बिजनेस : सोने की कीमतों में लगातार गिरावट देखने को मिल रही है। हाल के दिनों में रिकॉर्ड स्तरों पर पहुंचने के बाद अब सोने के भाव में नरमी आई है। निवेशकों की मुनाफावसूली, अमेरिकी डॉलर में मजबूती और वैश्विक बाजारों में बदलते हालात के कारण गोल्ड की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। भारत में भी सोने के दामों में गिरावट दर्ज की गई है।
सोमवार को घरेलू बाजार में सोने की कीमतों में गिरावट का असर देखने को मिला। 24 कैरेट सोने का भाव कई जगहों पर करीब 1.42 लाख से 1.52 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास कारोबार करता नजर आया। बाजार में उतार-चढ़ाव के कारण अलग-अलग शहरों में कीमतों में थोड़ा अंतर हो सकता है।
क्यों गिर रहे हैं सोने के दाम?
सोने की कीमतों में गिरावट के पीछे कई बड़े कारण बताए जा रहे हैं। सबसे बड़ा कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों पर दबाव है।
अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर बढ़ती उम्मीदों और डॉलर की मजबूती ने सोने को कमजोर किया है। आमतौर पर जब ब्याज दरें बढ़ने की संभावना बढ़ती है तो निवेशक सोने की जगह अन्य विकल्पों की ओर जाते हैं, जिससे गोल्ड की मांग प्रभावित होती है।
इसके अलावा पिछले कुछ समय में सोने की कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई थी। ऐसे में कई निवेशकों ने मुनाफा निकालना शुरू कर दिया, जिसका असर कीमतों पर पड़ा।
रिकॉर्ड तेजी के बाद आई गिरावट
पिछले कुछ महीनों में सोने ने जबरदस्त तेजी दिखाई थी। वैश्विक तनाव, महंगाई की चिंता और सुरक्षित निवेश के रूप में बढ़ती मांग के कारण सोने में तेजी आई थी।
लेकिन अब बाजार में थोड़ी स्थिरता आने के बाद कीमतों में सुधार देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी बड़े उछाल के बाद बाजार में करेक्शन आना सामान्य प्रक्रिया है।
सोने में गिरावट का मतलब यह नहीं है कि इसकी मांग खत्म हो गई है। लंबे समय में सोने को अब भी सुरक्षित निवेश विकल्प माना जाता है।
शादी और त्योहारों के सीजन में खरीदारों के लिए मौका
भारत में सोने की खरीदारी का बड़ा हिस्सा शादी और त्योहारों से जुड़ा होता है। ऐसे में कीमतों में गिरावट से ग्राहकों को राहत मिल सकती है।
जो लोग लंबे समय से सोना खरीदने की योजना बना रहे थे, वे गिरावट के समय बाजार पर नजर रख रहे हैं। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि केवल कीमत कम होने के आधार पर खरीदारी का फैसला नहीं करना चाहिए।
खरीदारी से पहले शुद्धता, मेकिंग चार्ज और बाजार की स्थिति को समझना जरूरी है।
22 कैरेट और 24 कैरेट सोने में अंतर
भारत में आमतौर पर दो तरह का सोना ज्यादा खरीदा जाता है।
24 कैरेट सोना
यह सबसे शुद्ध सोना होता है और इसमें लगभग 99.9 प्रतिशत शुद्धता होती है। इसका इस्तेमाल ज्यादातर निवेश के लिए किया जाता है।
22 कैरेट सोना
इसमें अन्य धातुओं को मिलाया जाता है, जिससे यह ज्यादा मजबूत होता है। इसलिए गहने बनाने में 22 कैरेट सोने का इस्तेमाल अधिक होता है।
आज के बाजार में 22 और 24 कैरेट सोने की कीमतों में अंतर बना रहता है।
क्या अभी सोना खरीदना सही समय है?
सोने की कीमतों में गिरावट के बाद कई लोगों के मन में सवाल है कि क्या अभी खरीदारी करनी चाहिए।
विशेषज्ञों के अनुसार, अगर किसी व्यक्ति का उद्देश्य लंबे समय के लिए निवेश करना है तो वह धीरे-धीरे खरीदारी कर सकता है। एक साथ बड़ी रकम लगाने के बजाय चरणों में निवेश करना बेहतर रणनीति हो सकती है।
वहीं, अगर गहने खरीदने हैं तो ग्राहक को सोने के भाव के साथ-साथ मेकिंग चार्ज और अन्य शुल्कों पर भी ध्यान देना चाहिए।
आगे क्या हो सकता है सोने का भाव?
सोने की कीमतों की दिशा आने वाले दिनों में कई वैश्विक घटनाओं पर निर्भर करेगी। अमेरिकी ब्याज दरों का फैसला, डॉलर की चाल, अंतरराष्ट्रीय तनाव और केंद्रीय बैंकों की खरीदारी सोने के भाव को प्रभावित कर सकती है।
अगर वैश्विक अनिश्चितता बढ़ती है तो सोने में फिर तेजी आ सकती है। वहीं, ब्याज दरों में बढ़ोतरी और डॉलर मजबूत रहने की स्थिति में कीमतों पर दबाव बना रह सकता है।
निवेशकों को क्या करना चाहिए?
सोने में निवेश करने वालों को कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए—
* केवल कीमत देखकर निवेश न करें।
* अपनी जरूरत और लक्ष्य के हिसाब से खरीदारी करें।
* गहनों की खरीद में BIS हॉलमार्क जरूर जांचें।
* निवेश के लिए गोल्ड ETF और डिजिटल गोल्ड जैसे विकल्पों को भी समझें।
* बाजार की स्थिति पर नजर बनाए रखें।
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