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इस माडल की मदद से पता चलेगा हार्ट अटैक की दवा कितनी असरदार

Neha Dani
21 Jun 2022 10:56 AM GMT
इस माडल की मदद से पता चलेगा हार्ट अटैक की दवा कितनी असरदार
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यह तय कर सकती है कि उनके ठीक होने की राह कितनी लंबी होगी।

हाल ही में शोधकर्ताओं ने एक खोज की है, जिसके तहत गणितीय माडल से इस बात का प्रभावी रूप से पता लगाया जा सकेगा कि दिल के दौरे के उपचार में जो दवा दी जा रही है, वह कितनी असरदार है। शोधकर्ताओं ने मायोकार्डियल इंफाक्र्शन का गणितीय माडल विकसित करने के लिए चूहों पर शोध किया गया है, जिसे जर्नल आफ थियोरेटिकल बायोलाजी में प्रकाशित किया गया है। ओहिया स्टेट यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने कहा, नया माडल कई उपयोगी नई दवाओं के संयोजन की भविष्यवाणी करता है, जो हार्ट अटैक के इलाज में एक दिन काफी मददगार साबित हो सकती हैं।

अमेरिका में हर साल करीब आठ लाख लोगों को हार्ट अटैक का सामना करना पड़ता है। इनमें से करीब 30 प्रतिशत लोगों की मौत हो जाती है, लेकिन जो लोग बच जाते हैं, उनके लिए भी जिंदगी आसान नहीं रह जाती। हार्ट अटैक के होने से दिल को जो नुकसान होता है, वो उम्र भर रहता है और इससे प्रभावित क्षेत्र में खतरनाक सूजन आ जाती है। दरअसल, हृदय के इन अवरुद्ध मागोर्ं में रक्त के प्रवाह को बहाल करने के उपचार में अक्सर सर्जरी और दवाएं शामिल होती हैं, जिसे रीपरफ्यूजन थेरेपी के रूप में जाना जाता है।
अध्ययन के प्रमुख लेखक और ओहियो स्टेट में बायोमेडिकल इंजीनियरिंग में पोस्टडाक्टरल शोधकर्ता निकोले मोइज ने कहा, अध्ययन गणितीय एल्गोरिदम का उपयोग करता है, ताकि संभावित घातक सूजन से निपटने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली दवाओं की प्रभावकारिता का आकलन किया जा सके। मोइज के मुताबिक, जीव विज्ञान और चिकित्सा अब अधिक गणितीय होने लगी हैं। हमारे पास इसका इतना डाटा है कि आपको इसे किसी तरह के ढांचे में एकत्र करने की शुरुआत करनी होगी। वहीं, मोइज ने जानवरों के दिलों के अन्य गणितीय माडल पर काम करना शुरू किया है।
विभिन्न समीकरणों की एक सीरीज प्रस्तुत की : मोइज की टीम ने विभिन्न समीकरणों की एक सीरीज प्रस्तुत की है। उनके इस माडल को जानवरों पर पहले किए गए शोध का इस्तेमाल करके बनाया गया है। चिकित्सा में ग्राफ के रूप में रोगों के विकास की निगरानी के लिए अक्सर अंतर समीकरणों का उपयोग किया जाता है, लेकिन इस अध्ययन ने यह माडल चुना कि कैसे कुछ प्रतिरक्षा कोशिकाएं जैसे मायोसाइट्स, न्यूट्रोफिल और मैक्रोफेज-संक्रमण से लड़ने और नेक्रोसिस (दिल की खतरनाक चोट) का मुकाबला करने के लिए अनिवार्य कोशिकाएं-एक महीने की अवधि में चार अलग-अलग इम्यूनोमाड्यूलेटरी दवाओं पर प्रतिक्रिया करती हैं। इन दवाओं को प्रतिरक्षा प्रणाली को दबाने के लिए डिजाइन किया गया है, ताकि यह हृदय के उन हिस्सों में अधिक हानिकारक सूजन का कारण न बने जो क्षतिग्रस्त हो गए थे।
यह लगाया पता : यह शोध चूहों के इलाज के एक घंटे बाद दवाओं की प्रभावकारिता पर केंद्रित है। उनके निष्कषों से पता चला है कि इस दवाओं के कुछ संयोजन दूसरी दवाओं की तुलना में सूजन को कम करने में ज्यादा प्रभावी थी। मोइज ने कहा, चिकित्सा में, गणित और समीकरणों का उपयोग इन प्रणालियों का वर्णन करने के लिए किया जा सकता है। आपको बस निरीक्षण करने की आवश्यकता है और उसके बाद आप उनके बीच नियम और एक सुसंगत कहानी पाएंगे। हम इन थेरेपी के द्वारा अपने माडल की जांच कर रहे हैं। हम सर्वश्रेष्ठ उपलब्ध चिकित्सा देखभाल से भी रोगी के परिणाम को बेहतर बना सकते हैं। किसी व्यक्ति को दिल का दौरा पड़ने से ठीक होने में छह से आठ महीने तक का समय लग सकता है। उन पहले कुछ हफ्तों में रोगियों को मिलने वाली देखभाल की गुणवत्ता यह तय कर सकती है कि उनके ठीक होने की राह कितनी लंबी होगी।


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