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सर्कुलर इकॉनमी पर योकोहामा की पहल 11 देशों के 43 शहर साथ आए

Ratna Netam
29 Sept 2026 4:19 PM IST
सर्कुलर इकॉनमी पर योकोहामा की पहल 11 देशों के 43 शहर साथ आए
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टोक्यो। जापान का योकोहामा शहर एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सर्कुलर इकॉनमी को बढ़ावा देने के लिए शहरों को एक मंच पर लाने की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। सितंबर में आयोजित पहले ‘एशिया-पैसिफिक सर्कुलर सिटीज फोरम-2026’ में करीब 30 एशियाई शहरों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य शहरों में संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल, कचरे को कम करने, पुनर्चक्रण बढ़ाने और सर्कुलर अर्थव्यवस्था की व्यावहारिक योजनाओं को साझा करना था।योकोहामा शहर और ICLEI जापान ने 2 से 4 सितंबर तक इस फोरम का आयोजन किया। इसमें जापान और विदेशों से कुल 52 स्थानीय निकायों तथा संगठनों की भागीदारी दर्ज की गई। 3 और 4 सितंबर को पैसिफिको योकोहामा नॉर्थ में 16 अलग-अलग सत्र आयोजित किए गए, जिनमें शहरों के प्रतिनिधियों के साथ कारोबार जगत, विशेषज्ञों और छात्रों ने भी हिस्सा लिया।
इस पहल की नींव नवंबर 2025 में पड़ी थी, जब योकोहामा शहर की अगुवाई में ‘एशियन सर्कुलर सिटीज डिक्लेरेशन’ की शुरुआत की गई। इसका उद्देश्य एशिया के अलग-अलग सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों वाले शहरों को सर्कुलर इकॉनमी की दिशा में साझा प्रयासों के लिए जोड़ना था। शुरुआत के बाद इस नेटवर्क का लगातार विस्तार हुआ और अब इसमें 11 देशों के 43 शहर शामिल हो चुके हैं। इन शहरों की संयुक्त आबादी 8.2 करोड़ से ज्यादा है।फोरम के दौरान 17 नए शहरों को इस घोषणा से जोड़ा गया। इनमें भारत से ग्रेटर हैदराबाद म्युनिसिपल कॉरपोरेशन और कोच्चि नगर निगम भी शामिल हैं। इसके अलावा नेपाल, बांग्लादेश, पाकिस्तान, इंडोनेशिया, फिलीपींस, मलेशिया और जापान के कई शहर इस नेटवर्क में जुड़े। इसके साथ ही पहले 7 देशों के 26 शहरों तक सीमित नेटवर्क बढ़कर 11 देशों के 43 शहरों तक पहुंच गया।
योकोहामा शहर के इंटरनेशनल अफेयर्स ब्यूरो की डायरेक्टर जनरल तोमोमी यामाशिता ने कहा कि सर्कुलर सोसाइटी की ओर बढ़ना अब वैश्विक आवश्यकता बन चुका है। उन्होंने कहा कि योकोहामा ने सर्कुलर व्यवस्था पर केंद्रित पहला सम्मेलन आयोजित किया, जिसे कई शहरों और संगठनों का समर्थन मिला। अब अगला सवाल यह है कि इस सहयोग को ठोस कार्रवाई में कैसे बदला जाए और शहर मिलकर आगे क्या कदम उठाएं।फोरम के समापन पर ‘ACCD Action 2026’ नाम से पहला एक्शन प्लान भी पेश किया गया। इसके तहत तीन प्रमुख क्षेत्रों में काम करने की योजना बनाई गई है। इनमें एशियाई शहरों के अच्छे उदाहरणों को एकत्र कर साझा करना, निजी क्षेत्र के समाधानों को शहरों से जोड़ना और सर्कुलर इकॉनमी की दिशा में हुई प्रगति को मापने के लिए व्यवस्था विकसित करना शामिल है। वर्ष 2027 तक 50 अच्छे उदाहरणों को सामने लाने का लक्ष्य भी रखा गया है।
इस अभियान के पीछे योकोहामा का अपना लंबा अनुभव भी है। शहर ने पहले आबादी बढ़ने के बावजूद कचरे की मात्रा कम करने में उल्लेखनीय सफलता हासिल की थी। वर्ष 2003 में शुरू किए गए ‘Yokohama G30 Plan’ का लक्ष्य 2010 तक कचरे की मात्रा में 30 प्रतिशत की कमी करना था। लेकिन नागरिकों और कारोबारियों की भागीदारी से शहर ने यह लक्ष्य 2005 में ही हासिल कर लिया।इस सफलता में घरों से ही कचरे को अलग-अलग करने की व्यवस्था ने बड़ी भूमिका निभाई। योकोहामा प्रशासन ने नए कचरा पृथक्करण नियमों की जानकारी देने के लिए हजारों जागरूकता कार्यक्रम और पर्यावरण शिक्षा सत्र आयोजित किए। धीरे-धीरे नागरिक भी इस अभियान से जुड़े और लोगों ने एक-दूसरे को कचरा अलग करने के लिए प्रोत्साहित करना शुरू किया। कारोबारियों ने भी इसमें सहयोग दिया।
कचरे में कमी का प्रभाव शहर के बुनियादी ढांचे पर भी पड़ा। कचरे की मात्रा घटने के कारण योकोहामा को कुछ कचरा जलाने वाले संयंत्रों को बंद करने का अवसर मिला और लैंडफिल साइटों की उपयोग अवधि भी बढ़ाई जा सकी। यह अनुभव अब दूसरे एशियाई शहरों के लिए उदाहरण के रूप में साझा किया जा रहा है।सर्कुलर इकॉनमी का मकसद केवल कचरे का पुनर्चक्रण करना नहीं है। इसमें उत्पादों और संसाधनों को लंबे समय तक उपयोग में बनाए रखना, मरम्मत और दोबारा इस्तेमाल बढ़ाना और ऐसी व्यवस्था तैयार करना शामिल है जिसमें कम से कम सामग्री बेकार जाए। बढ़ती शहरी आबादी और संसाधनों पर दबाव के बीच एशिया के बड़े शहर इस मॉडल को भविष्य की शहरी योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा मान रहे हैं।
योकोहामा की पहल में अंतरराष्ट्रीय संगठनों और निजी क्षेत्र की भागीदारी को भी महत्वपूर्ण माना गया है। फोरम में संयुक्त राष्ट्र से जुड़े संगठनों, विश्व बैंक, वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम और सर्कुलर इकॉनमी पर काम करने वाली संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया। इसका उद्देश्य केवल विचार-विमर्श तक सीमित न रहकर शहरों को वास्तविक परियोजनाओं और समाधानों से जोड़ना है।आगे इस नेटवर्क को और विस्तार देने की योजना है। वर्ष 2027 में योकोहामा में होने वाले अगले फोरम को और बड़े स्तर पर आयोजित करने की तैयारी है। योकोहामा शहर 30 अगस्त से 3 सितंबर 2027 के बीच ‘योकोहामा सर्कुलर वीक’ आयोजित करने की भी योजना बना रहा है, जिसमें जापान और दुनिया के दूसरे हिस्सों से सर्कुलर इकॉनमी पर काम करने वाले लोग एक साथ आएंगे।
कुल मिलाकर योकोहामा का मॉडल यह दिखाता है कि शहरों में सर्कुलर इकॉनमी को लागू करने के लिए केवल सरकारी नीतियां पर्याप्त नहीं हैं। नागरिकों, कारोबारियों, स्थानीय प्रशासन और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की भागीदारी भी जरूरी है। कचरा घटाने के अपने पुराने अनुभव को आधार बनाकर योकोहामा अब एशिया के शहरों को साझा मंच पर लाने और संसाधनों के अधिक टिकाऊ इस्तेमाल की दिशा में सामूहिक रणनीति विकसित करने की कोशिश कर रहा है।
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