बिज़नेस : भारतीय शेयर बाजार में टेलीकॉम सेक्टर की दो दिग्गज कंपनियों के बीच बाजार पूंजीकरण को लेकर जबरदस्त मुकाबला देखने को मिल रहा है। सुनील भारती मित्तल की भारती एयरटेल ने मुकेश अंबानी की जियो प्लेटफॉर्म्स को पीछे छोड़कर देश की दूसरी सबसे मूल्यवान सूचीबद्ध कंपनी का स्थान हासिल कर लिया है। शुक्रवार, 6 नवंबर को शेयर बाजार में भारती एयरटेल के शेयरों में तेजी देखने को मिली, जबकि जियो प्लेटफॉर्म्स के शेयरों पर दबाव रहा। इस बदलाव के पीछे भारती एयरटेल के सितंबर तिमाही के नतीजों और शेयरों की कीमतों में आई हलचल को प्रमुख कारण माना जा रहा है। हालांकि बाजार पूंजीकरण के आधार पर दोनों कंपनियों की रैंकिंग शेयरों की कीमतों के साथ लगातार बदल सकती है।
दिलचस्प बात यह है कि महज नौ दिन पहले यानी 28 अक्टूबर को जियो प्लेटफॉर्म्स ने शेयर बाजार में शानदार शुरुआत की थी। लिस्टिंग के साथ ही कंपनी देश की दूसरी सबसे मूल्यवान सूचीबद्ध कंपनी बन गई थी। उस समय जियो प्लेटफॉर्म्स ने भारती एयरटेल को पीछे छोड़ दिया था। लेकिन अब भारती एयरटेल के शेयरों में तेजी के बाद बाजार मूल्यांकन की यह तस्वीर बदल गई है।
जियो प्लेटफॉर्म्स की 28 अक्टूबर को शेयर बाजार में लिस्टिंग हुई थी। कंपनी का आईपीओ इश्यू प्राइस 1,119 रुपये प्रति शेयर रखा गया था, जबकि शेयर 1,358 रुपये पर सूचीबद्ध हुआ। यानी लिस्टिंग के समय निवेशकों को लगभग 21.4 प्रतिशत का प्रीमियम मिला। शानदार शुरुआत के साथ जियो प्लेटफॉर्म्स का बाजार पूंजीकरण लगभग 12.5 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया था। इस उपलब्धि के बाद कंपनी ने भारती एयरटेल को पीछे छोड़ते हुए देश की दूसरी सबसे मूल्यवान कंपनी का स्थान प्राप्त किया था।
लिस्टिंग के पहले दिन जियो प्लेटफॉर्म्स के शेयरों में निवेशकों की मजबूत दिलचस्पी देखने को मिली थी। कारोबार के अंत में कंपनी का बाजार मूल्यांकन लगभग 13 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया था। इससे रिलायंस समूह के कुल बाजार मूल्यांकन को भी मजबूती मिली थी। हालांकि शेयर बाजार में किसी भी कंपनी का मूल्यांकन स्थायी नहीं होता और उसके शेयरों की कीमतों में उतार-चढ़ाव के साथ बाजार पूंजीकरण भी बदलता रहता है।
भारती एयरटेल ने गुरुवार, 5 नवंबर को चालू वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही यानी जुलाई से सितंबर के वित्तीय नतीजे घोषित किए। कंपनी ने सालाना आधार पर मुनाफे और राजस्व में मजबूत वृद्धि दर्ज की। सितंबर तिमाही में भारती एयरटेल का कंसॉलिडेटेड शुद्ध लाभ 31 प्रतिशत बढ़कर 8,888 करोड़ रुपये हो गया। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में कंपनी का शुद्ध लाभ 6,792 करोड़ रुपये रहा था।
कंपनी के परिचालन राजस्व में भी अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई। सितंबर तिमाही में भारती एयरटेल का राजस्व सालाना आधार पर 16.7 प्रतिशत बढ़कर 60,878 करोड़ रुपये पहुंच गया। एक साल पहले की समान अवधि में कंपनी का राजस्व 52,145 करोड़ रुपये था। कंपनी के बेहतर प्रदर्शन में भारत के मोबाइल कारोबार, घरेलू ब्रॉडबैंड सेवाओं और अफ्रीकी कारोबार की अहम भूमिका रही।
हालांकि भारती एयरटेल का मुनाफा बढ़ने के बावजूद यह कुछ विश्लेषकों के
अनुमान
से कम रहा। कंपनी के नेटवर्क संचालन खर्च और लाइसेंस शुल्क में बढ़ोतरी से कुल खर्च पर दबाव पड़ा। इसके बावजूद राजस्व वृद्धि और ग्राहकों से होने वाली औसत कमाई में सुधार सकारात्मक संकेत के रूप में सामने आए हैं।
टेलीकॉम कंपनियों के प्रदर्शन को समझने के लिए एआरपीयू (ARPU) यानी प्रति ग्राहक औसत राजस्व को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यह बताता है कि कंपनी को एक ग्राहक से औसतन कितनी कमाई हो रही है। भारती एयरटेल का एआरपीयू सितंबर तिमाही में बढ़कर 271 रुपये पहुंच गया। सालाना आधार पर इसमें लगभग छह प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
एआरपीयू बढ़ने से संकेत मिलता है कि कंपनी अपने ग्राहकों से बेहतर राजस्व हासिल कर रही है। इसके पीछे महंगे रिचार्ज प्लान चुनने वाले ग्राहकों की संख्या में वृद्धि और प्रीमियम सेवाओं की मांग जैसे कारण शामिल हैं। कंपनी लगातार अपनी मोबाइल सेवाओं के साथ ब्रॉडबैंड, डिजिटल और व्यावसायिक सेवाओं पर भी ध्यान दे रही है।
भारती एयरटेल के भारत में ग्राहकों की संख्या भी बढ़ी है। कंपनी का भारतीय ग्राहक आधार 49.87 करोड़ से अधिक हो गया है। हालांकि ग्राहक संख्या के मामले में जियो अब भी आगे है। जियो के पास लगभग 54.24 करोड़ ग्राहक हैं। इसका मतलब है कि ग्राहक संख्या में बढ़त रखने के बावजूद जियो और एयरटेल के बीच बाजार मूल्यांकन का मुकाबला अलग दिशा में चल रहा है।
शुक्रवार सुबह बाजार में भारती एयरटेल के शेयरों में तेजी दर्ज की गई। सुबह करीब 10:13 बजे कंपनी का शेयर लगभग 2,073.60 रुपये पर कारोबार कर रहा था। इसमें पिछले बंद भाव के मुकाबले करीब 0.81 प्रतिशत की बढ़त थी। उस समय कंपनी का बाजार पूंजीकरण लगभग 12.94 लाख करोड़ रुपये के आसपास था। यह कारोबार के दौरान का आंकड़ा है और अंतिम बंद भाव से अलग हो सकता है।
उधर जियो प्लेटफॉर्म्स के शेयरों में कमजोरी ने दोनों कंपनियों के बाजार मूल्यांकन के अंतर को प्रभावित किया। शेयर बाजार में कंपनियों का बाजार पूंजीकरण उनके कुल बकाया शेयरों और मौजूदा शेयर मूल्य के आधार पर निकाला जाता है। इसलिए किसी बड़ी कंपनी के शेयरों में मामूली प्रतिशत का बदलाव भी उसके कुल बाजार मूल्यांकन में हजारों करोड़ रुपये का अंतर पैदा कर सकता है।
टेलीकॉम सेक्टर में जियो और एयरटेल देश की दो प्रमुख निजी कंपनियां हैं। दोनों के बीच मोबाइल ग्राहकों, 5जी नेटवर्क, ब्रॉडबैंड सेवाओं और डिजिटल कारोबार को लेकर प्रतिस्पर्धा बनी हुई है। जियो जहां अपने विशाल ग्राहक आधार और डिजिटल सेवाओं के विस्तार पर ध्यान दे रही है, वहीं एयरटेल प्रीमियम ग्राहकों, बेहतर एआरपीयू और विभिन्न सेवाओं से राजस्व बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, टेलीकॉम कंपनियों के लिए आने वाले समय में ग्राहकों की संख्या के साथ-साथ प्रति ग्राहक कमाई, नेटवर्क विस्तार पर होने वाला खर्च और डिजिटल सेवाओं से मिलने वाला राजस्व महत्वपूर्ण रहेगा। 5जी सेवाओं का विस्तार और डेटा खपत में बढ़ोतरी दोनों कंपनियों के लिए नए अवसर पैदा कर सकती है।
जियो प्लेटफॉर्म्स ने 30 अक्टूबर को अपने सितंबर तिमाही के वित्तीय नतीजे भी घोषित किए थे। कंपनी ने तिमाही में लगभग 8,389 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया था, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के मुकाबले करीब 13.7 प्रतिशत अधिक था। इससे स्पष्ट है कि दोनों कंपनियां अपने कारोबार में वृद्धि दर्ज कर रही हैं, हालांकि शेयर बाजार में उनके मूल्यांकन की दिशा अलग-अलग हो सकती है।
फिलहाल भारती एयरटेल और जियो प्लेटफॉर्म्स के बीच देश की दूसरी सबसे मूल्यवान कंपनी बनने की प्रतिस्पर्धा निवेशकों के लिए चर्चा का विषय बनी हुई है। 28 अक्टूबर को जियो ने शानदार लिस्टिंग के साथ एयरटेल को पीछे छोड़ा था, जबकि नौ दिन बाद एयरटेल ने फिर बढ़त हासिल की। आने वाले कारोबारी सत्रों में दोनों कंपनियों के शेयरों की चाल तय करेगी कि बाजार पूंजीकरण की इस प्रतिस्पर्धा में कौन आगे रहता है।
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