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क्या 4 नवंबर से ईरान पर फिर हमला करेगा अमेरिका?, ट्रम्प और नेतन्याहू की बातचीत के बाद बढ़ा युद्ध का खतरा

jantaserishta.com
1 Nov 2026 1:13 PM IST
क्या 4 नवंबर से ईरान पर फिर हमला करेगा अमेरिका?, ट्रम्प और नेतन्याहू की बातचीत के बाद बढ़ा युद्ध का खतरा
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नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच शनिवार को फोन पर बातचीत हुई। इसके बाद ट्रम्प ने रविवार को पत्रकारों से कहा कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े एक या दो ठिकाने अभी भी निशाने पर हैं। उनके इस बयान के बाद पश्चिम एशिया में संभावित सैन्य कार्रवाई को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
अमेरिकी न्यूज चैनल MS NOW की रिपोर्ट के मुताबिक, वॉशिंगटन ने खाड़ी देशों को ईरान पर नए हमलों के लिए तैयार रहने को कहा है। ये कार्रवाई 4 नवंबर से शुरू हो सकती है। यह तारीख अमेरिका में 3 नवंबर को होने वाले मिडटर्म चुनाव के ठीक अगले दिन की है। हालांकि, अमेरिका ने अभी तक हमले की कोई आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की है।
पश्चिम एशिया में सैन्य तैयारियां बढ़ा रहे अमेरिका और इजराइल
अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पिछले कुछ हफ्तों में अमेरिका ने पश्चिम एशिया में अपनी सैन्य गतिविधियां बढ़ाई हैं। क्षेत्र में हवाई सुरक्षा प्रणाली, गोला-बारूद और दूसरे सैन्य उपकरण पहुंचाए जा रहे हैं। इसके साथ ही अमेरिकी सेना ने अपने जवानों और सैन्य संसाधनों को उन ठिकानों से दूसरी जगह भेजना शुरू किया है, जहां ईरान की ओर से हमला होने का खतरा है।
अमेरिकी रक्षा अधिकारियों का मानना है कि सेंट्रल कमांड और इजराइल संभावित कार्रवाई के लिए तैयार हैं। इजराइली न्यूज चैनल KAN के मुताबिक, पिछले सप्ताह अमेरिका के 10 सैन्य मालवाहक विमान इजराइल पहुंचे थे। इन विमानों से ऐसे उपकरण लाए जाने की बात कही गई है, जिनका इस्तेमाल हवाई हमलों से बचाव और अमेरिकी सहयोगी देशों के सैन्य ठिकानों की सुरक्षा में किया जा सकता है।
इससे पहले करीब दो सप्ताह पूर्व इजराइल के कई लड़ाकू विमानों ने ईरान की सीमा तक उड़ान भरी थी। हालांकि, वे बिना हमला किए वापस लौट आए। एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक, यह उड़ान एक सैन्य अभ्यास का हिस्सा थी।
अमेरिकी मिडटर्म चुनाव के बाद क्यों हो सकती है कार्रवाई?
अमेरिका में 3 नवंबर को मिडटर्म चुनाव होने हैं। इन चुनावों में संसद के लिए प्रतिनिधियों का चयन किया जाएगा। राष्ट्रपति ट्रम्प फिलहाल अपनी पार्टी रिपब्लिकन के उम्मीदवारों के समर्थन में प्रचार कर रहे हैं।
ईरान के साथ जारी तनाव और अमेरिका में बढ़ती ईंधन कीमतें रिपब्लिकन पार्टी के लिए मुश्किलें पैदा कर सकती हैं। ऐसे में चुनाव से ठीक पहले किसी बड़े सैन्य अभियान का राजनीतिक असर भी पड़ सकता है। रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि इसी वजह से अमेरिका ने ईरान के खिलाफ संभावित कार्रवाई को चुनाव के बाद तक टाल रखा है। दूसरी ओर, कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि ईरान भी अमेरिकी चुनाव से पहले बातचीत को लंबा खींचने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
रूबियो बोले- ट्रम्प अभी बातचीत से समाधान चाहते हैं
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने शनिवार को अटलांटा में G20 से जुड़ी प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि ट्रम्प ने ईरान पर दोबारा हमला करने का फैसला नहीं लिया है। उनके मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति फिलहाल बातचीत के जरिए विवाद सुलझाना चाहते हैं। लेकिन अगर हालात बिगड़ते हैं तो सैन्य विकल्प भी खुला है। रूबियो ने ईरान पर आरोप लगाया कि वह अपनी मांगें मनवाने के लिए समुद्री जहाजों को निशाना बनाने और पड़ोसी देशों के तेल-गैस ठिकानों पर हमले की धमकी दे रहा है। उनका कहना था कि इस तरह की गतिविधियां क्षेत्र की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हैं।
ईरान की चेतावनी- हमला हुआ तो जोरदार जवाब देंगे
ईरान ने भी अमेरिका को साफ चेतावनी दी है कि किसी नए हमले की स्थिति में वह जवाबी कार्रवाई करेगा। तेहरान से जारी बयान के मुताबिक, सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने सैन्य कमांडरों को किसी भी हमले का तुरंत और कड़ा जवाब देने के लिए तैयार रहने को कहा है।
बयान में यह भी कहा गया कि जवाबी कार्रवाई किसी एक भौगोलिक क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगी। ईरान के सेना प्रमुख जनरल अली अब्दोल्लाही ने भी कहा है कि उनके देश ने संभावित निशानों की सूची बढ़ा दी है। उनके मुताबिक, अमेरिका ने हमला किया तो ईरान बड़े स्तर पर जवाब देगा।
अमेरिका से बातचीत में ईरान की तीन प्रमुख मांगें
अमेरिका के साथ बातचीत में ईरान आर्थिक राहत और अपने वित्तीय हितों से जुड़े मुद्दे उठाना चाहता है। उसकी तीन प्रमुख मांगें बताई गई हैं।
- तेल बेचने की छूट: ईरान चाहता है कि उसे अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहले की तरह तेल बेचने की अनुमति मिले।
- आर्थिक प्रतिबंध खत्म हों: अमेरिका की ओर से लगाए गए प्रतिबंध हटाए जाएं, ताकि ईरान की अर्थव्यवस्था को राहत मिल सके।
- 6 अरब डॉलर वापस मिलें: ईरान कतर में रोकी गई अपनी करीब 6 अरब डॉलर की रकम वापस चाहता है।
फिलहाल दोनों देशों के बीच बातचीत और सैन्य तैयारियां साथ-साथ चल रही हैं। अमेरिका ने हमले का अंतिम फैसला सार्वजनिक नहीं किया है, जबकि ईरान ने किसी भी कार्रवाई का जवाब देने की चेतावनी दी है। ऐसे में आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया की स्थिति पर दुनिया की नजर बनी रहेगी।
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