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महिलाओं और युवाओं के वोट चर्चा में
वॉशिंगटन: अमेरिका में चुनावी नतीजों के बाद महिला और युवा मतदाताओं की भूमिका राजनीतिक चर्चा का प्रमुख विषय बन गई है। डेमोक्रेटिक पार्टी को मिली बढ़त के पीछे इन दोनों मतदाता वर्गों के समर्थन को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वहीं, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों को लेकर चुनाव के दौरान उठे सवालों ने भी राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है। हालांकि, अलग-अलग राज्यों और निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान के रुझान अलग हो सकते हैं। इसलिए किसी एक मतदाता वर्ग को पूरे चुनावी परिणाम का निर्णायक कारण मानने के लिए विस्तृत आंकड़ों का विश्लेषण जरूरी है।
3 नवंबर 2026 को हुए अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी ने कांग्रेस के दोनों सदनों में नियंत्रण हासिल किया। चुनाव के बाद सामने आए एग्जिट पोल और मतदाता सर्वेक्षणों से पता चलता है कि महिलाओं, युवाओं और स्वतंत्र मतदाताओं के बीच डेमोक्रेट्स का समर्थन बढ़ा। वर्ष 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में ट्रंप ने जिन मतदाता समूहों में अपनी पकड़ मजबूत की थी, उनमें से कई समूह इस बार डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों की ओर झुके।
महिला मतदाताओं ने डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रदर्शन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विशेष रूप से श्वेत महिलाओं के बीच भी डेमोक्रेट्स को मामूली बढ़त मिली, जबकि यह मतदाता समूह ऐतिहासिक रूप से रिपब्लिकन उम्मीदवारों का समर्थन करता रहा है। महिलाओं के बीच डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों को मिला समर्थन 2018 के मध्यावधि चुनावों के समान स्तर पर पहुंच गया। मेन राज्य के सीनेट चुनाव में भी महिला मतदाताओं का समर्थन डेमोक्रेटिक उम्मीदवार ट्रॉय जैक्सन की जीत का महत्वपूर्ण कारण बना। युवा मतदाताओं के रुझान में भी बड़ा बदलाव दर्ज किया गया। टफ्ट्स विश्वविद्यालय के CIRCLE शोध केंद्र के 6 नवंबर तक के विश्लेषण के मुताबिक, 18 से 29 वर्ष के लगभग 66 प्रतिशत मतदाताओं ने प्रतिनिधि सभा के चुनाव में डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों का समर्थन किया, जबकि 31 प्रतिशत ने रिपब्लिकन उम्मीदवारों को वोट दिया। इस प्रकार युवा मतदाताओं में डेमोक्रेट्स को 35 प्रतिशत अंकों की बढ़त मिली।
युवा महिलाओं में डेमोक्रेटिक पार्टी का समर्थन विशेष रूप से मजबूत रहा। शोध के अनुसार, करीब 70 प्रतिशत युवा महिलाओं ने डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों को वोट दिया। वहीं, युवा पुरुषों में भी डेमोक्रेट्स का समर्थन 59 प्रतिशत दर्ज किया गया। यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में युवा पुरुषों के एक बड़े हिस्से ने डोनाल्ड ट्रंप का समर्थन किया था। हालांकि, दोनों चुनावों के मतदाता समूह और मतदान का स्वरूप अलग होने के कारण इसे प्रत्येक मतदाता की व्यक्तिगत राजनीतिक पसंद में बदलाव नहीं माना जा सकता।
अमेरिकी चुनाव में महंगाई और जीवनयापन की बढ़ती लागत भी महत्वपूर्ण मुद्दे रहे। एग्जिट पोल के अनुसार, बड़ी संख्या में मतदाताओं ने खाद्य पदार्थों, पेट्रोल, बिजली और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों को लेकर चिंता जताई। जिन मतदाताओं ने अपनी आर्थिक स्थिति खराब बताई, उनमें डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों को अधिक समर्थन मिला। कई मतदाताओं ने ट्रंप प्रशासन की आर्थिक नीतियों और आयात शुल्क के प्रभाव को लेकर भी असंतोष व्यक्त किया।
एसोसिएटेड प्रेस के व्यापक मतदाता सर्वेक्षण में भी युवाओं के बीच ट्रंप के प्रति असंतोष सामने आया। सर्वेक्षण के अनुसार, 30 वर्ष से कम आयु के लगभग छह में से दस मतदाताओं ने कहा कि प्रतिनिधि सभा के चुनाव में उनके मतदान का एक कारण ट्रंप का विरोध व्यक्त करना था। हालांकि, युवा मतदाता कुल मतदाताओं का लगभग दस प्रतिशत ही थे। इसलिए चुनावी परिणामों में अन्य आयु वर्गों और स्वतंत्र मतदाताओं की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही। डेमोक्रेटिक पार्टी को अश्वेत, हिस्पैनिक और मध्यमार्गी मतदाताओं के बीच भी समर्थन बढ़ने का लाभ मिला। एपी के सर्वेक्षण के अनुसार, लगभग 60 प्रतिशत हिस्पैनिक मतदाताओं और करीब 90 प्रतिशत अश्वेत मतदाताओं ने प्रतिनिधि सभा के चुनाव में डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों का समर्थन किया। इससे पार्टी को विभिन्न राज्यों में अपनी चुनावी स्थिति मजबूत करने में मदद मिली।
इन परिणामों ने अमेरिकी राजनीति में मतदाताओं की बदलती प्राथमिकताओं को सामने रखा है। आर्थिक परेशानियों, आव्रजन नीतियों, राष्ट्रपति की कार्यशैली और लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका जैसे मुद्दों ने मतदान को प्रभावित किया। हालांकि, चुनावी नतीजों से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि सभी युवा या महिला मतदाताओं ने ट्रंप की प्रत्येक नीति को खारिज कर दिया है। मध्यावधि चुनावों के परिणाम अमेरिकी राजनीति के अगले चरण के लिए महत्वपूर्ण हैं। कांग्रेस के दोनों सदनों में डेमोक्रेटिक नियंत्रण के बाद ट्रंप प्रशासन और विपक्ष के बीच विधायी मुद्दों पर नए राजनीतिक समीकरण सामने आएंगे। वहीं, महिला और युवा मतदाताओं के रुझान दोनों प्रमुख दलों के लिए भविष्य की चुनावी रणनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
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