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संयुक्त राष्ट्र बजट में बड़ी कटौती की अमेरिकी मांग

Tara Tandi
26 Sept 2026 1:24 PM IST
संयुक्त राष्ट्र बजट में बड़ी कटौती की अमेरिकी मांग
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संयुक्त राष्ट्र: अमेरिकी विदेश विभाग के एक प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिका संयुक्त राष्ट्र के बजट में 1 अरब डॉलर से ज़्यादा की कटौती करने पर ज़ोर दे रहा है और उसने 4,000 ऐसे पदों की पहचान की है जिन्हें खत्म किया जा सकता है।
विभाग के डिप्टी प्रवक्ता ल्यूक ओर्टेगा ने कहा कि ये बदलाव ट्रंप प्रशासन की उस कोशिश का हिस्सा हैं, जिसका मकसद संयुक्त राष्ट्र के काम को सीमित करना और शांति व समृद्धि को उसके केंद्र में लाना है। उन्होंने कहा कि इस मुहिम से अमेरिकी टैक्सपेयर्स के सालाना 26 करोड़ डॉलर से ज़्यादा की बचत हुई है। उन्होंने इस बचत का ब्योरा नहीं दिया।
ओर्टेगा ने मीडिया को दिए एक खास इंटरव्यू में कहा, "संयुक्त राष्ट्र को उसकी बुनियादी और असली ज़िम्मेदारियों पर वापस लाना, उससे कम काम करवाना और उस काम को बेहतर ढंग से करवाना अमेरिका की सर्वोच्च प्राथमिकता है।"
उन्होंने प्रस्तावित बजट और स्टाफिंग में बदलाव को अभी चल रही प्रक्रिया बताया। उनके आंकड़े उन पदों से जुड़े थे जिन्हें खत्म किया जा सकता है, न कि नौकरियों के नुकसान की पक्की संख्या से।
ओर्टेगा ने कहा कि वॉशिंगटन चाहता है कि संगठन शांति, समृद्धि और देशों की संप्रभुता के सम्मान पर ध्यान दे। उन्होंने कहा कि संगठन को उस दिशा में ले जाने के लिए बजट और उसके आकार, दोनों पर काम किया जा रहा है।
उन्होंने कहा, "पिछले छह महीनों में हमने संयुक्त राष्ट्र के बजट में 1 अरब डॉलर से ज़्यादा की कटौती करने और संगठन में 4,000 ऐसे प्रशासनिक पदों की पहचान करने की दिशा में कदम उठाए हैं जिन्हें खत्म किया जा सकता है।"
उन्होंने इस कोशिश को आगे बढ़ाने में संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी राजदूत माइक वाल्ट्ज़ की भूमिका का ज़िक्र किया। ओर्टेगा ने कहा कि काम जारी है और इसका मकसद संगठन को उन कामों को बेहतर ढंग से करने के काबिल बनाना है जिन्हें वॉशिंगटन उसकी मुख्य ज़िम्मेदारियां मानता है।
प्रशासन की चिंता सिर्फ़ खर्च तक सीमित नहीं थी। ढांचागत सुधार के बारे में पूछे जाने पर ओर्टेगा ने कहा कि पहला सवाल यह है कि कौन से काम संयुक्त राष्ट्र के दायरे में आते हैं और कौन से नहीं।
उन्होंने कहा, "हमारे लिए, जब हम संयुक्त राष्ट्र में सुधार की बात करते हैं तो सबसे अहम बात यही होती है कि उसे क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए?"
ओर्टेगा ने ग्लोबल शिपिंग से जुड़े इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गनाइज़ेशन के एक प्रस्ताव की राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा की गई आलोचना की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा कि वॉशिंगटन उन अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के फैसलों का विरोध करता है जो बिना चुने हुए अधिकारियों के ही जनता पर बोझ डाल सकते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि झगड़ों को सुलझाने में UN की भूमिका ज़्यादा मज़बूत होनी चाहिए। ओर्टेगा ने समझौतों को कराने में ट्रंप की मदद का ज़िक्र किया और कहा कि वॉशिंगटन चाहता है कि अंतरराष्ट्रीय संगठन ऐसे कामों में ज़्यादा असरदार हों।
उन्होंने कहा कि जब ये संस्थाएँ काम नहीं कर पाएँगी, तो अमेरिका कार्रवाई करता रहेगा। "हम अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करते रहेंगे और सचमुच दुनिया भर के बहुत से लोगों के लिए शांति और अवसर भी लाएँगे।"
ओर्टेगा ने कहा कि वॉशिंगटन दूसरे देशों को यह देखने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है कि क्या अंतरराष्ट्रीय संस्थाएँ अपने सदस्यों के हितों के लिए काम कर रही हैं। उन्होंने जाँच के लायक संस्थाओं में इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट का ज़िक्र किया और साथ ही यह भी कहा कि अमेरिका भी अपनी भागीदारी को इस आधार पर परखेगा कि क्या उससे अमेरिका के हितों को फ़ायदा पहुँचता है।
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