
China चीन : भारत के राजदूत विक्रम दोराईस्वामी ने शनिवार को कहा कि चीन द्वारा भारतीय उत्पादों, विशेषकर फार्मास्यूटिकल्स के लिए अपना बाजार खोलना और भारत में निवेश बढ़ाना दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों के लिए सकारात्मक कदम होगा। उन्होंने कहा कि ऐसे कदम भारत-चीन आर्थिक रिश्तों को और मजबूत बना सकते हैं।
राजदूत ने यह बात चीन की सिंघुआ यूनिवर्सिटी द्वारा आयोजित वर्ल्ड पीस फोरम में ‘प्रोटेक्शनिज़्म और ग्लोबल इकोनॉमिक गवर्नेंस’ विषय पर आयोजित एक पैनल चर्चा के दौरान कही। इस चर्चा में वैश्विक व्यापार, आर्थिक नीतियों और संरक्षणवाद के प्रभावों पर विचार-विमर्श किया गया।
विक्रम दोराईस्वामी ने अपने संबोधन में कहा कि भारत का लक्ष्य चीन सहित विभिन्न देशों को अधिक निर्यात बढ़ाना है। उन्होंने विशेष रूप से फार्मास्यूटिकल सेक्टर का उल्लेख करते हुए कहा कि इस क्षेत्र में भारत के पास मजबूत प्रतिस्पर्धात्मक लाभ (कॉम्पिटिटिव एडवांटेज) है और इसे वैश्विक बाजारों में और अधिक विस्तार देने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि यदि चीन अपने बाजार को भारतीय उत्पादों के लिए और अधिक खोलता है, तो इससे न केवल व्यापार संतुलन बेहतर होगा, बल्कि दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग भी मजबूत होगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि निवेश के क्षेत्र में सहयोग बढ़ने से दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को लाभ मिल सकता है।
राजदूत ने कहा कि “हम चीन को अधिक निर्यात करना चाहेंगे, और यह सुझाव देना बिल्कुल सही है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां भारत की क्षमता अधिक है, जैसे कि फार्मास्यूटिकल्स।” उनके अनुसार, भारत के दवा उद्योग में गुणवत्ता और उत्पादन क्षमता दोनों मजबूत हैं, जिससे वैश्विक बाजार में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में बढ़ते संरक्षणवाद (प्रोटेक्शनिज़्म) के बीच देशों को खुली और संतुलित व्यापार नीति अपनाने की जरूरत है, ताकि वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित न हो।
कार्यक्रम में उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भारत और चीन जैसे बड़े देशों के बीच आर्थिक सहयोग वैश्विक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण है। यदि दोनों देश मिलकर व्यापार और निवेश को बढ़ावा देते हैं, तो इससे न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का फार्मास्यूटिकल सेक्टर वैश्विक स्तर पर तेजी से विस्तार कर रहा है और चीन जैसे बड़े बाजार में इसकी पहुंच बढ़ने से उद्योग को बड़ा फायदा मिल सकता है।
विक्रम दोराईस्वामी के इस बयान को भारत-चीन आर्थिक संबंधों में संभावित सुधार और व्यापारिक अवसरों के विस्तार के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि दोनों देशों के बीच कई राजनीतिक और रणनीतिक मुद्दे भी मौजूद हैं, लेकिन आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाने की संभावनाएं लगातार चर्चा में रहती हैं।
कुल मिलाकर, राजदूत का यह बयान इस बात पर जोर देता है कि आपसी व्यापार और निवेश के जरिए भारत और चीन अपने आर्थिक संबंधों को अधिक संतुलित और मजबूत बना सकते हैं, जिससे दोनों देशों को दीर्घकालिक लाभ मिल सके।





