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अमेरिका ने 2 भारतीय कंपनियों पर कसा शिकंजा

nidhi
9 Oct 2026 6:44 AM IST
अमेरिका ने 2 भारतीय कंपनियों पर कसा शिकंजा
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तेल कारोबार पर अमेरिका सख्त
वाशिंगटन/मुंबई: अमेरिका ने ईरान के साथ तेल और पेट्रोलियम उत्पादों के कारोबार को लेकर बड़ी कार्रवाई की है। अमेरिकी सरकार ने गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026 को मुंबई स्थित दो कंपनियों और उनसे जुड़े पांच भारतीय नागरिकों पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की। अमेरिका का आरोप है कि इन कंपनियों और व्यक्तियों ने ईरानी पेट्रोलियम उत्पादों के व्यापार में भूमिका निभाई। यह कार्रवाई अमेरिकी सरकार के 'ऑपरेशन इकोनमिक आउटकास्ट' अभियान के तहत की गई है, जिसका उद्देश्य ईरान के तेल कारोबार से होने वाली कमाई को सीमित करना है।
अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, प्रतिबंधों के दायरे में मुंबई की एसएसपीएल सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड और समुद्र मरीन सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड को शामिल किया गया है। दोनों कंपनियों पर ईरान से पेट्रोलियम उत्पादों के आयात और उससे जुड़े कारोबार में सहायता करने का आरोप लगाया गया है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि ईरान पर पहले से लागू आर्थिक प्रतिबंधों के बावजूद कुछ कारोबारी नेटवर्क पेट्रोलियम उत्पादों की खरीद-बिक्री में सक्रिय रहे हैं।
इस कार्रवाई के तहत पांच भारतीय नागरिकों पर भी प्रतिबंध लगाए गए हैं। एसएसपीएल सॉल्यूशंस से जुड़े ध्वनि वोरा और निसर्ग वोरा के नाम सूची में शामिल हैं। वहीं, समुद्र मरीन सर्विसेज से जुड़े केतन कोचिकर, भूपेंद्रसिंह साहू और हरिश्याम हरिहरन चुंडाकट्टिल पर भी कार्रवाई की गई है। इन व्यक्तियों को संबंधित कंपनियों से जुड़े प्रतिबंधित लेन-देन करने से रोक दिया गया है। अमेरिकी विदेश विभाग ने बताया कि इस व्यापक कार्रवाई में कुल 10 कंपनियों, छह व्यक्तियों और पांच जहाजों को निशाना बनाया गया है। ये प्रतिबंध ईरानी मूल के कच्चे तेल, पेट्रोलियम उत्पादों और पेट्रोकेमिकल वस्तुओं के व्यापार से संबंधित हैं। अमेरिका का दावा है कि ऐसे कारोबारी नेटवर्क के माध्यम से ईरान सरकार तक लाखों डॉलर पहुंचे हैं।
अमेरिकी प्रशासन के मुताबिक, पेट्रोलियम और पेट्रोकेमिकल उत्पादों से मिलने वाला राजस्व ईरान की आय का महत्वपूर्ण स्रोत है। अमेरिका का आरोप है कि इस कमाई का इस्तेमाल ईरान अपनी सैन्य और अन्य प्रतिबंधित गतिविधियों को आगे बढ़ाने में करता है। अमेरिकी सरकार ने स्पष्ट किया है कि उसके प्रतिबंध केवल ईरानी कंपनियों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि व्यापार को सुविधाजनक बनाने वाले विदेशी खरीदारों और विक्रेताओं पर भी कार्रवाई की जाएगी।
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि ईरान को प्रतिबंधों से बचने में सहायता करने वालों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि अमेरिकी वित्त विभाग ईरानी तेल की बिक्री में मदद करने वाले नेटवर्क की पहचान कर रहा है। इसके तहत संदिग्ध कारोबारी गतिविधियों और तेल परिवहन में इस्तेमाल होने वाले जहाजों को भी निशाना बनाया जा रहा है। अमेरिका ने समुद्र मरीन सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड को मौजूदा कारोबार समेटने के लिए 23 अक्टूबर 2026 तक सीमित अवधि की अनुमति दी है। इस व्यवस्था को विंड-डाउन कहा जाता है। इसके अंतर्गत निर्धारित शर्तों के अनुसार कुछ मौजूदा लेन-देन पूरे किए जा सकते हैं, ताकि प्रतिबंधित गतिविधियों को बंद किया जा सके। यह अनुमति सामान्य कारोबार जारी रखने की खुली छूट नहीं है।
अमेरिका ने ईरानी तेल के परिवहन से जुड़े जहाजों और कारोबारी संस्थाओं पर भी नए प्रतिबंध लगाए हैं। अमेरिकी वित्त विभाग के मुताबिक, कार्रवाई का उद्देश्य ईरान के उन परिवहन और व्यापार नेटवर्क को कमजोर करना है, जिनके जरिए प्रतिबंधों के बावजूद तेल निर्यात किया जाता है। मुंबई की कंपनियों और भारतीय नागरिकों पर लगाए गए इन प्रतिबंधों से अंतरराष्ट्रीय तेल कारोबार से जुड़े व्यवसायों के लिए अनुपालन का सवाल महत्वपूर्ण हो गया है। अमेरिकी प्रतिबंधों के अंतर्गत आने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं के साथ वित्तीय लेन-देन पर कानूनी पाबंदियां लागू हो सकती हैं।
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