर्स के लिए थी, जिनकी आय सैलरी, पेंशन या अन्य सामान्य स्रोतों से आती है और जिनके खातों का टैक्स ऑडिट कराना जरूरी नहीं होता। इसमें बड़ी संख्या में नौकरीपेशा लोग शामिल होते हैं।अगर ऐसे टैक्सपेयर समय पर ITR दाखिल नहीं कर पाए हैं तो वे अब भी बिलेटेड रिटर्न दाखिल कर सकते हैं। हालांकि, उन्हें लेट फीस जमा करनी होगी। इसके अलावा बकाया टैक्स पर ब्याज भी देना पड़ सकता है। समय पर रिटर्न दाखिल नहीं करने से रिफंड मिलने में देरी हो सकती है और कुछ मामलों में नुकसान को आगे बढ़ाने यानी लॉस कैरी फॉरवर्ड करने का लाभ भी नहीं मिल पाएगा।
बिजनेस और प्रोफेशनल्स के लिए 31 अगस्त तक मौका
नए नियमों के तहत बिजनेस या प्रोफेशन से जुड़े उन टैक्सपेयर्स को राहत दी गई है, जिनके खातों का टैक्स ऑडिट जरूरी नहीं है। ऐसे लोगों के लिए ITR दाखिल करने की आखिरी तारीख 31 अगस्त 2026 तय की गई है।इस कैटेगरी में वे कारोबारी और प्रोफेशनल आते हैं जो सेक्शन 44AD, 44ADA और 44AE के तहत अनुमानित कराधान योजना (Presumptive Taxation Scheme) का लाभ लेते हैं। आमतौर पर ऐसे टैक्सपेयर्स ITR-3 या ITR-4 फॉर्म भरते हैं।
ऑडिट वाले टैक्सपेयर्स को 31 अक्टूबर तक समय
जिन कारोबारियों और प्रोफेशनल्स के खातों का इनकम टैक्स एक्ट या किसी अन्य कानून के तहत ऑडिट जरूरी होता है, उनके लिए ITR दाखिल करने की अंतिम तारीख 31 अक्टूबर 2026 रखी गई है।इसमें वे कंपनियां, कारोबारी और प्रोफेशनल शामिल हैं, जिनके लिए टैक्स ऑडिट रिपोर्ट जमा करना अनिवार्य होता है। ऐसे टैक्सपेयर्स को ऑडिट प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही रिटर्न दाखिल करना होता है।
ट्रांसफर प्राइसिंग वालों को 30 नवंबर तक मौका
जिन टैक्सपेयर्स पर ट्रांसफर प्राइसिंग नियम लागू होते हैं, उनके लिए सबसे ज्यादा समय दिया गया है। ऐसे टैक्सपेयर्स को 30 नवंबर 2026 तक ITR दाखिल करने की अनुमति होगी।ट्रांसफर प्राइसिंग आमतौर पर उन कंपनियों और संस्थाओं पर लागू होती है, जिनके अंतरराष्ट्रीय या कुछ विशेष घरेलू लेन-देन होते हैं और जिन्हें अलग रिपोर्ट जमा करनी पड़ती है।
डेडलाइन चूकने पर क्या होगा?
अगर कोई टैक्सपेयर अपनी निर्धारित तारीख तक ITR दाखिल नहीं कर पाता है तो वह 31 दिसंबर 2026 तक बिलेटेड रिटर्न जमा कर सकता है। हालांकि, इसमें लेट फीस, ब्याज और अन्य नुकसान जुड़े हो सकते हैं।इसके अलावा सरकार ने रिवाइज्ड रिटर्न दाखिल करने की समय सीमा भी बढ़ाई है। अब टैक्सपेयर 31 मार्च 2027 तक अपनी गलतियों को सुधारने के लिए संशोधित रिटर्न दाखिल कर सकते हैं। वहीं अपडेटेड रिटर्न यानी ITR-U दाखिल करने की समय सीमा को 24 महीने से बढ़ाकर 48 महीने कर दिया गया है।
ITR भरने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
टैक्स रिटर्न दाखिल करने से पहले टैक्सपेयर्स को अपने फॉर्म 26AS, AIS यानी Annual Information Statement और TIS यानी Taxpayer Information Summary की जानकारी जरूर जांच लेनी चाहिए। इसमें दर्ज आय और टैक्स से जुड़ी जानकारी का मिलान करना जरूरी है।अगर कोई टैक्स बकाया है तो पहले उसका भुगतान करें। रिटर्न जमा करने के बाद ई-वेरिफिकेशन करना भी अनिवार्य है। ऐसा करने से रिफंड मिलने की प्रक्रिया आसान होती है और भविष्य में टैक्स नोटिस जैसी परेशानियों से बचा जा सकता है।