
वर्ल्ड | अमेरिका में टैरिफ विवाद को लेकर एक नया मोड़ सामने आया है। डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसद और भारतवंशी नेता राजा कृष्णमूर्ति ने ट्रंप प्रशासन द्वारा भारत पर लगाए जा रहे टैरिफ की खुलकर आलोचना की है। उन्होंने कहा कि यह कदम अमेरिका-भारत के बीच लंबे समय से बने मजबूत संबंधों को नुकसान पहुंचा सकता है।
कृष्णमूर्ति ने मीडिया से बातचीत में कहा, "भारत के साथ हमारे रणनीतिक और आर्थिक रिश्ते दशकों से मजबूत रहे हैं। टैरिफ जैसे कठोर कदम से इन संबंधों में खटास आ सकती है।" उन्होंने आगे जोड़ा कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, और व्यापार संतुलन जैसे मुद्दे बातचीत से सुलझाए जाने चाहिए, न कि दंडात्मक नीति से।
डेमोक्रेटिक सांसद का यह बयान ऐसे समय में आया है जब ट्रंप प्रशासन ने चीन के बाद भारत के कुछ प्रमुख उत्पादों पर भी टैरिफ लगाने की योजना का संकेत दिया है। टैरिफ के दायरे में टेक्सटाइल, फार्मा, स्टील और इलेक्ट्रॉनिक सामान जैसे क्षेत्र आ सकते हैं, जिनमें भारत का अमेरिका के साथ बड़ा व्यापारिक संबंध है।
कृष्णमूर्ति का मानना है कि यह फैसला न केवल आर्थिक रूप से गलत है, बल्कि यह अमेरिका की वैश्विक छवि को भी नुकसान पहुंचा सकता है। "हम भारत जैसे लोकतांत्रिक साथी के साथ सहयोग बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे थे, लेकिन यह टैरिफ फैसला उस प्रक्रिया को पीछे धकेल सकता है," उन्होंने कहा।
उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि ट्रंप प्रशासन को अपने निर्णय पर पुनर्विचार करना चाहिए और भारत से उच्च स्तरीय बातचीत शुरू करनी चाहिए। "आर्थिक शक्ति संतुलन और भू-राजनीतिक स्थिति को देखते हुए भारत अमेरिका का स्वाभाविक सहयोगी है, न कि विरोधी," उन्होंने जोर दिया।
विशेषज्ञों का मानना है कि कृष्णमूर्ति जैसे वरिष्ठ सांसद की सार्वजनिक आलोचना ट्रंप प्रशासन पर राजनीतिक दबाव भी बढ़ा सकती है, खासकर तब जब भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिकों की संख्या और प्रभाव लगातार बढ़ रहा है।
टैरिफ को लेकर भारत की तरफ से भी प्रतिक्रिया की उम्मीद की जा रही है। फिलहाल दोनों देशों के बीच व्यापारिक और रणनीतिक वार्ताएं जारी हैं, लेकिन अगर टैरिफ लागू हुए तो इससे संबंधों में तनाव बढ़ सकता है





