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Washington वाशिंगटन। अमेरिकी वित्तीय विभाग के तहत कार्यरत विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (ओएफएसी) ने मैक्सिको के कुख्यात सिनालोआ कार्टेल से जुड़े सिंथेटिक ओपिओइड नेटवर्क पर बड़ी कार्रवाई करते हुए 23 व्यक्तियों और संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाया है। भारत स्थित अमेरिकी दूतावास के अनुसार ड्रग तस्करी में लिप्त आपराधिक नेटवर्क पर नकेल कसने में भारतीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने भी पूरी मदद की।
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, यह नेटवर्क एशिया से फेंटेनिल जैसे घातक ड्रग्स के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले प्रीकर्सर केमिकल्स की आपूर्ति करता था, जिन्हें बाद में मैक्सिको स्थित अवैध प्रयोगशालाओं में सिंथेटिक नशीले पदार्थों में बदला जाता था। इस कार्रवाई के बाद नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास ने भारत की मदद को सराहते हुए कहा कि भारतीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों की भूमिका इस आपराधिक नेटवर्क को बाधित करने में “महत्वपूर्ण” रही है।
दूतावास ने एक बयान में कहा, “संयुक्त राज्य अमेरिका भारतीय कानून प्रवर्तन के साथ अपनी साझेदारी की तहेदिल से सराहना करता है, जिसने इस आपराधिक नेटवर्क के प्रमुख हिस्सों को तोड़ने में अहम योगदान दिया। ये कार्टेल्स को अवैध ड्रग्स के उत्पादन और तस्करी के लिए प्रीकर्सर केमिकल्स (वे पदार्थ जिनका उपयोग अवैध ड्रग्स बनाने में होता है) उपलब्ध कराता था।”
अमेरिकी वित्त मंत्रालय के अनुसार, ये नेटवर्क अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन का दुरुपयोग करते हुए केमिकल्स को अक्सर “सुरक्षित पदार्थ” बताकर गलत लेबलिंग के साथ भेजते थे। इसके बाद इन्हें मैक्सिको और ग्वाटेमाला में मौजूद ड्रग लैब्स तक पहुंचाया जाता था, जहां से तैयार ड्रग्स अमेरिका के बाजारों तक पहुंचती थीं।
ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट का इस बयान में जिक्र किया गया। जिन्होंने कहा, "राष्ट्रपति ट्रंप ने यह साफ कर दिया है कि आतंकवादी गिरोहों को हमारी सीमाओं और हमारे समुदायों में तबाही मचाने की इजाजत नहीं दी जाएगी। ट्रेजरी अमेरिका को सुरक्षित रखने और फेंटानिल के कारण होने वाली मौतों को रोकने के लिए ओपिओइड सप्लाई चेन के हर चरण को निशाना बनाना जारी रखेगी।"
अधिकारियों का कहना है कि फेंटेनिल और मेथामफेटामिन जैसे सिंथेटिक ड्रग्स अमेरिका में हर साल हजारों की मौत का कारण बन रहे हैं और इन पर अंकुश लगाना राष्ट्रीय सुरक्षा का महत्वपूर्ण मुद्दा बन चुका है।
यह कार्रवाई अमेरिकी सरकार की “होल-गवर्मेंट” रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत ड्रग सप्लाई चेन के हर स्तर—केमिकल सप्लायर, ब्रोकर, वित्तीय नेटवर्क और तस्करी चैनलों—को निशाना बनाया जा रहा है।
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