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सेहत के लिए फायदेमंद बताया आयुर्वेदिक हुक्का लोगों ने पूछे सवाल
वायरल डेस्क: योग गुरु बाबा रामदेव का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वह कथित ‘आयुर्वेदिक हुक्का’ इस्तेमाल करते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में रामदेव इसे सामान्य तंबाकू वाले हुक्के से अलग बताते हुए इसमें आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों के इस्तेमाल की बात करते हैं। उन्होंने इसे स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद बताया, जिसके बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई। कुछ यूजर्स ने वीडियो को मजेदार बताया तो कई लोगों ने इसके स्वास्थ्य संबंधी दावों पर सवाल उठाए।
क्या है वायरल वीडियो में?
वीडियो में बाबा रामदेव एक हुक्के जैसी डिवाइस से धुआं लेते नजर आते हैं। वह इसे आयुर्वेदिक बताते हुए कहते हैं कि इसमें तंबाकू नहीं बल्कि औषधीय जड़ी-बूटियों का इस्तेमाल किया गया है। रामदेव के मुताबिक इसमें मुलेठी, लौंग और तुलसी जैसी सामग्री शामिल है। उन्होंने इसे फेफड़ों की सफाई से भी जोड़ा।
📺WATCH | Baba Ramdev showcases "AYURVEDIC HOOKAH" made with ingredients such as mulethi (licorice) and turmeric pic.twitter.com/R3i9BI7xy4
— The Tatva (@thetatvaindia) September 11, 2026
वीडियो सामने आने के बाद यह सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर तेजी से शेयर होने लगा। ‘आयुर्वेदिक हुक्का’ शब्द ने ही यूजर्स का ध्यान खींच लिया और इसे लेकर मीम्स तथा प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई।
नेटिजन्स ने लिए मजे
सोशल मीडिया पर कई यूजर्स ने वीडियो पर चुटकी ली। किसी ने इसे हुक्के का ‘देसी और आयुर्वेदिक वर्जन’ बताया तो किसी ने स्वास्थ्य लाभ के दावे पर सवाल खड़े किए। कुछ यूजर्स ने पूछा कि क्या किसी भी तरह के धुएं को फेफड़ों के लिए फायदेमंद बताया जा सकता है।
वहीं रामदेव के समर्थकों ने आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों के पारंपरिक इस्तेमाल का जिक्र करते हुए उनका समर्थन भी किया। इस तरह वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।
क्या धुआं लेना सेहत के लिए सुरक्षित है?
यहां रामदेव के दावे और स्थापित स्वास्थ्य सलाह के बीच अंतर समझना जरूरी है। किसी उत्पाद में तंबाकू या निकोटीन न होने का मतलब यह नहीं है कि उसका धुआं फेफड़ों के लिए अपने-आप सुरक्षित या फायदेमंद हो जाता है।
अमेरिकन कैंसर सोसाइटी के मुताबिक हर्बल सिगरेट जैसे तंबाकू-मुक्त उत्पाद भी जलने पर टार और कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी हानिकारक चीजें पैदा कर सकते हैं। इसलिए किसी जड़ी-बूटी को खाना या पारंपरिक रूप से इस्तेमाल करना और उसे जलाकर उसका धुआं सांस के जरिए लेना एक जैसी बात नहीं है।
स्वास्थ्य संबंधी दावे पर सावधानी जरूरी
वायरल वीडियो में किए गए फेफड़ों की सफाई या स्वास्थ्य लाभ जैसे दावों के समर्थन में विश्वसनीय क्लिनिकल प्रमाण सामने नहीं आए हैं। इसलिए ‘आयुर्वेदिक’ शब्द के आधार पर धुएं को सुरक्षित मानना उचित नहीं होगा।
खासकर अस्थमा, एलर्जी या सांस से संबंधित समस्या वाले लोगों के लिए किसी भी तरह के धुएं के संपर्क से बचना बेहतर माना जाता है। स्वास्थ्य संबंधी किसी प्रयोग को अपनाने से पहले योग्य चिकित्सक की सलाह लेना ज्यादा सुरक्षित विकल्प है।
सोशल मीडिया पर चर्चा जारी
बाबा रामदेव पहले भी योग, आयुर्वेद और प्राकृतिक उपचारों से जुड़े अपने बयानों को लेकर चर्चा में रहे हैं। अब उनका ‘आयुर्वेदिक हुक्का’ वाला वीडियो लोगों का ध्यान खींच रहा है।
फिलहाल वीडियो इंटरनेट पर मनोरंजन और बहस दोनों का विषय बना हुआ है। हालांकि सोशल मीडिया पर वायरल स्वास्थ्य दावों को चिकित्सकीय तथ्य मानने से पहले वैज्ञानिक प्रमाणों की जांच जरूरी है।
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