बिजनेस : सोने और चांदी की कीमतों को लेकर बाजार में एक बार फिर बड़ी तेजी की चर्चा शुरू हो गई है। एक रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि अगर वैश्विक हालात अनुकूल रहे तो सोने की कीमत साल के अंत तक 5,600 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती है। वहीं चांदी भी तेजी के दौर में 120 डॉलर प्रति औंस के स्तर को छू सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, सोने की कीमतों में तेजी के पीछे कई बड़े कारण काम कर रहे हैं। दुनियाभर में बढ़ती आर्थिक अनिश्चितता, महंगाई की चिंता, केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और भू-राजनीतिक तनाव जैसे कारण निवेशकों को सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर आकर्षित कर रहे हैं। सोना परंपरागत रूप से संकट के समय सबसे भरोसेमंद संपत्तियों में शामिल रहा है।
रिपोर्ट के बुल केस अनुमान के मुताबिक, यदि वैश्विक बाजार में जोखिम बढ़ता है और निवेशकों का भरोसा डॉलर समेत अन्य परिसंपत्तियों से कम होता है, तो सोने में बड़ी तेजी देखने को मिल सकती है। इस स्थिति में सोना 5,600 डॉलर प्रति औंस के स्तर तक पहुंचने की क्षमता रखता है। इसी तरह औद्योगिक मांग और निवेश मांग बढ़ने से चांदी के 120 डॉलर प्रति औंस तक जाने का अनुमान लगाया गया है।
केंद्रीय बैंकों की खरीदारी बनी बड़ा सहारा
सोने की कीमतों को मजबूती देने वाले सबसे बड़े कारणों में केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीदारी शामिल है। कई देश अपने विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं ताकि डॉलर पर निर्भरता कम की जा सके। इससे वैश्विक स्तर पर सोने की मांग को समर्थन मिल रहा है।
इसके अलावा अमेरिका सहित कई बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता भी सोने के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है। आमतौर पर ब्याज दरों में कमी या दरों में नरमी की उम्मीद सोने को फायदा पहुंचाती है क्योंकि निवेशकों की नजर सुरक्षित परिसंपत्तियों पर जाती है।
चांदी में तेजी के पीछे औद्योगिक मांग
चांदी केवल निवेश की धातु नहीं है बल्कि इसका इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक वाहन और कई औद्योगिक क्षेत्रों में भी होता है। बढ़ती तकनीकी मांग के कारण चांदी की कीमतों में भी तेजी की संभावना जताई जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वैश्विक अर्थव्यवस्था में औद्योगिक गतिविधियां मजबूत रहती हैं और निवेशकों की दिलचस्पी बनी रहती है तो चांदी सोने से भी तेज रफ्तार पकड़ सकती है।
डॉलर और महंगाई का रहेगा असर
सोने की कीमतों पर अमेरिकी डॉलर की मजबूती और कमजोरी का सीधा असर पड़ता है। डॉलर कमजोर होने पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना खरीदना आसान हो जाता है, जिससे मांग बढ़ सकती है। वहीं महंगाई बढ़ने की स्थिति में भी निवेशक सोने को मूल्य बचाने के साधन के रूप में देखते हैं।
हालांकि बाजार विशेषज्ञ यह भी चेतावनी देते हैं कि सोना और चांदी दोनों ही उच्च स्तर पर पहुंचने के बाद उतार-चढ़ाव का सामना कर सकते हैं। ब्याज दरों में बदलाव, डॉलर की स्थिति और वैश्विक राजनीतिक घटनाएं कीमतों की दिशा तय करेंगी।
निवेशकों के लिए क्या संकेत
सोने और चांदी में तेजी की संभावनाओं के बीच निवेशकों को जल्दबाजी में बड़ा निवेश करने से बचने की सलाह दी जाती है। बाजार में तेजी के साथ गिरावट का जोखिम भी बना रहता है। विशेषज्ञों के अनुसार, लंबी अवधि के निवेशक अपनी जोखिम क्षमता के अनुसार धीरे-धीरे निवेश करने की रणनीति अपना सकते हैं।
कुल मिलाकर, सोने और चांदी के लिए आने वाला समय काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अगर वैश्विक तनाव, महंगाई और आर्थिक अनिश्चितता बनी रहती है तो कीमती धातुओं में नई ऊंचाई देखने को मिल सकती है।
Tags: