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अमेरिका में वोटिंग विवाद, भारतीय नागरिक पर केस

Rajeshwari Nishad
16 Oct 2026 11:42 PM IST
अमेरिका में वोटिंग विवाद, भारतीय नागरिक पर केस
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वॉशिंगटन। अमेरिका में एक भारतीय नागरिक पर अमेरिकी नागरिकता का झूठा दावा करके राष्ट्रपति चुनाव में मतदान करने का गंभीर आरोप लगा है। अमेरिकी न्याय विभाग और गृह सुरक्षा विभाग के अनुसार, भारतीय नागरिक मुकेशकुमार सोमाभाई चौधरी के खिलाफ मिनेसोटा राज्य में वर्ष 2024 के आम चुनाव के दौरान कथित रूप से अवैध मतदान करने के मामले में आपराधिक कार्रवाई शुरू की गई है। संघीय ग्रैंड जूरी ने 10 सितंबर 2026 को उनके खिलाफ दो आरोपों में अभियोग तय किया था। यदि दोनों आरोपों में दोष सिद्ध होता है, तो उन्हें प्रत्येक आरोप में अधिकतम पांच वर्ष की जेल हो सकती है।
अमेरिकी न्याय विभाग ने इस मामले की जानकारी देते हुए कहा कि आरोपी ने चुनाव में मतदान करने के लिए स्वयं को अमेरिकी नागरिक बताया, जबकि वह अमेरिका का नागरिक नहीं था। अभियोजन पक्ष का आरोप है कि चौधरी ने मतदान के दौरान नागरिकता संबंधी घोषणा पर हस्ताक्षर किए और जानबूझकर गलत जानकारी दी। मामले की जांच अमेरिकी गृह सुरक्षा जांच एजेंसी होमलैंड सिक्योरिटी इन्वेस्टिगेशंस (HSI) कर रही है।
2024 के राष्ट्रपति चुनाव में मतदान करने का आरोप
अमेरिकी न्याय विभाग के अनुसार, यह मामला 5 नवंबर 2024 को हुए आम चुनाव से जुड़ा है। उस समय अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव के साथ विभिन्न पदों के लिए मतदान कराया गया था।
अभियोग में आरोप लगाया गया है कि मुकेशकुमार सोमाभाई चौधरी ने मिनेसोटा में मतदान करने के लिए जरूरी मतदाता हस्ताक्षर प्रमाणपत्र पर हस्ताक्षर किए थे।इस प्रमाणपत्र में मतदाता को यह घोषणा करनी होती है कि वह संयुक्त राज्य अमेरिका का नागरिक है और मतदान के लिए पात्र है।अभियोजन पक्ष का दावा है कि चौधरी अमेरिकी नागरिक नहीं थे, इसके बावजूद उन्होंने खुद को नागरिक बताते हुए मतदान किया।जांच एजेंसियों का आरोप है कि यह घोषणा अनजाने में नहीं, बल्कि जानबूझकर की गई थी।
10 सितंबर को संघीय ग्रैंड जूरी ने तय किए आरोप
मिनेसोटा की संघीय ग्रैंड जूरी ने 10 सितंबर 2026 को मुकेशकुमार सोमाभाई चौधरी के खिलाफ दो अलग-अलग आरोपों में अभियोग जारी किया।पहला आरोप मतदान से संबंधित प्रक्रिया में झूठी जानकारी देने का है।दूसरा आरोप मतदान करने या मतदाता के रूप में पंजीकरण कराने के उद्देश्य से अमेरिकी नागरिकता का गलत दावा करने से संबंधित है।अमेरिकी न्याय विभाग के अनुसार, मामला संघीय चुनाव कानूनों के उल्लंघन से जुड़ा है।
हालांकि, ग्रैंड जूरी की ओर से अभियोग जारी किए जाने का अर्थ यह नहीं है कि आरोपी दोषी सिद्ध हो चुका है। मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष को अदालत में आरोप प्रमाणित करने होंगे।
दोषी पाए जाने पर कितनी हो सकती है सजा?
इस मामले में चौधरी के खिलाफ अमेरिकी संघीय कानून की दो धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं।पहला आरोप 52 U.S.C. § 21144(b) तथा संबंधित 18 U.S.C. § 1015(f) के प्रावधानों से जुड़ा है।दूसरा आरोप अमेरिकी नागरिकता का झूठा दावा करके मतदान करने से संबंधित 18 U.S.C. § 1015(f) के तहत है।
अमेरिकी न्याय विभाग के अनुसार, प्रत्येक आरोप में अधिकतम पांच वर्ष की जेल का प्रावधान है।इस प्रकार दोनों आरोपों में अधिकतम सजा की अवधि जोड़ने पर दस वर्ष होती है। हालांकि, वास्तविक सजा क्या होगी, इसका निर्णय अदालत करेगी।दोष सिद्ध होने की स्थिति में न्यायाधीश अमेरिकी संघीय सजा संबंधी दिशानिर्देशों और अन्य कानूनी परिस्थितियों को ध्यान में रखकर फैसला सुनाएंगे।
अमेरिकी न्याय विभाग ने दिया बड़ा बयान
अमेरिकी न्याय विभाग के नागरिक अधिकार प्रभाग की सहायक अटॉर्नी जनरल हरमीत के. ढिल्लों ने मामले को लेकर चुनावी व्यवस्था की निष्पक्षता और सुरक्षा पर जोर दिया है।उन्होंने कहा कि मतदान का अधिकार अमेरिकी नागरिकता से जुड़ा महत्वपूर्ण अधिकार है और प्रत्येक वैध मतदाता को ऐसी चुनाव व्यवस्था मिलनी चाहिए, जिसमें उसके अधिकार सुरक्षित रहें।
उन्होंने स्पष्ट किया कि जो लोग जानबूझकर अमेरिकी नागरिकता का झूठा दावा करके मतदान करने का प्रयास करते हैं, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।न्याय विभाग का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए केवल पात्र नागरिकों का मतदान करना आवश्यक है।
अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग कर रहा जांच
मामले की जांच अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग के अंतर्गत काम करने वाली होमलैंड सिक्योरिटी इन्वेस्टिगेशंस एजेंसी कर रही है।इस जांच में मिनेसोटा के फिलमोर काउंटी शेरिफ कार्यालय की ओर से भी सहायता उपलब्ध कराई गई है।
अमेरिकी न्याय विभाग के नागरिक अधिकार प्रभाग की आपराधिक शाखा के ट्रायल अटॉर्नी फ्लावियो अब्रू और विलियम रूबेंस इस मामले में अभियोजन की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
जांच में मतदान से जुड़े रिकॉर्ड, नागरिकता संबंधी जानकारी और अन्य उपलब्ध दस्तावेज महत्वपूर्ण होंगे।फिलहाल चौधरी की गिरफ्तारी, जमानत अथवा आगामी सुनवाई की तारीख से संबंधित विस्तृत जानकारी सितंबर के आधिकारिक बयान में नहीं दी गई है।
अमेरिका में कौन कर सकता है मतदान?
अमेरिका के संघीय चुनावों में मतदान करने के लिए सामान्यतः अमेरिकी नागरिक होना आवश्यक है।मतदान की अन्य पात्रता शर्तें राज्यों के अनुसार अलग-अलग हो सकती हैं। इनमें आयु, निवास और मतदाता पंजीकरण से जुड़े नियम शामिल हैं।
अमेरिका में रहने वाला कोई विदेशी नागरिक केवल वहां निवास करने, नौकरी करने या स्थायी निवास की अनुमति प्राप्त होने के आधार पर संघीय चुनावों में मतदान का अधिकार नहीं प्राप्त कर लेता।किसी व्यक्ति के पास अमेरिकी ग्रीन कार्ड होने पर भी उसे सामान्यतः संघीय चुनावों में मतदान की अनुमति नहीं होती।ऐसे में जानबूझकर गलत नागरिकता संबंधी घोषणा करना गंभीर कानूनी परिणाम पैदा कर सकता है।
मिनेसोटा में अन्य विदेशी नागरिकों पर भी लगे आरोप
मुकेशकुमार चौधरी के मामले के अतिरिक्त मिनेसोटा में अन्य विदेशी नागरिकों के खिलाफ भी कथित चुनावी धोखाधड़ी की कार्रवाई की गई है।अमेरिकी न्याय विभाग ने 30 सितंबर 2026 को बताया कि संघीय ग्रैंड जूरी ने दस विदेशी नागरिकों के खिलाफ अलग-अलग अभियोग जारी किए हैं।
इन मामलों में वर्ष 2022 और 2024 के आम चुनावों तथा अगस्त 2026 के प्राथमिक चुनाव में कथित अवैध मतदान और नागरिकता का झूठा दावा करने के आरोप शामिल हैं।विभिन्न देशों के नागरिकों के खिलाफ ये मामले अलग-अलग दर्ज किए गए हैं।अधिकारियों के अनुसार, इन मामलों की जांच भी होमलैंड सिक्योरिटी इन्वेस्टिगेशंस ने की थी।
चुनावी प्रक्रिया की सुरक्षा पर अमेरिकी एजेंसियों का जोर
अमेरिकी सरकार चुनावों में मतदाता पात्रता और नागरिकता संबंधी नियमों के अनुपालन पर जोर दे रही है।अधिकारियों का कहना है कि चुनावों में गलत जानकारी देकर मतदान करने वालों के खिलाफ संघीय कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है।हालांकि, किसी एक व्यक्ति के खिलाफ आरोप लगने या अभियोग जारी होने से व्यापक चुनावी धांधली का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।प्रत्येक मामले में अलग-अलग साक्ष्यों और कानूनी तथ्यों के आधार पर निर्णय लिया जाना आवश्यक है।
अदालत के फैसले पर टिकी नजर
भारतीय नागरिक मुकेशकुमार सोमाभाई चौधरी के खिलाफ दर्ज यह मामला अब अमेरिकी संघीय न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा है।अभियोजन पक्ष को यह प्रमाणित करना होगा कि आरोपी ने जानबूझकर अमेरिकी नागरिकता का झूठा दावा किया और मतदान संबंधी कानूनों का उल्लंघन किया।वहीं, आरोपी को अदालत में अपना पक्ष रखने और कानूनी बचाव प्रस्तुत करने का अधिकार है।
अमेरिकी न्याय विभाग ने भी स्पष्ट किया है कि अभियोग केवल आरोपों का औपचारिक विवरण है। किसी भी व्यक्ति को तब तक निर्दोष माना जाता है, जब तक न्यायालय में उसका अपराध संदेह से परे प्रमाणित नहीं हो जाता।अब इस मामले में आगे की सुनवाई और न्यायालय के फैसले पर नजर रहेगी।
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