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भारत दौरे पर अमेरिकी कमांडर पापारो रक्षा सहयोग पर होगी अहम चर्चा

Ratna Netam
3 Oct 2026 3:13 PM IST
भारत दौरे पर अमेरिकी कमांडर पापारो रक्षा सहयोग पर होगी अहम चर्चा
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नई दिल्ली। अमेरिका के इंडो-पैसिफिक कमांड के कमांडर एडमिरल सैमुअल जे. पापारो शनिवार को भारत पहुंचे। उनका यह दौरा 3 से 8 अक्टूबर 2026 तक चलेगा। छह दिवसीय आधिकारिक यात्रा का उद्देश्य भारत-अमेरिका की मेजर डिफेंस पार्टनरशिप को मजबूत करना और दोनों देशों की सेनाओं के बीच सहयोग को और गहरा करना है। यात्रा के दौरान एडमिरल पापारो भारतीय रक्षा मंत्रालय और सशस्त्र बलों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में साझा सुरक्षा प्राथमिकताओं पर बातचीत करेंगे।अमेरिकी दूतावास के अनुसार, उनकी बैठकों के एजेंडे में डिजिटल परिवर्तन, उभरती और महत्वपूर्ण तकनीक, क्षेत्रीय रणनीतिक स्थिरता, रक्षा क्षेत्र में ऊर्जा लचीलापन तथा तेजी से प्रतिस्पर्धी होती वैश्विक तकनीकी व्यवस्था जैसे मुद्दे शामिल हैं। दूतावास ने कहा कि अमेरिका और भारत नई तकनीक से लेकर समुद्री सुरक्षा तक ऐसे रक्षा संबंध विकसित कर रहे हैं, जो भविष्य की चुनौतियों से निपटने में सक्षम हों।
छह दिन के दौरे में वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात
एडमिरल पापारो अपनी यात्रा के दौरान रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों और भारतीय सशस्त्र बलों के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात करेंगे। इन बैठकों में दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग, क्षेत्रीय सुरक्षा और भविष्य की रक्षा आवश्यकताओं को लेकर चर्चा होने की संभावना है।अमेरिकी इंडो-पैसिफिक कमांड के प्रमुख की भारत यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा, तकनीकी प्रतिस्पर्धा और रणनीतिक स्थिरता प्रमुख विषय बने हुए हैं। अमेरिका और भारत दोनों ही क्षेत्र में नियम-आधारित व्यवस्था और समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर सहयोग बढ़ाने पर जोर देते रहे हैं।
डिजिटल बदलाव और नई तकनीक पर फोकस
इस यात्रा में उभरती तकनीकों को विशेष महत्व दिया जा रहा है। अमेरिकी दूतावास ने डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और इमर्जिंग क्रिटिकल टेक्नोलॉजी को वार्ता के प्रमुख विषयों में शामिल किया है।रक्षा क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्वायत्त प्रणालियां, साइबर क्षमताएं, उन्नत सेंसर और डेटा आधारित सैन्य प्रणालियों का महत्व तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में भारत और अमेरिका के बीच तकनीकी सहयोग, नई क्षमताओं के विकास और सैन्य उपयोग के लिए अत्याधुनिक तकनीक को अपनाने पर चर्चा दोनों देशों के रक्षा संबंधों का अहम हिस्सा बन सकती है।भारत और अमेरिका पहले से ही रक्षा तकनीक और सह-विकास के क्षेत्रों में सहयोग करते रहे हैं। फरवरी 2025 में दोनों देशों ने रक्षा साझेदारी को और व्यापक बनाने के लिए अगले दशक की रूपरेखा पर काम करने की घोषणा की थी। इसमें रक्षा बिक्री, सह-उत्पादन और इंटरऑपरेबिलिटी बढ़ाने पर जोर दिया गया था।
समुद्री सुरक्षा पर भी होगी बातचीत
एडमिरल पापारो का पद सीधे हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा से जुड़ा है। इसलिए उनकी भारत यात्रा में समुद्री सुरक्षा को महत्वपूर्ण स्थान मिलना स्वाभाविक है। अमेरिकी दूतावास ने भी अपने बयान में “इमर्जिंग टेक्नोलॉजी से मैरिटाइम सिक्योरिटी” तक सहयोग की बात कही है।भारत की भौगोलिक स्थिति हिंद महासागर क्षेत्र में उसे महत्वपूर्ण समुद्री शक्ति बनाती है। दूसरी ओर, अमेरिका की इंडो-पैसिफिक रणनीति में हिंद महासागर का महत्व लगातार बढ़ा है। दोनों देशों की नौसेनाएं नियमित रूप से विभिन्न बहुपक्षीय और द्विपक्षीय अभ्यासों में भाग लेती हैं, जिनका उद्देश्य परिचालन तालमेल और समुद्री निगरानी जैसी क्षमताओं को बेहतर करना है।
रक्षा क्षेत्र में ऊर्जा सुरक्षा पर भी नजर
यात्रा के एजेंडे में रक्षा क्षेत्र की ऊर्जा सुरक्षा यानी “डिफेंस एनर्जी रेजिलिएंस” को भी शामिल किया गया है। आधुनिक सैन्य अभियानों में ईंधन, ऊर्जा आपूर्ति और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा का महत्व बढ़ गया है।दोनों देशों के बीच इस विषय पर सहयोग का उद्देश्य संभावित संकट या आपूर्ति में व्यवधान के दौरान रक्षा प्रणालियों की परिचालन क्षमता बनाए रखने से जुड़ा हो सकता है। अमेरिका और भारत पहले से ही लॉजिस्टिक्स और परिचालन सहयोग बढ़ाने पर काम कर रहे हैं, ऐसे में ऊर्जा सुरक्षा को भी व्यापक रक्षा साझेदारी का हिस्सा बनाया जा रहा है।
रणनीतिक स्थिरता होगी प्रमुख मुद्दा
इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बदलते सुरक्षा समीकरणों के बीच क्षेत्रीय रणनीतिक स्थिरता भी बातचीत का महत्वपूर्ण विषय होगी। भारत और अमेरिका के बीच पिछले वर्षों में रक्षा संवाद और सैन्य अभ्यासों का दायरा बढ़ा है।दोनों देश मलाबार जैसे नौसैनिक अभ्यासों के अलावा थल, वायु और साइबर क्षेत्र में भी नियमित सैन्य गतिविधियों में भाग लेते हैं। अमेरिकी इंडो-पैसिफिक कमांड के अनुसार, इस तरह के अभ्यास दोनों देशों की सेनाओं के बीच इंटरऑपरेबिलिटी और उच्च-स्तरीय परिचालन तैयारियों को बेहतर बनाने में मदद करते हैं।
इसी साल दूसरी भारत यात्रा
एडमिरल पापारो इस साल दूसरी बार भारत आ रहे हैं। इससे पहले उन्होंने फरवरी 2026 में भी भारत का दौरा किया था। उस यात्रा के दौरान उन्होंने भारतीय सैन्य नेतृत्व और रक्षा क्षेत्र से जुड़े अधिकारियों के साथ बैठकें की थीं।दूसरी यात्रा यह बताती है कि दोनों देशों के सैन्य संबंधों में नियमित उच्चस्तरीय संवाद को महत्व दिया जा रहा है। इस बार तकनीक, ऊर्जा, समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक स्थिरता को एक साथ वार्ता के एजेंडे में शामिल किया गया है।
भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी का विस्तार
भारत और अमेरिका के बीच रक्षा संबंध पिछले वर्षों में कई स्तरों पर विस्तारित हुए हैं। अमेरिका ने भारत को 2016 में “मेजर डिफेंस पार्टनर” का दर्जा दिया था। इसके बाद दोनों देशों के बीच रक्षा खरीद, सह-उत्पादन, सैन्य अभ्यास और तकनीकी सहयोग बढ़ा है।भारतीय सशस्त्र बलों के बेड़े में C-17, C-130J, P-8I, MH-60R और अन्य अमेरिकी मूल के प्लेटफॉर्म शामिल हैं। दोनों देशों ने रक्षा औद्योगिक सहयोग और संयुक्त उत्पादन को भी आगे बढ़ाने की योजनाएं बनाई हैं।
भविष्य की चुनौतियों पर साझेदारी
अमेरिकी दूतावास ने एडमिरल पापारो की यात्रा को भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों के संदर्भ में भारत-अमेरिका सहयोग से जोड़ते हुए कहा है कि दोनों देश एक ऐसी रक्षा साझेदारी तैयार कर रहे हैं जो बदलती परिस्थितियों का सामना कर सके। इसमें नई तकनीक, समुद्री सुरक्षा और सैन्य सहयोग को प्रमुख आधार बताया गया है।कुल मिलाकर, एडमिरल सैमुअल जे. पापारो का 3 से 8 अक्टूबर तक का भारत दौरा रक्षा और सैन्य सहयोग के कई अहम क्षेत्रों को एक साथ आगे बढ़ाने का अवसर है। उनकी भारतीय अधिकारियों के साथ होने वाली बातचीत में इंडो-पैसिफिक सुरक्षा, डिजिटल बदलाव, नई तकनीक, ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री सहयोग जैसे मुद्दे केंद्र में रहेंगे। यात्रा के दौरान होने वाली बैठकों से आने वाले समय में भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी की प्राथमिकताओं और सहयोग के नए क्षेत्रों को लेकर तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।
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