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रूस से डीजल खरीदने की कथित डील पर अमेरिकी सीनेटर भड़के

Kavita2
10 Oct 2026 11:24 AM IST
रूस से डीजल खरीदने की कथित डील पर अमेरिकी सीनेटर भड़के
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वॉशिंगटन। रूस से डीजल खरीदने को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच कथित समझौते पर अमेरिका में राजनीतिक सवाल उठे हैं। डेमोक्रेटिक सीनेटर रिचर्ड ब्लुमेंथल ने इस कदम की कड़ी आलोचना करते हुए इसे शर्मनाक बताया है। रूस के खिलाफ प्रतिबंधों से जुड़े विधायी प्रयासों में शामिल रहे ब्लुमेंथल ने मॉस्को से ईंधन खरीदने के फैसले पर आपत्ति जताई है।

यह विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब रूस के साथ व्यापार, ऊर्जा खरीद और आर्थिक प्रतिबंधों को लेकर अमेरिकी नीति पर चर्चा जारी है। हालांकि, ट्रंप और पुतिन के बीच डीजल खरीद के किसी औपचारिक समझौते की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। इसलिए इसे फिलहाल कथित समझौते के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

रूस से तीन लाख टन से अधिक डीजल आपूर्ति की घोषणा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 9 अक्टूबर को घोषणा की कि रूस तत्काल अमेरिकी और वैश्विक बाजारों में तीन लाख मीट्रिक टन से अधिक डीजल उपलब्ध कराएगा। इसके बाद नवंबर में पांच लाख टन और आगे दस लाख टन अतिरिक्त आपूर्ति की योजना है।

ट्रंप प्रशासन का कहना है कि इस व्यवस्था से ईंधन की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। अमेरिका में डीजल की ऊंची कीमतों के कारण परिवहन, कृषि और अन्य क्षेत्रों पर आर्थिक दबाव बढ़ा है।

समझौते के साथ अमेरिकी प्रशासन ने रूसी डीजल से संबंधित कुछ प्रतिबंधों में अस्थायी छूट भी दी है। यह कदम रूस के ऊर्जा निर्यात पर पहले से लागू अमेरिकी दबाव की नीति में बदलाव माना जा रहा है।

ब्लुमेंथल ने समझौता रद्द करने की मांग की

सीनेटर रिचर्ड ब्लुमेंथल ने 9 अक्टूबर को जारी अपने आधिकारिक बयान में ट्रंप प्रशासन के फैसले की तीखी आलोचना की। उन्होंने कहा कि रूसी डीजल पर प्रतिबंध हटाना अमेरिका के लिए शर्मनाक है और इससे यूक्रेन के खिलाफ रूस के युद्ध को आर्थिक सहायता मिलने का खतरा है।

ब्लुमेंथल ने आरोप लगाया कि यह समझौता रूस के खिलाफ अमेरिकी कांग्रेस की ओर से अपनाई गई नीति के विपरीत है। उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप से इस फैसले को तत्काल वापस लेने की मांग की।

उन्होंने उन अमेरिकी कंपनियों को भी चेतावनी दी, जो रूसी डीजल से जुड़े कारोबार में शामिल होने पर विचार कर रही हैं। ब्लुमेंथल ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस ऐसे व्यावसायिक निर्णयों पर नजर रखेगी।

रूस और ईरान पर प्रतिबंध लगाने वाला कानून चर्चा में

रिचर्ड ब्लुमेंथल दिवंगत रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम के साथ रूस और ईरान के खिलाफ प्रतिबंधों से जुड़े विधायी प्रयासों में शामिल रहे थे।

इस कानून का उद्देश्य रूस से तेल और गैस खरीदकर उसकी अर्थव्यवस्था को सहायता देने वाले देशों तथा संस्थाओं पर आर्थिक दबाव बढ़ाना था। कानून में लक्षित प्रतिबंधों और चुनिंदा आयातक देशों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने की व्यवस्था शामिल की गई।

अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों में इस कानून को व्यापक समर्थन मिला था। ब्लुमेंथल का कहना है कि ऐसे समय में रूस से डीजल खरीदने का फैसला कांग्रेस की उस मंशा के खिलाफ जाता है, जिसके तहत रूस की युद्ध संबंधी आय सीमित करने का प्रयास किया गया था।

यूक्रेन ने भी जताई आपत्ति

रूस से डीजल आपूर्ति की घोषणा के बाद यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने भी अमेरिकी फैसले की आलोचना की।

जेलेंस्की ने आशंका जताई कि रूसी ऊर्जा उत्पादों की बिक्री से मिलने वाली अतिरिक्त आय का उपयोग रूस अपने सैन्य अभियान को जारी रखने में कर सकता है।

दूसरी ओर, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अमेरिकी और वैश्विक बाजारों में ऊर्जा आपूर्ति की तत्परता जताई है। रूस का पक्ष है कि अतिरिक्त आपूर्ति से अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार को लाभ मिल सकता है।

डीजल की कीमतों पर कितना असर पड़ेगा?

अमेरिकी प्रशासन ने इस समझौते को ईंधन की बढ़ती कीमतों से राहत दिलाने की कोशिश के रूप में प्रस्तुत किया है। हालांकि, ऊर्जा विशेषज्ञों का आकलन है कि रूसी डीजल की अतिरिक्त आपूर्ति से अमेरिकी बाजार में कीमतों पर सीमित असर पड़ सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक ईंधन बाजार में आपूर्ति और मांग की स्थिति जटिल बनी हुई है। ऐसे में अतिरिक्त डीजल की उपलब्धता से कुछ क्षेत्रों में राहत मिल सकती है, लेकिन इससे व्यापक स्तर पर कीमतें कितनी घटेंगी, यह अभी निश्चित नहीं है।

अमेरिकी विदेश नीति पर उठे सवाल

इस फैसले के बाद अमेरिका में ऊर्जा सुरक्षा और विदेश नीति के बीच संतुलन को लेकर बहस तेज हो गई है।

एक ओर ट्रंप प्रशासन घरेलू ईंधन कीमतों को कम करने के लिए रूस से आपूर्ति बढ़ाने का प्रयास कर रहा है। दूसरी ओर, कई अमेरिकी सांसदों का कहना है कि इससे रूस पर आर्थिक दबाव बनाने की नीति कमजोर हो सकती है।

सीनेटर जीन शाहीन, चक शूमर और एलिजाबेथ वॉरेन ने भी रूसी डीजल पर प्रतिबंधों में छूट देने की आलोचना की है। उनका आरोप है कि यह कदम यूक्रेन और अमेरिका के यूरोपीय सहयोगियों के हितों को प्रभावित कर सकता है।

फिलहाल, ट्रंप-पुतिन डीजल समझौते को लेकर अमेरिकी राजनीति में विवाद बढ़ गया है। अब इस बात पर नजर रहेगी कि ट्रंप प्रशासन प्रतिबंधों में दी गई छूट को जारी रखता है या कांग्रेस और अन्य पक्षों की आपत्तियों के बाद अपनी नीति में बदलाव करता है।

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