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राजकोट में बाइक और जीप पर तलवार रास, महिलाओं ने मनाया नवरात्रि उत्सव

nidhi
13 Oct 2026 3:45 PM IST
राजकोट में बाइक और जीप पर तलवार रास, महिलाओं ने मनाया नवरात्रि उत्सव
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राजकोट में अनोखा नवरात्रि जश्न
गुजरात : नवरात्रि का जश्न अपने शानदार गरबा डांस, रंग-बिरंगे पारंपरिक कपड़ों और देवी दुर्गा के प्रति भक्ति के लिए जाना जाता है। लेकिन राजकोट में महिलाओं के एक ग्रुप ने 'तलवार रास' या तलवार डांस के शानदार प्रदर्शन से इस त्योहार के जोश को एक नए लेवल पर पहुँचा दिया है। इसमें पारंपरिक मार्शल आर्ट्स के साथ-साथ बाइक और जीप पर साहसी स्टंट भी दिखाए गए।
सोशल मीडिया पर इस परफॉर्मेंस के कई वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिनमें राजकोट के राजवी पैलेस (जिसे रंजीत विलास पैलेस भी कहा जाता है) में महिलाओं को गाड़ियों पर सवार होकर तलवारें चलाते हुए देखा जा सकता है। पारंपरिक कपड़ों में सजी-धजी इन महिलाओं ने बहुत सावधानी से की गई प्रैक्टिस के ज़रिए तलवार चलाने का हुनर ​​दिखाया और हिम्मत, तालमेल और सांस्कृतिक गर्व का शानदार प्रदर्शन किया।
'तलवार रास' गुजरात के क्षत्रिय और राजपूत समुदायों की मार्शल परंपराओं से जुड़ा है। नवरात्रि के दौरान किया जाने वाला यह डांस बहादुरी, अनुशासन और देवी दुर्गा के प्रति भक्ति को दिखाता है, जो शक्ति और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक हैं। यह परफॉर्मेंस उस विरासत का भी जश्न मनाती है जो पीढ़ियों से चली आ रही है।
इस साल, इस साहसी प्रदर्शन ने सबका ध्यान खींचा, जिसमें महिलाओं ने बाइक और जीप पर सवार होकर तलवार के साथ करतब दिखाए। पारंपरिक रास और गाड़ियों पर किए जाने वाले स्टंट के मेल ने इस प्रदर्शन को खास तौर पर आकर्षक बना दिया, क्योंकि इसमें महिलाओं ने तलवारें संभालते हुए अपने मूवमेंट में तालमेल बिठाने की काबिलियत दिखाई।
IANS से ​​बात करते हुए, एक महिला ने खुशी ज़ाहिर की कि लोग इस परफॉर्मेंस को देखने के लिए दूर-दूर से आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि जिस संस्था से वह जुड़ी हैं, वह गरबा और रास की पुरानी परंपराओं को बचाने का काम करती है। उन्होंने कहा कि महिलाएं इसकी बहुत प्रैक्टिस करती हैं और अनुभवी लीडर उन्हें तकनीक सिखाते हैं। यहाँ तक कि जो महिलाएं तलवार चलाना नहीं जानतीं, उन्हें भी इसमें हिस्सा लेने से पहले ट्रेनिंग दी जाती है।
यह परफॉर्मेंस दिखाती है कि कैसे पारंपरिक कलाएँ अपनी सांस्कृतिक जड़ों को बनाए रखते हुए समय के साथ बदलती रहती हैं। इन महिलाओं के लिए, 'तलवार रास' सिर्फ़ त्योहार का एक शो नहीं है, बल्कि अपने समुदाय की विरासत को बचाने और नई पीढ़ी को इसकी मार्शल परंपराओं से परिचित कराने का एक ज़रिया भी है।
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