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Washington वॉशिंगटन : अमेरिकी सेना दुश्मन के ड्रोन को मार गिराने के लिए बनाए गए हाई-एनर्जी लेज़र और हाई-पावर माइक्रोवेव का एक साल तक ऑपरेशनल टेस्ट करने की योजना बना रही है। सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी।
जॉइंट इंटरएजेंसी टास्क फोर्स 401 के डायरेक्टर, ब्रिगेडियर जनरल मैट रॉस ने कहा कि इन सिस्टम को किसी मिलिट्री बेस पर लगाया जाएगा और सेना के जवान 365 दिनों तक इन्हें ऑपरेट और मेंटेन करेंगे।
इस ट्रायल में यह देखा जाएगा कि क्या डायरेक्टेड-एनर्जी हथियारों का इस्तेमाल भरोसेमंद तरीके से किया जा सकता है, बिना बेस के ज़रूरी कामकाज में रुकावट डाले या उसके एयरस्पेस में दखल दिए।
रॉस ने सेना, फेडरल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन और डिपार्टमेंट ऑफ़ होमलैंड सिक्योरिटी के अधिकारियों के साथ एक मीडिया राउंडटेबल के दौरान कहा, "यह डायरेक्टेड एनर्जी का एक पायलट प्रोजेक्ट है।"
उन्होंने कहा, "जब हम डायरेक्टेड एनर्जी कहते हैं, तो इस शब्द में सभी नई टेक्नोलॉजी शामिल होती हैं, लेकिन अभी हमारा मुख्य फोकस हाई-एनर्जी लेज़र और हाई-पावर माइक्रोवेव पर है।"
रॉस ने कहा कि टेस्ट से यह साबित हो चुका है कि दोनों टेक्नोलॉजी ड्रोन को नष्ट या बेकार कर सकती हैं। अगली चुनौती यह पता लगाना है कि लंबे समय तक ऑपरेशनल स्थितियों में ये कैसा काम करेंगी।
उन्होंने कहा, "हमारे पास कई सिस्टम हैं और हमने साबित कर दिया है कि यह साइंस काम करती है। आप हाई-एनर्जी लेज़र और हाई-पावर माइक्रोवेव, दोनों से ड्रोन को मार गिरा सकते हैं। लेकिन हमें यह पता लगाना है कि ऑपरेशनल माहौल में इनका सफलतापूर्वक इस्तेमाल कैसे किया जाए।"
इस पायलट प्रोजेक्ट में बिजली की ज़रूरत, मेंटेनेंस की ज़रूरत, ऑपरेशनल लागत और हर सिस्टम कितने दिन इस्तेमाल के लिए उपलब्ध रहता है, इन बातों का आकलन किया जाएगा।
अधिकारी यह भी देखेंगे कि हथियारों की मरम्मत या सपोर्ट के लिए कब खास टेक्निकल कर्मचारियों की ज़रूरत पड़ती है।
रॉस ने कहा, "मैं चाहता हूं कि उन सिस्टम को किसी मिलिट्री बेस पर लगाया जाए और सेना के जवान ही उन्हें चलाएं, ऑपरेट करें और मेंटेन करें।"
उन्होंने कहा, "मैं जानना चाहता हूं कि 365 दिनों की अवधि में उनकी बिजली की ज़रूरतें क्या हैं। वे कितने दिन ऑपरेशनल रूप से काम करने लायक रहते हैं और कितने दिन उन्हें मरम्मत की ज़रूरत होती है?"
इन नतीजों से सेना को डायरेक्टेड-एनर्जी सिस्टम की लागत और असर की तुलना ड्रोन को मार गिराने के पारंपरिक तरीकों से करने में मदद मिलेगी।
रॉस ने कहा कि सेना को ऐसी रणनीतियां, तकनीकें और प्रक्रियाएं भी विकसित करनी होंगी जिनसे इन हथियारों का इस्तेमाल बेस के आस-पास सामान्य हवाई गतिविधियों को रोके बिना किया जा सके।
उन्होंने कहा, "मैं नहीं चाहता कि इन सिस्टम का इस्तेमाल करते समय एयरस्पेस को बंद करना पड़े।" डिपार्टमेंट ऑफ़ होमलैंड सिक्योरिटी के अधिकारी स्टीव विलोबी ने कहा कि ड्रोन लोगों की सुरक्षा और सरकारी एजेंसियों के लिए बहुत काम के साधन बन गए हैं, लेकिन बुरे इरादे वाले लोग इनका गलत इस्तेमाल भी कर सकते हैं।
विलोबी ने कहा, "ड्रोन और उनके इस्तेमाल से लोगों और हमारी संपत्तियों की सुरक्षा होती है, जानें बचती हैं और हम कम संसाधनों में ज़्यादा काम कर पाते हैं, जो आज के सरकारी कामकाज के माहौल में बहुत ज़रूरी है।"
उन्होंने आगे कहा, "दूसरी तरफ़, बात यह है कि हम अच्छे कामों को कैसे बढ़ावा दें और बुरे कामों को कैसे रोकें।"
विलोबी ने वर्ल्ड कप का उदाहरण दिया, जिसमें अधिकारियों ने स्टेडियम, ज़रूरी इंफ्रास्ट्रक्चर और फ़ैन ज़ोन के आस-पास उड़ान पर पाबंदी लगाई, साथ ही अधिकृत मीडिया, डिलीवरी और जन-सुरक्षा वाले ड्रोनों का प्रबंधन भी किया।
यह टास्क फ़ोर्स मिलिट्री बेस, मनोरंजन की जगहों, सार्वजनिक सभाओं और ज़रूरी इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा के लिए फ़ेडरल, राज्य और स्थानीय एजेंसियों के साथ मिलकर काम करती है। अधिकारियों ने बताया कि इसके मिशन में रोकथाम, तैयारी, ड्रोन का पता लगाना, जोखिम कम करना, विस्फोटक सुरक्षा, फ़ोरेंसिक, इंटेलिजेंस और जांच शामिल हैं।
यूक्रेन और दूसरे संघर्षों में सस्ते मानवरहित विमानों (ड्रोन) के बढ़ते इस्तेमाल ने काउंटर-ड्रोन टेक्नोलॉजी में अंतरराष्ट्रीय दिलचस्पी बढ़ा दी है। लेज़र से अलग-अलग टारगेट को निशाना बनाया जा सकता है, जबकि हाई-पावर माइक्रोवेव सिस्टम कई ड्रोनों के इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम को खराब कर सकते हैं।
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