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चीन के रेगिस्तान में क्यों बना अमेरिकी नौसेना का टारगेट मॉडल?

Ashish verma
12 July 2026 8:25 PM IST
चीन के रेगिस्तान में क्यों बना अमेरिकी नौसेना का टारगेट मॉडल?
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बीजिंग। चीन और अमेरिका के बीच जारी सैन्य प्रतिस्पर्धा के बीच एक नई जानकारी ने दुनिया का ध्यान खींचा है। सैटेलाइट तस्वीरों के जरिए दावा किया गया है कि चीन ने अपने शिनजियांग क्षेत्र के रेगिस्तान में अमेरिकी युद्धपोत का हूबहू ढांचा तैयार किया है। बताया जा रहा है कि इस मॉडल का इस्तेमाल मिसाइल परीक्षण और सैन्य अभ्यास के लिए किया जा रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने शिनजियांग के सुदूर इलाके में स्थित रुओकियांग टेस्ट रेंज में अमेरिका के अर्ले बर्क-क्लास डिस्ट्रॉयर जैसा एक नकली लक्ष्य बनाया है। यह युद्धपोत अमेरिकी नौसेना के सबसे अहम और आधुनिक विध्वंसक जहाजों में शामिल है। सैटेलाइट तस्वीरों में इस लक्ष्य संरचना के दिखाई देने के बाद रक्षा विशेषज्ञों ने चीन की रणनीति को लेकर सवाल उठाए हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के नकली लक्ष्य बनाकर चीन अपनी मिसाइल प्रणालियों और लंबी दूरी के हथियारों की क्षमता का परीक्षण कर सकता है। ऐसे अभ्यास से किसी संभावित संघर्ष की स्थिति में दुश्मन के सैन्य उपकरणों को निशाना बनाने की तैयारी की जाती है।

चीन और अमेरिका के बीच हिंद-प्रशांत क्षेत्र में लंबे समय से रणनीतिक प्रतिस्पर्धा चल रही है। ताइवान, दक्षिण चीन सागर और क्षेत्रीय प्रभाव को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव बना रहता है। ऐसे में अमेरिकी युद्धपोत के मॉडल का निर्माण सैन्य संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है।

अर्ले बर्क-क्लास डिस्ट्रॉयर अमेरिकी नौसेना के प्रमुख युद्धपोतों में से एक है, जो अत्याधुनिक रडार, मिसाइल सिस्टम और रक्षा तकनीक से लैस होता है। इस तरह के जहाजों को समुद्री सुरक्षा और सैन्य अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला माना जाता है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि चीन पहले भी विदेशी सैन्य उपकरणों के मॉडल बनाकर अपने परीक्षण करता रहा है। इससे पहले भी चीन के रेगिस्तानी इलाकों में अमेरिकी नौसेना के जहाजों और अन्य सैन्य ठिकानों जैसे नकली ढांचे देखे गए हैं।

हालांकि, चीन की ओर से इस मामले पर आधिकारिक तौर पर कोई बड़ा बयान सामने नहीं आया है। वहीं, अमेरिकी रक्षा विशेषज्ञ इस तरह की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं। उनका कहना है कि चीन की सैन्य तैयारियां उसकी बढ़ती रणनीतिक महत्वाकांक्षाओं को दर्शाती हैं।

सैन्य विशेषज्ञों के मुताबिक, आधुनिक युद्ध में मिसाइलों और लंबी दूरी के हथियारों की भूमिका काफी बढ़ गई है। ऐसे में किसी संभावित दुश्मन के हथियारों और प्लेटफॉर्म की नकल तैयार कर अभ्यास करना सैन्य तैयारी का हिस्सा माना जाता है।

चीन के इस कदम को लेकर वैश्विक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। रक्षा जानकारों का कहना है कि यह गतिविधि अमेरिका और चीन के बीच बढ़ती सैन्य प्रतिस्पर्धा का एक और संकेत हो सकती है। आने वाले समय में दोनों देशों की रणनीतिक गतिविधियों पर दुनिया की नजर बनी रहेगी।

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