
मिडिल ईस्ट: एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंच गया है। अमेरिका ने ईरान के खिलाफ बड़ी सैन्य कार्रवाई करते हुए कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। रिपोर्टों के मुताबिक, यह हमला पहले हुए हमलों की तुलना में कई गुना बड़ा और शक्तिशाली बताया जा रहा है। अमेरिका की इस कार्रवाई के बाद दोनों देशों के बीच संघर्ष और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। यह हमला ऐसे समय में हुआ है, जब ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर मौजूद हैं। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि सैन्य अभियान अभी कई घंटों तक जारी रह सकता है। रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज क्षेत्र में अमेरिका की इस कार्रवाई को अब तक का बड़ा सैन्य ऑपरेशन बताया जा रहा है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी लड़ाकू विमानों और मिसाइलों ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर हमला किया है, जो हालिया हमलों की तुलना में चार से पांच गुना ज्यादा बड़ा बताया जा रहा है।
अमेरिका ने क्यों किया हमला?
अमेरिका का कहना है कि यह कार्रवाई ईरान की ओर से अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों पर किए गए हमलों के जवाब में की गई है। हाल ही में होर्मुज क्षेत्र में तेल टैंकरों को निशाना बनाए जाने के बाद अमेरिका ने ईरान पर दबाव बढ़ाया था। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, इस ऑपरेशन में ईरान के हवाई रक्षा सिस्टम, कमांड एंड कंट्रोल नेटवर्क, तटीय रडार केंद्रों और एंटी-शिप मिसाइल ठिकानों को निशाना बनाया गया। इसके अलावा इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की 60 से ज्यादा छोटी सैन्य नौकाओं को भी निशाना बनाने का दावा किया गया है।
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तुर्की में आयोजित NATO शिखर सम्मेलन के दौरान इस सैन्य अभियान को मंजूरी दी थी।
ईरान के कई इलाकों में धमाकों की खबर
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ईरान के कई बंदरगाह शहरों और द्वीपों में भारी बमबारी की गई। केश्म द्वीप पर कई बड़े धमाकों की आवाज सुनाई देने की खबर है। वहीं सिरिक इलाके में कई मिसाइल गिरने की बात कही गई है। बंदर अब्बास जैसे महत्वपूर्ण बंदरगाह शहर में भी धमाकों की जानकारी सामने आई है।
एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि ईरान चेतावनियों को नजरअंदाज कर रहा था, इसलिए इस बार हमलों की तीव्रता बढ़ाई गई है।
शांति वार्ता पर संकट
अमेरिकी हमले के बाद दोनों देशों के बीच चल रही बातचीत पर भी संकट के बादल मंडरा रहे हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ अंतरिम समझौता समाप्त हो चुका है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि बातचीत का रास्ता पूरी तरह बंद नहीं किया गया है।
अमेरिका ने ईरानी तेल बिक्री से जुड़ी अस्थायी छूट को भी रद्द कर दिया है। इससे ईरान की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ने की संभावना है।
ईरान ने दी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी
अमेरिकी हमले के बाद ईरान ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। ईरानी सैन्य मुख्यालय खातम-अल-अंबिया ने इस कार्रवाई को खुली आक्रामकता बताया है। ईरानी सेना ने चेतावनी दी है कि वह इसका जवाब देगा और होर्मुज क्षेत्र में किसी भी बाहरी हस्तक्षेप को स्वीकार नहीं करेगा।
ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बगेर गालिबफ ने सोशल मीडिया पर कहा कि दबाव और धमकी की नीति अब काम नहीं करेगी और ईरान पीछे नहीं हटेगा।
ईरानी राष्ट्रपति लौटे तेहरान
इस बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने अपना विदेश दौरा बीच में छोड़ दिया और तेहरान लौट गए हैं। वह पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के अंतिम संस्कार कार्यक्रमों के लिए इराक के नजफ गए थे।
वहीं नए सर्वोच्च नेता के रूप में बताए जा रहे मोजतबा खामेनेई सार्वजनिक कार्यक्रमों में नजर नहीं आए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, उनकी सुरक्षा को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता यह तनाव अब वैश्विक चिंता का विषय बन गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच जवाबी हमले जारी रहते हैं तो इसका असर तेल बाजार, वैश्विक अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा पर पड़ सकता है।





