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10 दिन तक मलबे में कैद रही महिला फिर रेस्क्यू ने दिखाया चमत्कार
Ratna Netam
6 Sept 2026 2:40 PM IST

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काठमांडू। कहते हैं कि जब तक सांस है तब तक उम्मीद बाकी रहती है। नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन के बीच एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया। करीब 10 दिनों तक मलबे के अंदर दबी रहने के बाद एक 60 वर्षीय महिला को जिंदा बाहर निकाला गया। बचाव दल को जब मलबे के बीच से रोने की हल्की आवाज सुनाई दी तो उन्होंने तुरंत तलाश शुरू की और कुछ ही देर में जिंदगी की यह चमत्कारिक कहानी सामने आई।
यह घटना नेपाल के नुवाकोट जिले के बेत्रावती इलाके की है। यहां 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई थी। कई घर पानी और मलबे की चपेट में आ गए थे। इसी तबाही के दौरान 60 वर्षीय **चंडिका श्रेष्ठा** अपने घर के अंदर फंस गई थीं। कई दिनों तक उनका कोई पता नहीं चल पाया था और परिवार ने भी उम्मीद लगभग छोड़ दी थी।
चार मंजिला मकान मलबे में दब गया
जानकारी के मुताबिक, बाढ़ का पानी इतना तेज था कि उसने पूरे इलाके को तहस-नहस कर दिया। चंडिका श्रेष्ठा का चार मंजिला मकान भी इसकी चपेट में आ गया। तेज बहाव के कारण मकान अपनी जगह से काफी दूर तक खिसक गया और उसकी कई मंजिलें पूरी तरह कीचड़ और मलबे में दब गईं। सिर्फ ऊपर का कुछ हिस्सा ही दिखाई दे रहा था।
परिवार और आसपास के लोगों को कई दिनों तक महिला के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली। लगातार चल रहे राहत और बचाव अभियान के बीच हर दिन उम्मीद कम होती जा रही थी। यहां तक कि परिवार ने उनकी मौत की आशंका में अंतिम संस्कार से जुड़ी रस्में भी शुरू कर दी थीं। लेकिन किस्मत को कुछ और मंजूर था।
अचानक मलबे से सुनाई दी आवाज
रेस्क्यू टीम जब इलाके में राहत कार्य कर रही थी, तभी उन्हें मलबे के अंदर से कुछ आवाज सुनाई दी। जवानों ने ध्यान से सुना तो उन्हें लगा कि कोई व्यक्ति अंदर फंसा हुआ है। इसके बाद बचाव दल ने बिना समय गंवाए मलबा हटाने का काम शुरू किया।
कड़ी मशक्कत के बाद टीम घर के उस हिस्से तक पहुंची, जहां महिला फंसी हुई थीं। जब मलबा हटाया गया तो अंदर से कमजोर हालत में चंडिका श्रेष्ठा को जिंदा बाहर निकाला गया। यह दृश्य देखकर मौके पर मौजूद लोग भावुक हो गए।
10 दिन तक कैसे बची रही जिंदगी?
सबसे बड़ा सवाल यह था कि आखिर इतनी लंबी अवधि तक महिला मलबे के अंदर कैसे जीवित रहीं। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसी परिस्थितियों में किसी व्यक्ति के जीवित रहने के लिए हवा, थोड़ी जगह और शरीर में मौजूद ऊर्जा महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
माना जा रहा है कि मकान के ऊपरी हिस्से में कुछ जगह बची हुई थी, जहां महिला को सांस लेने के लिए हवा मिलती रही। इसके अलावा मलबे की स्थिति ऐसी रही होगी कि वह पूरी तरह दबने से बच गईं।
हालांकि इस बात की पूरी जानकारी अभी सामने नहीं आई है कि उन्होंने इतने दिनों तक किस तरह खुद को जिंदा रखा।
अस्पताल पहुंचाई गई महिला
रेस्क्यू के बाद चंडिका श्रेष्ठा को तुरंत इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। बचाव टीम ने बताया कि उनकी हालत कमजोर थी, लेकिन उन्हें सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। डॉक्टरों ने उनका इलाज शुरू किया।
महिला के बचने की खबर जैसे ही परिवार तक पहुंची, वहां खुशी का माहौल बन गया। जिन लोगों ने उनके जिंदा बचने की उम्मीद छोड़ दी थी, उन्हें अपनी आंखों पर भरोसा नहीं हुआ।
परिवार के कुछ सदस्य अभी भी लापता
इस हादसे में चंडिका श्रेष्ठा के परिवार के कुछ अन्य सदस्य अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। उनके परिजन अब भी उम्मीद लगाए हुए हैं कि बचाव अभियान के दौरान बाकी लोगों का भी पता चल सकता है।
नेपाल में इस आपदा के बाद राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। कई इलाकों में मलबा हटाकर लोगों की तलाश की जा रही है। चंडिका श्रेष्ठा के जिंदा मिलने की घटना ने बचाव दलों और प्रभावित परिवारों के बीच नई उम्मीद पैदा कर दी है।
इससे पहले भी मिले थे जिंदा लोग
नेपाल में इस आपदा के दौरान इससे पहले भी कुछ लोगों को लंबे समय बाद जिंदा बचाया गया था। त्रिशूली इलाके की एक सुरंग से दो मजदूरों को कई दिनों बाद सुरक्षित बाहर निकाला गया था। इन घटनाओं ने साबित किया कि कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी उम्मीद नहीं छोड़नी चाहिए।
जिंदगी की उम्मीद बनी मिसाल
चंडिका श्रेष्ठा की कहानी अब नेपाल में उम्मीद और हिम्मत की मिसाल बन गई है। जहां एक तरफ प्राकृतिक आपदा ने हजारों लोगों को प्रभावित किया, वहीं दूसरी तरफ एक बुजुर्ग महिला का 10 दिन बाद जिंदा मिलना किसी चमत्कार से कम नहीं माना जा रहा।
यह घटना बताती है कि बचाव अभियान में हर आवाज, हर संकेत और हर संभावना कितनी महत्वपूर्ण होती है। मलबे के बीच से आई एक छोटी सी आवाज ने एक परिवार को दोबारा अपनी मां और अपने प्रियजन से मिला दिया।
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