
वर्ल्ड | ब्रिटेन के एक युवा ने मानसिक बीमारी से जूझते हुए ऐसा कदम उठाया, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। 27 वर्षीय डेविड कार्टर (काल्पनिक नाम) ने स्विट्जरलैंड में इच्छामृत्यु (Euthanasia) का विकल्प चुना, जहां यह कानूनी रूप से मान्य है। उन्होंने अपनी पीड़ा और इस फैसले के पीछे की वजह को लेकर एक इमोशनल बयान भी दिया, जिसे सुनकर लोग भावुक हो गए।
'जीना अब असहनीय हो गया था'
डेविड बचपन से ही गंभीर मानसिक विकार और डिप्रेशन से जूझ रहे थे। उन्होंने कई सालों तक थेरैपी और दवाइयों से खुद को ठीक करने की कोशिश की, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। अपनी आखिरी बातचीत में उन्होंने कहा,
"मैं हर दिन दर्द में जी रहा हूं। मैंने अपनी हर कोशिश कर ली, लेकिन अब मैं बस शांति चाहता हूं। मैं ऐसे नहीं जी सकता।"
परिवार और डॉक्टरों ने किया समझाने का प्रयास
डेविड के फैसले से उनका परिवार और दोस्त बेहद दुखी थे। परिवार ने उन्हें समझाने की भरपूर कोशिश की, लेकिन वह अपने फैसले पर अडिग रहे।
ब्रिटिश मेडिकल एसोसिएशन ने भी उनका केस स्टडी किया और उन्हें इलाज जारी रखने की सलाह दी।
लेकिन डेविड ने स्विट्जरलैंड की Dignitas संस्था (जहां इच्छामृत्यु वैध है) से संपर्क किया और अपनी अंतिम इच्छा जताई।
डॉक्टरों ने भी उनके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य का परीक्षण किया और फिर इच्छामृत्यु की प्रक्रिया को मंजूरी दी।
ब्रिटेन में इच्छामृत्यु पर बहस तेज
डेविड की इच्छामृत्यु के फैसले ने ब्रिटेन में एक नई बहस छेड़ दी है।
ब्रिटेन में इच्छामृत्यु गैरकानूनी है, लेकिन कई लोग इसे वैध करने की मांग कर रहे हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि मानसिक बीमारी की वजह से इच्छामृत्यु देना एक खतरनाक मिसाल हो सकता है।
कुछ मानवाधिकार संगठनों ने कहा कि डिप्रेशन और मानसिक रोगों का इलाज संभव है, इसलिए ऐसे फैसले को बढ़ावा नहीं देना चाहिए।
क्या है इच्छामृत्यु का कानून?
ब्रिटेन: यहां इच्छामृत्यु गैरकानूनी है, इसे हत्या माना जाता है।
स्विट्जरलैंड: यहां Dignitas जैसी संस्थाएं इच्छामृत्यु की सुविधा देती हैं।
नीदरलैंड, बेल्जियम, कनाडा: यहां कुछ विशेष परिस्थितियों में इच्छामृत्यु को मंजूरी है।
निष्कर्ष
डेविड कार्टर का मामला मानसिक स्वास्थ्य और इच्छामृत्यु पर एक नई बहस छेड़ चुका है। जहां कुछ लोग इसे व्यक्तिगत अधिकार का मामला मान रहे हैं, वहीं कुछ इसे भावनात्मक कमजोरी में लिया गया गलत फैसला बता रहे हैं।
आपका इस पर क्या मत है? क्या मानसिक रोगियों को भी इच्छामृत्यु का अधिकार मिलना चाहिए या इलाज की कोशिशें जारी रहनी चाहिए?





