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World TB Day 2025 : भारत में टीबी को खत्म करने का लक्ष्य मुश्किल

Uma Verma
24 March 2025 1:05 PM IST
World TB Day 2025 : भारत में टीबी को खत्म करने का लक्ष्य मुश्किल
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विश्व टीबी दिवस के मौके पर भारत में टीबी के बढ़ते मामलों पर गंभीर चिंता जताई जा रही है। 2025 तक देश से इस बीमारी को समाप्त करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन अब भी लाखों लोग इस बीमारी से प्रभावित हो रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, टीबी के मामलों में वृद्धि का एक कारण लक्षणहीन मरीजों की बढ़ती संख्या है। टीबी की पहचान समय पर न हो पाने के कारण मरीजों का इलाज शुरू नहीं हो पाता, जिससे बीमारी का फैलाव होता है।

भारत में हर साल लाखों लोग टीबी से संक्रमित होते हैं, और इनमें से 40% लोग ऐसे होते हैं जिनमें कोई लक्षण नहीं होते। यह स्थिति और भी जटिल हो जाती है, क्योंकि लक्षणहीन मरीजों को पहचानना और उनका इलाज शुरू करना मुश्किल होता है। टीबी के लक्षण आमतौर पर खांसी, बुखार, थकावट, और वजन घटने के रूप में दिखाई देते हैं, लेकिन लक्षणहीन मरीजों में यह सब दिखाई नहीं देता।

टीबी की जांच और इलाज में देरी का एक प्रमुख कारण यह भी है कि कई लोग इसे साधारण खांसी या बुखार समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। इसके कारण, वे लंबे समय तक संक्रमित रहते हैं और दूसरों में बीमारी फैलाते हैं।

लक्षणहीन मरीजों का खतरा
लक्षणहीन मरीजों को अक्सर आमतौर पर उपेक्षित किया जाता है, जिससे बीमारी का फैलाव बढ़ता है। यह बहुत बड़ी चुनौती है, क्योंकि बिना लक्षण वाले लोग आमतौर पर किसी स्वास्थ्य समस्या से नहीं पीड़ित महसूस करते हैं और इलाज के लिए नहीं जाते। जब तक वे जान पाते हैं कि वे टीबी से संक्रमित हैं, तब तक यह बीमारी फैल चुकी होती है।

टीबी पर नियंत्रण पाने के लिए भारत सरकार ने कई कदम उठाए हैं, लेकिन इसके बावजूद लक्षणहीन मरीजों की संख्या बढ़ने से लक्ष्य को प्राप्त करना कठिन हो रहा है। सरकार ने अब "टीबी हॉटस्पॉट्स" के रूप में उन क्षेत्रों की पहचान शुरू की है, जहां टीबी के मामले अधिक पाए जाते हैं। इसके साथ ही, टेस्टिंग और इलाज के उपायों को और मजबूत किया जा रहा है।

डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल
टीबी के खिलाफ लड़ाई में डिजिटल तकनीक का भी सहारा लिया जा रहा है। मोबाइल ऐप्स और टेलीमेडिसिन के माध्यम से लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जा रही हैं। इसके अलावा, टीबी के मरीजों की नियमित निगरानी के लिए एआई आधारित टूल्स का इस्तेमाल भी बढ़ रहा है। इससे चिकित्सक मरीजों की स्थिति को बेहतर ढंग से समझ सकते हैं और इलाज को व्यक्तिगत जरूरतों के अनुसार बदल सकते हैं।

टीबी को समाप्त करने की चुनौती
विशेषज्ञों का कहना है कि टीबी को समाप्त करने के लिए जल्द पहचान, सही इलाज, और मरीजों की नियमित निगरानी बेहद जरूरी है। 2025 तक भारत से टीबी को समाप्त करने का लक्ष्य रखने के बावजूद, लक्षणहीन मरीजों और इस बीमारी से जुड़ी सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों के कारण यह एक बड़ी चुनौती बन गई है।

भारत में टीबी के मामलों की संख्या हर साल बढ़ती जा रही है। यह गंभीर चिंता का विषय है कि इलाज में देरी होने के कारण यह बीमारी फैलती जा रही है और भारत की स्वास्थ्य प्रणाली पर दबाव बढ़ता जा रहा है।

निष्कर्ष
टीबी से निजात पाने के लिए सरकार, स्वास्थ्य संगठनों और समाज को मिलकर काम करने की आवश्यकता है। लक्षणहीन मरीजों की पहचान और उनका इलाज जरूरी है, ताकि बीमारी के फैलने को रोका जा सके। इसके लिए जागरूकता, नियमित जांच और प्रभावी उपचार ही एकमात्र समाधान हो सकते हैं।


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