जरा हटके

गांधारी ने दो बार ही हटाई आंखों की पट्टी, तब हुई चौंकाने वाली बात

nidhi
18 May 2026 3:01 PM IST
गांधारी ने दो बार ही हटाई आंखों की पट्टी, तब हुई चौंकाने वाली बात
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महाभारत में गांधारी की आंखों की पट्टी हटाने की हैरान करने वाली घटना
महाभारत : कौरवों की मां गांधारी आंखों से देख सकती थीं. जब उनके शादी अंधे धृतराष्ट्र से हुई तो उन्हें पहले तो जबरदस्त झटका लगा लेकिन उसके बाद उन्होंने प्रण लिया कि पति की तरह अब वो भी किसी भी चीज को अपनी आंखों से नहीं देखेंगी, लिहाजा उन्होंने अपनी आंखों पूरे जीवन के लिए पट्टी बांध ली. लेकिन ये पट्टी दो मौकों पर जब उन्होंने खोली तो क्या गजब हो गया.
गांधार की राजकुमारी गांधारी की शादी हस्तिनापुर के राजकुमार धृतराष्ट्र से हुई थी. वह जन्म से ही अंधे थे. उन्होंने फैसला लिया कि वह उस दुनिया को नहीं देखेंगी, जिसे उनके पति नहीं देख सकते. उन्होंने इसी प्रण की वजह से अपनी पैदा हुई संतानों को भी कभी नहीं देखा.
गांधारी के बारे में कहा जाता था कि वह अंतर्ज्ञान से जानती थीं कि उनके आसपास और लोगों के मन में क्या चल रहा है. भीष्म ने गांधारी के गुणों और कुरु वंश के गौरव को देखते हुए इस विवाह का प्रस्ताव रखा, जिसे गांधारी के पिता सुबल ने स्वीकार कर लिया. आंख पर पट्टी बांधकर गांधारी अपने पति के साथ समान धरातल पर रहना चाहती थीं. हालांकि ये भी कहा जाता है कि गांधारी ने ऐसा करके एक नेत्रहीन व्यक्ति से विवाह करने के लिए बाध्य किए जाने पर इस तरह अपना मौन विरोध जाहिर किया.
तब हर कोई अवाक रह गया
हालांकि गांधारी का अपनी आंखों पर पट्टी बांधने का फैसला उनके चरित्र की दृढ़ता, त्याग और पतिव्रता धर्म के प्रति उनकी निष्ठा को भी दिखाता है. गांधारी आंखों पर जो पट्टी पहनी हुई थी, उसका जिक्र महाभारत में भी आया है. कम से कम दो बार उनके पट्टी उतारने का जिक्र तो आया है. वो दोनों बहुत खास क्षण थे. और जब उन्होंने आंख से पट्टी हटाई तो वो मौके ऐसे थे कि हर कोई स्तब्ध रह गया था.
महाभारत के स्त्री पर्व में प्रसंग है जहां युद्ध के बाद गांधारी अपने मृत पुत्रों, विशेष रूप से दुर्योधन को देखने के लिए कुरुक्षेत्र जाती है. कुछ व्याख्याओं में कहा जाता है कि उन्होंने तब अपनी आंखों से पट्टी हटाई. उन्होंने युद्ध के मैदान में पड़ी लाशों के बीच अपने पुत्रों को मृत देखा. इस समय वह अंदर से इतने गुस्से में थीं कि उनके सामने जो आ जाता, वो गुस्से से भस्म ही हो जाता. लिहाजा उस समय कृष्ण ने पांडवों को उनके सामने नहीं आने के लिए कहा.
कृष्ण ने उन्हें कैसे नियंत्रित किया
जब उन्होंने पट्टी बांध ली तब कृष्ण के साथ पांडव उनसे और धृतराष्ट्र से मिलने आए. आंख पर पट्टी बांधने के लिए बावजूद गांधारी अंदर से धधक रही थीं. वह तपस्वी थीं. गांधारी की तपस्या में संयम, धैर्य और त्याग का भी समावेश था. हालांकि उस दिन अपनी तपस्या से प्राप्त दैवीय दृष्टि का उपयोग करके उन्होंने पांडवों को शाप देने की कोशिश की. कहा जाता है कृष्ण ने गांधारी की उस शक्ति को नियंत्रित किया.
पैर का अंगूठा काला पड़ गया
तब गांधारी को अपनी पट्टी के निचले पोर से केवल युधिष्ठिर का पैर का अंगूठा नजर आया और वह गांधारी के ताप के कारण काला पड़ गया. तब कृष्ण के कारण ही उनका गुस्सा कृष्ण पर उतरा और पांडव बच गए.
कब पहली बार गांधारी ने पट्टी हटाई
महाभारत में कहा गया है कि गांधारी ने पहली बार आंख से पट्टी महाभारत युद्ध से पहले हटाई थी. तब उन्होंने पुत्र दुर्योधन को अपने सामने वस्त्रविहीन यानि नग्न आने के लिए कहा था.
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