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Valentine Day: चांद को कब्ज़ाने की तैयारी में जुट गए धरती लोक के लोग, कम होगा धरती का बोझ

Gulabi
12 Feb 2022 4:07 PM GMT
Valentine Day: चांद को कब्ज़ाने की तैयारी में जुट गए धरती लोक के लोग, कम होगा धरती का बोझ
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कम होगा धरती का बोझ
इस वैलेनटाइन डे पर अपनी माशूका को चांद-तारे तोड़ कर लाने का सपना दिखाने वालों के लिए एक अच्छी खबर है. अब आप चांद को तोहफे में देने का ख्वाब जल्द ही पूरा कर सकेंगे. क्योंकि चांद की ज़मीन को अब किराए पर देने की योजना (Plan to rent the land of the moon) पर विचार तेज़ हो रहा है. अगर बात बन गई तो वो दिन दूर नहीं जब लोग वैकेशन के लिए गोवा, मसूरी नहीं बल्कि 'चांद' पर जाएंगे. और हनी'मून' के लिए वाकई 'मून' पर जाने लगेंगे.
सरकारी संस्थाओं के निजीकरण की ही तर्ज पर अब चांद का भी निजीकरण (Privatise the moon) किया जाएगा. ऐसा होने वाला है. सुनकर चौंकिए मत, क्योंकि अगर विशेषज्ञों की योजना पर हर देश राज़ी हो गए तो बहुत जल्द ऐसा होता दिखाई और सुनाई देगा. फिर चंद्रमा पर किराए पर ज़मीनें मिलने लगेंगी. आप भी चांद पर बंगला बनाने का सपना देख पाएंगे. हालांकि उसका किराया हमारी-आपकी जेब पर क्या कहर ढाएगा. इस पर अभी नीति तैयार नही लग रही.
धरती का बोझ होगा कम
विशेषज्ञों के मुताबिक धरती की गरीबी हटाने के लिए (Planning To remove the poverty of the earth) अर्थशास्त्रियों ने एक कमाल की योजना तैयार की है. योजना है चांद को किराए पर चढ़ाने की. जी हां, जल्द ही चांद का निजीकरण कर उसे अलग-अलग देशों में बांट दिए जाना का प्लान हैं. ताकि हर देश अपने हिसाब से, अपने हिस्से की चांद की ज़मीन को किराए पर देकर उससे धन कमा सकें. फिर उसी धन से धरती पर गरीबों की बढ़ती संख्या पर रोक लगाई जा सके. अलग-अलग देशों में बंटवारे के पीछे तर्क है की इतने बड़े चांद को संभालना एक देश के बस की बात नहीं होगी. एकाधिकार का संकट होगा सो अलग.
चांद पर जमा मलबा साफ करना बड़ी चुनौती
एडम स्मिथ संस्थान का दावा है कि धरता से 2 लाख 39 हज़ीर मील दूर स्थित चांद को ज़मीन के अलग-अलग हिस्सों में बांट कर विभिन्न देशों को सौंप देना डांद और धरीत दोनों के लिहाज़ से एक बेहतर विकल्प साबित होगा. फिर हर देश अपने ज़रूरत और सहूलियत के हिसाब से अपना ज़मीन का टुकड़ा किसी व्यवसाय के लिए उद्योगपतियों या धनकुबेरों को दे सकेगा. इस विभाजन की योजना के पीछे एक तर्क ये भी है कि दशकों से अंतरिक्ष में जो कचरा इकट्टा होता जा रहा है. उसे साफ करने में भी मदद मिलेगी. आपको बता दें कि अंतरिक्ष में मलबे के तौर पर तकरीबन 3,000 मृत उपग्रह (Dead satellites), कबाड़ के तौर पर 10सेमी से बड़े 34,000 टुकड़े (Pieces of junks) और लाखों छोटे बिट्स (Smaller bits) से पटे पड़े हैं. जो कभी नई खोज़ों तो कभी ज़रुरतों के नाम पर हर देश ने मिलकर वहां जमा किया है. फिलहाल 1967 में संयुक्त राष्ट्र में तैयार अंतरिक्ष संधि के अनुसार किसी भी देश या व्यक्ति को अंतरिक्ष में संपत्ति रखने का अधिकार नहीं है. लिहाज़ा एडम स्मिथ संस्थान ने देशों को चंद्रमा और अंतरिक्ष को विभाजित करने वाले नए मत पर सहमत होने पर विचार का आग्रह किया है.
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