8वें वेतन आयोग से पहले समझिए फिटमेंट फैक्टर का इतिहास, कितनी बढ़ी थी सैलरी?

Update: 2026-08-06 09:55 GMT
बिजनेस :केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए 8वें वेतन आयोग को लेकर चर्चाएं लगातार तेज होती जा रही हैं। सबसे अधिक चर्चा जिस मुद्दे पर हो रही है, वह है **फिटमेंट फैक्टर**। यही वह महत्वपूर्ण पैमाना है, जिसके आधार पर यह तय होगा कि कर्मचारियों के मूल वेतन (बेसिक सैलरी) में कितनी बढ़ोतरी होगी। पिछले वेतन आयोगों के अनुभव और मौजूदा मांगों को देखते हुए लाखों कर्मचारियों को उम्मीद है कि इस बार भी वेतन में बड़ा इजाफा हो सकता है।
फिटमेंट फैक्टर वह गुणांक होता है, जिससे वर्तमान मूल वेतन को गुणा करके नया मूल वेतन निर्धारित किया जाता है। इसलिए इसकी दर जितनी अधिक होगी, कर्मचारियों की सैलरी में बढ़ोतरी भी उतनी ही ज्यादा होगी। यही कारण है कि कर्मचारी संगठन लंबे समय से फिटमेंट फैक्टर बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।
अगर पिछले वेतन आयोगों के इतिहास पर नजर डालें तो छठे केंद्रीय वेतन आयोग में प्रभावी फिटमेंट लाभ लगभग **1.86** था। इसके बाद लागू हुए सातवें वेतन आयोग ने **2.57** का फिटमेंट फैक्टर निर्धारित किया था। इसी आधार पर केंद्र सरकार के कर्मचारियों का न्यूनतम मूल वेतन **7,000 रुपये से बढ़ाकर 18,000 रुपये** कर दिया गया था। इस बदलाव से लाखों कर्मचारियों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई थी।
यही इतिहास अब कर्मचारियों की उम्मीदों को और मजबूत कर रहा है। कर्मचारी संगठनों का मानना है कि आठवें वेतन आयोग में भी फिटमेंट फैक्टर बढ़ाकर कर्मचारियों को महंगाई और बढ़ती जीवन-यापन लागत से राहत दी जानी चाहिए। कई कर्मचारी संगठन **3.68** के फिटमेंट फैक्टर की मांग कर रहे हैं। यदि ऐसा होता है तो कर्मचारियों के वेतन में बड़ी बढ़ोतरी संभव मानी जा रही है।
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि आयोग केवल कर्मचारियों की मांगों को ध्यान में रखकर फैसला नहीं करेगा। फिटमेंट फैक्टर तय करते समय सरकार की वित्तीय स्थिति, मुद्रास्फीति, आर्थिक विकास, राजकोषीय भार और जीवन-यापन की लागत जैसे कई महत्वपूर्ण पहलुओं का विस्तृत अध्ययन किया जाएगा। इसलिए अंतिम सिफारिश कर्मचारियों की अपेक्षाओं और सरकारी वित्तीय क्षमता के बीच संतुलन बनाकर ही तैयार की जाएगी।
वित्त मंत्रालय ने आयोग की समयसीमा को लेकर भी स्थिति स्पष्ट कर दी है। मंत्रालय के अनुसार, **8वें केंद्रीय वेतन आयोग का गठन 3 नवंबर 2025** को किया गया था। गठन संबंधी अधिसूचना में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि आयोग अपनी सिफारिशें **18 महीने के भीतर** केंद्र सरकार को सौंपेगा। इस आधार पर आयोग की अंतिम रिपोर्ट **2027 के मध्य**, यानी लगभग **मई-जून 2027** तक आने की संभावना है।
आयोग की अध्यक्षता **न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई** कर रही हैं। उन्हें और उनकी टीम को सभी पहलुओं का अध्ययन कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है। रिपोर्ट मिलने के बाद केंद्र सरकार उसकी समीक्षा करेगी और फिर सिफारिशों को लागू करने या उनमें बदलाव करने पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
इस प्रक्रिया के दौरान केवल फिटमेंट फैक्टर ही नहीं, बल्कि वार्षिक वेतन वृद्धि (एनुअल इंक्रीमेंट), भत्तों, पेंशन और अन्य सेवा शर्तों की भी समीक्षा की जाएगी। कर्मचारी संगठनों की मांग है कि वार्षिक वेतन वृद्धि की दर में भी सुधार किया जाए, ताकि कर्मचारियों की आय महंगाई के अनुरूप बनी रहे। हालांकि इस संबंध में अंतिम फैसला आयोग की सिफारिशों पर ही निर्भर करेगा।
वित्त मंत्रालय के अनुसार, आयोग का काम निर्धारित समयसीमा के अनुसार आगे बढ़ रहा है। गठन के बाद आयोग विभिन्न विभागों, कर्मचारी संगठनों और विशेषज्ञों से सुझाव प्राप्त कर रहा है। इसके आधार पर ही अंतिम रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
फिलहाल देशभर के लाखों केंद्रीय कर्मचारी और पेंशनभोगी आयोग की सिफारिशों का इंतजार कर रहे हैं। यदि फिटमेंट फैक्टर में उल्लेखनीय वृद्धि होती है और वार्षिक वेतन वृद्धि को भी संशोधित किया जाता है, तो इसका सीधा लाभ लाखों कर्मचारियों और उनके परिवारों को मिलेगा। हालांकि अभी तक सरकार या आयोग की ओर से फिटमेंट फैक्टर की किसी निश्चित दर की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। ऐसे में कर्मचारियों को अंतिम निर्णय के लिए आयोग की रिपोर्ट और सरकार की मंजूरी का इंतजार करना होगा।
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